उत्तराखंड की त्रासदी और सोशल मीडिया पर फर्जीवाड़ा

0
1576

blog-01 (1) मनोज खाण्डेकर की कलम से

  •         मनोज खाण्डेकर की कलम से सौजन्य से: http://manojkhandekar.wordpress.com/

दरअसल, यह तस्वीर उत्तराखंड त्रासदी के काफी पहले की है। यह तस्वीर 10 मई की है जब बांग्लादेश में आठ मंजिला इमारत ध्वस्त हुई थी। बांग्लादेश के इस सबसे बड़े औद्योगिक हादसे में करीब 900 लोगों की मौत हो गई थी। इसी हादसे का यह फोटो

बांग्लादेश के फोटोग्राफर तस्लीमा अख्तर ने खींचा है। इस फोटो में युगल अपनी जिंदगी के आखिरी क्षणों में एक दूसरे से आखिरी बार आलिंगनबद्ध हुए। दोनों का आधा शरीर मलबे में धंसा हुआ है। यह फोटो टाइम्स मैगजीन के लाइट बॉक्स में छपा है इस पर डेविड वॉन ड्रेहले का का आर्टिकल भी है जिसमें उन्होंने लिखा है कि यह तस्वीर मन को अशांत तो कर देती है पर उतनी ही खूबसूरत भी है।अब इस बांग्लादेशी जोड़े को भारतीय और चारधाम की यात्रा के दौरान हादसे का शिकार बताया जा रहा है

अब इस बांग्लादेशी जोड़े को भारतीय और चारधाम की यात्रा के दौरान हादसे का शिकार बताया जा रहा है। मसला केवल इस जोड़े का नहीं है, सेना के जवानों का एक फोटो भी धडल्ले से शेयर किया जा रहा है। इस फोटो में सैनिकों को तेज बहाव में बहती एक नदी पर रस्सी के पुल पर खुद को लेटकर मानवीय पुल बनाते हुए एक महिला और बच्चे को बाढ़ से बचाने का दृश्य है। दरअसल, यह तस्वीर भारतीय सेना की नहीं है। यह तस्वीर जापानी आर्मी की है और यदि फोटो को गौर से देखा जाए तो आसानी से पता चल जाएगा कि यह जापानी सेना है। सोशल अशिक्षा केवल हमारे यहां नहीं है बल्कि दुनिया के सबसे बड़े इंटरनेट यूजर वाले चीन में भी इस तस्वीर को पिछले काफी समय से अपने सैनिकों का फोटो बताकर शेयर किया जा रहा है। चौंकाने वाली बात यह है कि नरेन्द्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में देखने वाले ग्रुप में इस फोटो को भारतीय सेना का बताकर यूपीए सरकार को जी भर कर कोसा जा रहा है।

उत्तराखंड त्रासदी पर सोशल मीडिया पर तीसरी त्रासदी के रूप में एक वीडियो है। यह वीडियो भूस्खलन के दौरान एक बस के गहरी खाई में समाने का है। इस वीडियो को उत्तराखंड का बताया जा रहा है जबकि यह वीडियो साल 2011 का है जब बोलेविया में पहाड़ी रास्ते को पार करते वक्त बस इस तरह गहरी खाई में समा गई थी। सोशल नेटवर्क के भेड़चाल में शामिल लोगों ने इस बात पर भी ध्यान नहीं दिया कि उत्तराखंड में स्लीपर कोच नहीं के बराबर चलते है। यह वीडियो सोशल नेटवर्क पर वायरल है।

लोकल इंदौर का एप गूगल से डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें... 👇 Get it on Google Play

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here