छोटे परदे पर  अंधविश्वास का उजास क्यों?  रील रिपोर्ट में एकता शर्मा

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  टेलीविजन के सीरियल सिर्फ घरेलू मनोरंजन ही नहीं होते! ये दर्शकों के जीवन पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है। दर्शक यदि धार्मिक सीरियल देखकर धर्म के प्रति आस्थावान होते हैं, तो भूत-प्रेत के सीरियलों से भी तो उनके दिमाग पर असर विपरीत असर होता होगा! 80 और 90 के दशक में जब रामानंद सागर और बीआर चोपड़ा ने ‘रामायण’ और ‘महाभारत’ जैसे सीरियल बनाए थे, तब धर्म के प्रति दर्शकों में उत्साह और श्रद्धा जागी थी! इसके बाद भी कई धार्मिक सीरियल बने, पर आस्था का वो ज्वार सामने नहीं आया! यही तथ्य बताता है कि टीवी पर दिखाए जाने वाले सीरियलों का दर्शकों के जीवन पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। उस दशक में दर्शकों ने इन सीरियलों से धर्म के बारे में बहुत कुछ सीखा था। इसके अलावा इस दौर में नीम का पेड़, बुनियाद, हम लोग, मालगुड़ी डेज, अलिफ़ लैला, स्वाभिमान, देख़ भाई देख़, तू-तू मैं-मैं जैसे कई सीरियल आए।
  सूचना की क्रांति और नई टेक्नालॉजी कारण आज लोगों के हाथ में पूरी दुनिया है। इसके बाद भी टीवी के छोटे परदे पर भूत-प्रेत, जादू-टोने, नाग-नागिन और सुपरनेचुरल कहानियों की संख्या बढ़ती जा रही है। आश्चर्य की बात है कि ऐसे सीरियल को दर्शक पसंद भी कर रहे हैं। लगभग हर चैनल पर मनगढंत भुतहा कहानियां दिखाई जा रही है। एक वक़्त था जब छोटे पर्दे पर सीरियल के किरदारों की प्लास्टिक सर्जरी दिखाकर उनका चेहरा बदल दिया जाता था। जबकि, अब ट्रेंड है भूत-प्रेत और अंधविश्वास का, जो किसी न किसी रूप में हर सीरियल में दिखाई देने लगा है। इसमें नाग-नागिन से जुड़े सीरियल का चलन सबसे अधिक बढ़ा है। ‘नागिन’ जैसे सीरियल को लोगों ने काफी पसंद किया। इसका सीक्वल भी आ गया और अब तीसरा भाग आने की तैयारी है।
   भूत-प्रेत, चुड़ैल, जादू-टोने और सुपरनेचुरल ताकतों से जुड़े सीरियलों की भी भरमार है। जबरन दर्शकों को ऐसे सीरियल परोसे जा रहे हैं, जिनका सच्चाई से कोई वास्ता नहीं होता। ऐसे सीरियल निश्चित रूप से लोगों ने मन में एक भ्रम और डर पैदा करने का काम कर रहे हैं। यदि इनको गंभीरता से लेकर समाधान नहीं निकाला गया, तो भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित होगा।
  कुछ चैनल तो भूत-प्रेत और अंधविश्वास की हदें पार कर चुके है। यहाँ तक कि ‘भाभीजी घर पर हैं’ जैसा कॉमेडी सीरियल भी ‘चुड़ैल’ के ट्रेंड को भुनाने में पीछे नहीं रहा और दो एपिसोड चुड़ैल की कहानी के लिए झोंक दिए। सीरियल के अंत में बकायदा ‘चुड़ैल’ को सर्वमान्य ग्लैमरस खलनायिका स्थापित किया गया। एक सीरियल ‘ससुराल सिमर का’ में तो इतनी ‘डायनों’ की एंट्री हुई है कि दर्शक गिनती भी भूल गए।
  क्या इस तरह के सीरियल बनाने वाले इससे बेखबर हैं कि भूत-प्रेत की कहानियों और नाग-नागिन की दुश्मनी से जुड़े किसी भी शो का असर सामाजिक यथास्थिति और जड़ता को कायम रखना है? रोज सुबह जब टीवी पर कोई ज्योतिषी दर्शकों का भविष्य बांचता दिखाई देता है! राशि के हिसाब से काल्पनिक लाभ-हानि परोसता है, तो ये सिर्फ टीवी शो या मनोरंजन ही नहीं होता। ये लाखों लोगों की आस्था का शोषण करके अंधविश्वासों के अंधकार में बनाए रखने की एक करतूत है।
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मोबाइल : 9993979949 
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(लेखिका फिल्म समीक्षक है और फिल्मों के शोध से सम्बद्ध रही हैं) 

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