अन्ना के लोकपाल से दो गुना हो जाएगा भ्रष्टाचार -जस्टिस काटजू

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लोकल इंदौर5 अगस्त । समाजसेवी अन्ना हजारे का जन लोकपाल बिल यदि पारित हो जाता तो भ्रष्टाचार कम होने के बजाय दो गुना बढ़ जाता। मीडिया में शायद किसी ने भी बिल को ठीक से पढ़ा ही नहीं और बजाय उसे सही तरीके से रिपोर्ट करने के ज्यादातर लोग अन्ना के आंदोलन में शामिल हो गए जो बेहद खतरनाक है।

यह बात प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेअरमैन जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने रविवार सुबह   इंदौर में आनंद मोहन माथुर सभागृह में आयोजित श्री महेंद्र जोशी स्मृति प्रसंग में कही।

मीडिया की भूमिका और अन्ना हजारे का आंदोलन विषय पर बोलते हुए जस्टिस काटजू ने कहा पत्रकारिता का उद्देश्य जनता को सही सूचना एवं जानकारी देना है,ताकि लोग सही मत बना सके। लोकतंत्र के लिए बहुत जरूरी है। इसके बगैर लोकतंत्र चल नहीं सकता। दिक्कत तब होती है जब कोई पत्रकार व्यक्तिगत रूप से किसी गतिविधि में खुद शामिल हो जाता है। जैसे बाबरी आंदोलन के समय हुआ था तब भी कई अखबार कारसेवक बन गए थे। ऐसा ही दिसंबर में हुए अन्ना हजारेजी के आंदोलन के साथ हुआ। आंदोलन की सटीक खबर देने के बजाय खुद जज्बात में बह गए।

उन्होंने कहा यदि अन्ना हजारे का जन लोकपाल बिल लागू होता तो हमें डेढ़.दो लाख लोकपालों की जरूरत होती। उन्हें लिए घरए दफ्तर और अन्य सुविधाएं देना होती।

उन्होंने कहा  मैंने पहले कहा था और आज भी मैं उस बात पर कायम हूं कि देश के 90 फीसदी लोग मूर्ख हैं वे जातिवादए अंधविश्वासए ज्योतिष आदि में उलझे हुए हैं। हमारे यहां बड़ा पिछड़ापन है। मीडिया को इनका हिस्सा बनने के बजाय लोगों को इससे उबारने के लिए काम करना चाहिए।

मैं तो शुरू से कहना चाहता था लेकिन उस वक्त कहता तो लोग मुझे देशद्रोहीए गद्दार कहते। अब अन्ना राजनीति में आ गए हैं उनसे पूछना चाहिए कि उनकी पार्टी किसी जाति या धर्म की होगी। यादव कुलमी या हरिजन की होगी।  अन्ना ने कहा हम चुनाव नहीं लड़ेंगे क्योंकि चुनाव लडऩे में 15.20 करोड़ रुपए खर्च होते हैंए वे मेरे पास नहीं है। अब  वे कहां से लाएंगे ये पैसा। ये सबसे बड़ा सवाल है।

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