निशाने पर हैं भाजपा के कई विधायक — सौ टंच में हेमंत पाल

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह तीन दिन भोपाल में रहेंगे। उनके तीन दिनों का कार्यक्रम तय है। लेकिन, संगठन के साथ बैठक में इस मुद्दे पर भी विचार हो सकता है कि अगले विधानसभा चुनाव में किसे टिकट दिया जाएगा और किसे नहीं! क्योंकि, पार्टी के सामने सबसे बड़ा सवाल प्रदेश में चौथी बार सरकार बनाना है। सरकार बनाने के लिए भाजपा को जीतने वाले उम्मीदवारों पर दांव लगाना पड़ेगा! लेकिन, ये उम्मीदवार कौन होंगे, ये चुनाव भी आसान नहीं है। वर्तमान विधायकों में से किसे फिर टिकट दिया जाए और किसका काटा जाए ये मुश्किल काम है। क्योंकि, जिसका टिकट कटेगा, उसकी भूमिका का ध्यान रखना भी पार्टी के लिए जरुरी होगा।       
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  मध्यप्रदेश में चुनाव अभी करीब सवा साल बाकी है। लेकिन, भाजपा में जिस तरह की हलचल दिखाई दे रही है ये पार्टी की घबराहट दर्शा रही है। संगठन के सामने सबसे बड़ा सवाल टिकटों के बंटवारे का होगा। अभी ये तय नहीं है कि पार्टी उन सभी विधायकों को फिर टिकट देगी जो पिछली बार जीतकर आए थे। करीब एक दर्जन मंत्री तो संगठन की नजर में हैं, जिनके टिकट कटेंगे! पर, ऐसे विधायकों की गिनती अभी नहीं की गई। सबसे टेढ़ा काम तो ये है कि उनका मूल्यांकन कैसे होगा? पार्टी किस आधार पर किसी विधायक का टिकट काटेगी और यदि काटती है तो उसे समझाया कैसे जाएगा? ये सब आसान नहीं है। जिस भी विधायक का टिकट कटेगा उसके सेबोटेज का खतरा भी सरकार को झेलना है।
  यही कारण है कि भाजपा ने सभी विधायकों का रिपोर्ट कार्ड अलग-अलग माध्यमों से बनवाना शुरू कर दिया है। उधर, संघ भी इसी काम में लगा है। अंदर की ख़बरें बताती है कि तीन स्तरों पर रिपोर्ट कार्ड बनाया जा रहा है। जिन विधायकों की अनुशंसा तीनों रिपोर्ट में होगी, उनके टिकट कटने से कोई नहीं रोक सकता। रिपोर्ट में विधायक के क्षेत्र में उसकी और पार्टी की इमेज का पता लगाया जाएगा। लोगों के बीच विधायक की छवि, कामकाज के प्रति गंभीरता, व्यवहार, विधायक के आसपास रहने वाले लोगों की छवि के अलावा कार्यकाल में उसकी बढ़ी संपत्ति को भी परखा जा रहा है। उस क्षेत्र में विपक्षी पार्टी की स्थिति का भी पार्टी पता लगा रही है। जो भी विधायक पार्टी के इस मूल्यांकन पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके टिकट कटना तय है। ऐसी जगहों पर नए चेहरों को आजमाया जाएगा।
   पार्टी ने हर क्षेत्र में तीन नए चेहरों का पैनल बनाना भी तय किया है। लेकिन, टिकट किसको मिलता है, ये यक्ष प्रश्न है। इस बार भाजपा उम्र की सीमा को आधार बनाकर भी कुछ विधायकों ले टिकट काट सकती है। भाजपा ने अपने सर्वेक्षण में वर्तमान विधायक, संभावित नए चेहरों और भाजपा में अन्य पार्टियों से आए विधायकों के लिए भी कुछ मापदंड निर्धारित किए हैं। ये मापदंड भी टिकट मिलने या काटने का आधार बनेगा। सीधी सी बात ये है कि भाजपा इस बार सिर्फ उन्हीं चेहरों पर दांव लगाएगी जो पार्टी के खांचे में फिट बैठेंगे! भाजपा इस बार कोई भी रिस्क लेकर चुनाव मैदान में उतरने के मूड में नहीं है। उम्मीदवारों की छवि को प्रभावित करने वाले कारकों को भी परखेगी! संघ के पदाधिकारियों के साथ प्रदेश संगठन भी मिलने वाली सारी रिपोर्टों का अध्ययन करेगा और उसी आधार पर टिकट मिलने या कटने का फैसला होगा।
   भाजपा विधायकों की शुरूआती रिपोर्ट में आए निगेटिव नतीजों को लेकर सत्ता और संगठन में हड़कंप भी हो चुका है। चंबल, विंध्य बुंदेलखंड के अलावा मालवा क्षेत्र के भी कई भाजपा विधायकों की रिपोर्ट बहुत कमजोर आई है। यही कारण है कि पार्टी ने निश्चय कर लिया है कि सदाशयता के आधार पर किसी को टिकट नहीं दिया जाएगा। यदि संगठन के जिम्मेदार लोगों की बात पर भरोसा किया जाए तो करीब सौ वर्तमान विधायक (जिनमें मंत्री भी शामिल हैं) के टिकट निशाने पर हैं। क्योंकि, सिर्फ जीतने की संभावना और नेता पुत्र या पुत्रियों के आधार पर इस बार शायद भाजपा किसी को टिकट न दे! लेकिन, सबसे बड़ा खतरा ये भी है कि जिसका टिकट काटा जाएगा उसकी भूमिका को भी परखा जाएगा! ,क्योंकि ऐसी स्थिति में वो या तो बगावत करके किसी अन्य दल से चुनाव में खड़ा हो सकता है या पार्टी में रहकर उसका खेल बिगाड़ सकता है जिसे पार्टी ने उसे हटाकर टिकट दिया हैं।
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(लेखक ‘सुबह सवेरे’ इंदौर के स्थानीय संपादक हैं)
09755499919 

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