रेरा के बाद अब इसीबीसी ……

1
127

लोकलइंदौर 12 अगस्त ब्यूरो। शहर में अब शॉपिंग मॉल या कमर्शियल काम्प्लेक्स के अलावा निजी क्षेत्र में भवन बनाने की अनुमति के पूर्व अब बिल्डर को एक और विभाग से अनुमति लेना होगी जिसे एनर्जी कन्वर्सेशन बिल्डिंग कोड (ईसीबीसी) के नाम से जाना जावेगा। यह विभाग निजी क्षेत्र के कार्यालयों में बिजली की खपत 50 प्रतिशत तक कम दिखने के बाद ही भवन बनाने की अनुमति जारी करेगी। 1 अक्टूबर से यह विभाग पूरी तरह काम करने लगेगा। निर्माण गतिविधियों की निगरानी पर रेरा के बाद यह एक और नई एजेंसी होगी। वहीं 100 किलोवाट से ज्यादा बिजली का भार होगा तो बिल्डिंग प्लान को मंजूरी के लिए यहां जाना होगा।
सूत्रों के अनुसार भविष्य में निर्मित होने वाले सभी व्यवसायिक और सरकारी इमारतों में ऊर्जा संरक्षण के प्रावधान अनिवार्य रूप से लागू किए जा रहे है। 1 अक्टूबर से अब ईसीबीसी का कार्यालय अलग से काम करना प्रारंभ करेगा जिसमें इलेक्ट्रिकल इंजीनियर के अलावा पर्यावरण और अन्य इंजीनियर भी अपनी सेवाएं देंगे। निर्माण करने से पहले डेवलपर को यह बताना होगा कि बिजली बचाने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा रहे है। साथ ही सुबह 10 से शाम 4 बजे तक बिल्डिंग में कितने प्रतिशत उजाला बिजली न होने पर भी बना रहेगा। बिजली के विकल्प के रूप में सोलर ऊर्जा से कौन-कौन से उपकरण चलाए जाएंगे ऐसा किए बिना अब निर्माण की मंजूरी नहीं मिलेगी। नगर निगम के पूर्व इस विभाग की मंजूरी जरूरी होगी। ईसीबीसी कोड में बिजली बचाने के साथ ही कन्फर्ट सिस्टम बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है। यानि व्यवसायिक भवन में काम करने और यहां आने वाले लोगों को पॉजीटिव एजर्नी और फिलगुड का अहसास हो। इसके लिए बिल्डिंग की डिजाइन को भी प्राकृतिक रूप से पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था के लिए तैयार करवाना है और बिना एसी और पंखे के अंदर कमरों में ठंडी हवा का प्रवाह जारी रहे। इससे बिजली की बचत भी होगी।
25 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम करेंगे
केन्द्र सरकार 2030 तक 25 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए इस विभाग को खोल रही है। ईसीबीसी व्यवसायिक क्षेत्र में बिजली की खपत 50 प्रतिशत तक कम करते हुए 35 हजार करोड़ रुपए की बिजली बचाने का लक्ष्य रखा गया है।
ऊर्जा भार पर लागू होंगे ईसीबीसी के प्रावधान
ईसीबीसी के प्रावधान उन भवनों पर लागू होंगे जिनका कुल विद्युत भार 100 किलोवाट तक या इससे अधिक होगा। डेवलपर को कुल खपत का 40 फीसदी तक ऊर्जा संरक्षण का प्लान बनाना होगा।
निर्माण की मंजूरी के लिए एनर्जी ऑडिटर से लेना होगा सर्टिफिकेट
डेवलपर्स को ईसीबीसी से सर्टिफाइड बिल्डिंग एनर्जी ऑडिटर से एनर्जी कंजर्वेशन का प्लान बनवाना होगा। इसमें बिल्डिंग के फ्लोर एरिया और कंस्ट्रक्शन एरिया में लगने वाले विद्युत उपकरणों की डिटेल, बिजली की जरूरत का आंकलन बताना होगा।
ऊर्जा दक्ष भवन तैयार करेंगे
ईसीबीसी कोड लागू होने के साथ ही अब प्रदेश में सोलर ऊर्जा का अधिक से अधिक उपयोग हो इसके लिए तैयारियां प्रारंभ हो गई हैं। इस विभाग का उद्देश्य ऊर्जा दक्ष भवन का निर्माण करवाना है।
-भुवनेश पटेल, चीफ इंजीनियर, मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम

1 COMMENT

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here