इंदौर से उठाई थी गांधीजी ने हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की आवाज

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लोकल इंदौर विशेष 14 सितम्बर । आप को शायद यकीन न हो लेकिन ये सच है कि इंदौर ही वह जगह है जहॉ से हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाए जाने का आह्वान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने किया था और उनके  आह्वान  पर उनके पुत्र  देवदास गांधी सहित पॉंच लोगों को हिन्दी दूत बना कर मद्रास भेजा गया था।

इंदोर की  मध्य भारत हिन्दी साहित्य समिति द्वारा आठवें हिन्दी साहित्य सम्मेलन का आयोजन इंदौर में 29 मार्च1918 में किया गया था। इस आयोजन केअध्यक्षता का जिम्मा गॉंधी जी को सौंपा गया था । बापू ठेठ काठियावाड़ी पगड़ी, कुरते और धोती के लिबास में थे । उन्होने आव्हान किया कि हम हिन्दंस्तानी भी अपनी हिन्दी भाषा में बोले।

उन्होंने कहा था, ‘जैसे अंग्रेज अपनी मादरी जुबान यानी अंग्रेजी में ही बोलते हैं और सर्वथा उसे ही व्यवहार में लाते हैं, वैसे ही मैं आपसे प्रार्थना करता हूं कि आप हिन्दी को भारत की राष्ट्रभाषा बनाने का गौरव प्रदान करें। इसे राष्ट्रभाषा बनाकर हमें अपना कर्तव्य पालन करना चाहिए।’

 

 

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