आलसियों की बल्ले बल्ले….. मधुकर पवार का व्यंग्य

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अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम…. दास मलूका कहे गए सबके दाता राम.….इस दोहा को पढ़ और सुनकर हम सब बड़े हुये हैं। जब कभी  के बताए काम में देरी हो जाये तो वह उलाहना जरूर देता है… बड़े आलसी हो !… घर में तो प्राय: बचपन में सभी को सुनने को मिला होगा…. आलस और बिस्तर छोड़ो… स्कूल जाने में देरी हो रही है। बड़े हुये तो आसलियों के चुटकुले भी खूब सुने और सुनाये। आलसी होने का तमगा जो बचपन में लगा अभी तक लगा हुआ है और मुझे आशा ही नहीं पूरा विश्वास है कि यह जीवन पर्यंत रहेगा। जब आखरी सांस निकलने को होगी तब भी किसी न किसी के मन में यह विचार जरूर आयेगा,  बड़ा  आलसी है, मरने में भी आलस कर रहा है।

परिवार और समाज में आलसियों को हिराकत भरी नजरों से देखा जाता है। परिवार-में तो यदा कदा न केवल आलोचना का शिकार होना पड़ता है बल्कि कभी कभी तो रिश्तेदारों के सामने भी अपमानित होना पड़ जाता है। मुझे बड़ा आश्चर्य होता है कि वह अपमान कैसे सहन कर लेता है ? उसका पुरूषार्थ  जागृत क्यों नही होता ? आदि आदि सवाल मन में कौंधते रहते हैं लेकिन जब से अखबार में आलसी होने के फायदे पढे हैं…. आलसियों के प्रति मन में अगाध श्रद्धा पैदा हो
गई है। आखिर आलस का गुण कितनी मेहनत के बाद हासिल होता है…  यह  आलसी से भला ज्यादा कौन जान सकता है ? कोई किसी को आलसी कह कर उलाहना दे… कोई गैरतमंद व्यक्ति कैसे सहन कर सकता है लेकिन आलसी मुस्कराते हुये उसके प्रति आदर भाव ही प्रदर्शित करता है। यह गुण प्राप्त करने में उसने कितनी लगन, मेहनत और ईमानदारी से उलहाना के स्वर को शांति के साथ सुना होगा, इसकी कल्पना सहज ही की जा सकती है।

जब से अखबार में आलसी होने के फ़ायदों के बारे में पढ़ा है… अपने आप पर आलसी होने का गर्व महसूस कर रहा हूँ। पत्नी भी घर में अक्सर कहती है… मैं दिन भर घर के काम करती हूँ और आप हो कि एक काम नहीं करते। बड़े आलसी हो। अब बिलकुल भी बुरा नहीं लगता बल्कि मन प्रसन्न हो जाता है। लगता है जैसे कोई उपाधि, पद्मश्री सम्मान मिल गया हो। आखिर आलसी होने पर गर्व क्यों न करें…. जब दिमाग और सेहत के लिए आलस फायदेमंद है तो आलसी होने से क्यों बचा जाये ? मैं तो मानता हूँ कि यदि पूरी दुनिया ही आलसी हो जाये तो जितनी भी समस्याएँ हैं उनका अपने आप ही निराकरण हो जाएगा। आलस से होने वाले फ़ायदों में तनाव से मुक्ति, अच्छी नींद आना, पत्नी के साथ अच्छे संबंध, रचनात्मकता में वृद्धि के साथ पाचन भी ठीक रहना शामिल है तो वाकई आलस को सुखी जीवन का आधार माना जाना चाहिए। यदि पूरी दुनिया में आलसवाद का विस्तार हो जाए तो कल्पना कीजिये….. भागम भाग से मुक्ति, न झगड़ा न फसाद …. कोई प्रतिस्पर्धा नहीं…. पूरी दुनिया में शांति । शांति इसलिए कि जब किसी को गुस्सा ही नहीं आयेगा तो झगड़ा युद्ध तो केवल-किताबों में ही सिमटकर रह जाएँगे।

एक बड़ा प्रेरणादायक प्रसंग याद आ गया…. एक व्यक्ति पेड़ के नीचे खटिया पर भारी दुपहरी में ग्रीष्म ऋतु का आनंद लेकर आराम कर रहा था। एक घुड़सवार वहाँ से निकाला। आराम का आनंद लेते हुये व्यक्ति से पूछा …. बड़े आराम से लेटे हो… कुछ काम क्यों नहीं करते ? उस व्यक्ति ने पूछा— उससे क्या होगा ? घुड़सवार ने कहा … अरे  भाई कुछ काम करोगे तो  पैसे मिलेंगे। उस व्यक्ति ने पूछा … उससे क्या होगा ? घुड़सवार ने कहा—पैसे कमाकर कोई-व्यापार शुरू कर सकते हो। उसने पूछा – फिर क्या होगा? घुड़सवार ने कहा—खूब रूपये कमाओगे तो अमीर बन जाओगे। उस व्यक्ति ने फिर पूछा…. उससे क्या होगा ? घुड़सवार ने कहा… अरे भाई… अमीर आदमी बन जाओगे तो आपके यहाँ नौकर चाकर होंगे और आप आराम करोगे  l आराम कर रहे व्यक्ति ने कहा… अभी तो आराम ही कर रहा हूँ। आराम करना ही है तो फिर इतनी मेहनत करने की क्या आवश्यकता ? ज्ञान देने वाला घुड़सवार निरूत्तर होकर अपने गंतव्य की ओर चला गया। यह प्रसंग हम जैसे आलसियों के लिए कितना प्रेरणादायक है… सामने मिल जाये तो उसके चरण धोकर पानी भी पीएं तो उसका कर्ज नहीं उतार सकते। सही मायने में मेरे जैसे आलसी का गुरू ऐसा व्यक्ति ही होना चाहिए।

अब प्रश्न उठता है कि जब यह सिद्ध हो चुका है कि आलस होने के फायदे ही फायदे हैं तो पूरी दुनिया…( मुझ जैसे अनेक आलसियों को छोड़कर ) भागम भाग क्यों कर रही है? जिसको देखो वही भागे जा रहा है? कोई पैसों के पीछे…. कोई शोहरत के पीछे, कोई मोहब्बत के पीछे… तो कोई जमीन जायजाद के पीछे… आदि आदि के पीछे… । जब दुनिया में आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक, या ये कहें सभी तरह की समस्याएँ सुरसा की भांति मुंह खोलकर खड़ी है और इसका कोई स्थाई समाधान भी नजर नहीं आ रहा है तो क्या कीजिएगा ? दुनिया की सभी समस्याओं का समाधान केवल आलसवाद से ही संभव है। अपनी आंखे किसी आलसी व्यक्ति के माफिक… धीरे – धीरे बंद करते हुये आराम से सोचिए… यदि सब कुछ आराम से होता यानि आलस के साथ तो कितना सुकून मिलता। कहीं भी कोई
जल्दबाज़ी नहीं…बड़ा आनंद आता… । मेरे आलसी मित्रों… अब वक्त आ गया है॥ हमारा भी एक संगठन होना चाहिए… संगठन बनाने में कोई जल्दी नहीं है… जब ईच्छा हो अपना जवाब दे देना। मित्रों अब कोई तनाव नहीं है… आलसवाद को पूरी तरह अपनाने का संकल्प ले लिया है। किसी ने ठीक ही कहा है…

किस किस को याद कीजिये किस किस को रोईए… आराम बड़ी चीज है, मुंह ढांककर सोईये

मधुकर पवार

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