असम की नाबालिग को इंदौर में बनाया बन्धुआ मज़दूर

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लोकल इंदौर। असम से लाकर बच्ची को बेचने वाले गिराह का पर्दाफाश हुआ है। एक परिवार बच्ची को खरीदकर बंधुआ मजदूर की तरह काम करवा रहा था। पिछले 6 माह से काम करने वाली इस बच्ची को हिंदी सिखाने के साथ खाना बनाने की ट्रेनिंग भी नई दिल्ली में दी गई।

जानकारी के अनुसार राजीव गांधी प्रतिमा चौराहा के पास 117, पिपलियापाला पर रमेशचंद्र गुप्ता का बंगला है। वहां असम से लाई 13 वर्षीय बच्ची के काम करने की सूचना थी। रैकी कर जानकारी निकाली तो सच्चाई सामने आई। मंगलवार को चाइल्ड लाइन व श्रम विभाग की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। वहां पर असम की मैरीना काम करते मिली। घर पर रमेशचंद्र की माता मिली।

बच्ची ने बताया कि वह 6 माह से काम कर रही है। उसे नई दिल्ली का एक एजेंट लाया और 24 हजार रुपए लिए थे। इसी जगह पर एक बच्ची पहले से काम कर रही थी, वह उसे वापस ले गया। बच्ची ने बताया कि वह अपने माता-पिता के साथ रहती थी, तब पास में रहने वाली एक महिला उसे गुवाहाटी ले जाने का कहकर नई दिल्ली ले आई और एजेंट को सौंप दिया। नई दिल्ली में उसे हिंदी सिखाई गई और खाना बनाने के साथ ही घर के अन्य कामों की ट्रेनिंग दी गई। पिछले 6 माह से उसे माता-पिता से भी मिलाया नहीं गया।

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