‘आदिवासी दिवस’ के मंच पर भारी रही रंजना बघेल! – एकता शर्मा  की त्वरित टिप्पणी

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 धार में विश्व आदिवासी दिवस पर हुए ‘आदिवासी दिवस’ के मंच पर धार जिले की राजनीति का एक नया नजारा दिखाई दिया। मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में हुए इस आयोजन के सारे सूत्र मनावर की विधायक रंजना बघेल, उनके पति और कुक्षी नगर पालिका अध्यक्ष मुकामसिंह किराड़े के हाथ में दिखाई दिए। दोनों  परंपरागत आदिवासी वेशभूषा में थे। मंच पर रंजना बघेल ने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी साधना सिंह से अपनी नजदीकी दिखाने में कसर नहीं छोड़ी!
  ‘आदिवासी दिवस’ के मंच ने रंजना बघेल का राजनीतिक कद बढ़ा दिया। उन्होंने साधना सिंह को आदिवासियों के परंपरागत गहने पहनाकर अपने धुर विरोधियों को पीछे छोड़ दिया। जबकि, मुकामसिंह किराड़े ने मुख्यमंत्री और मंत्री लालसिंह आर्य को आदिवासी साफा और जैकेट पहनाई! मौजूद लोगों पर रंजना बघेल ने जो प्रभाव छोड़ा, भविष्य की जिले कि राजनीति और होने वाले विधानसभा चुनाव पर उसका असर दिखाई देगा। एक वाकया ऐसा भी हुआ, जब रंजना ने मुख्यमंत्री को भाषण करने से रोककर जय आदिवासी संगठन के प्रवक्ता महेंद्र कन्नौज का भाषण बीच में करवाया।
   इस मंच पर आदिवासी प्रतिनिधि के तौर पर सांसद सावित्री ठाकुर, सरदारपुर के विधायक वेलसिंह भूरिया, धरमपुरी विधायक कालूसिंह ठाकुर, जिला पंचायत अध्यक्ष मालती पटेल समेत अन्य कई नेता मौजूद थे। लेकिन, रंजना बघेल ने अपनी चतुर कूटनीति से सबको पीछे छोड़ दिया। मालती पटेल भी मंच पर सक्रिय दिखाई दी, जबकि सांसद सावित्री ठाकुर भी रंजना के प्रभाव के आगे अपेक्षाकृत दबी सी रही! राजनीतिक मंच पर पहली बार धार की विधायक नीना वर्मा को उभरने का मौका नहीं मिला, जिला पंचायत अध्यक्ष मालती पटेल उनपर हावी रही! कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस बात पर भी गौर किया कि रंजना बघेल की पूरी कोशिश नीना वर्मा पर भारी पड़ने की थी, जिसमें वे सफल भी रहीं। धार की भाजपा राजनीति में इन दोनों को एक-दूसरे की धुर विरोधी माना जाता है।
  धार जिले की सात विधानसभाओं में दो सामान्य हैं और पाँच आदिवासी आरक्षित! लेकिन, आज के आयोजन में जिले के तीन आदिवासी विधायकों में रंजना राजनीतिक रूप से सबपर भारी पड़ी! मंत्री लालसिंह आर्य और रंजना बघेल ही दो ऐसे वक्ता रहे, जिन्होंने आदिवासी बोली में सम्बोधन दिया। कार्यक्रम के अंत में मंच पर आदिवासी धुन पर रंजना बघेल ने मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी को भी थिरकने पर मजबूर कर दिया। आदिवासी डांस में भी मंच पर मौजूद बाकी विधायकों को मौका नहीं मिला!

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