ज्योतिरादित्य सिंधिया की कुंडली:अनुकूल समय का दो साल इंतजार करना होगा! …ज्योतिष अजय शर्मा

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  भारतीय राजनीति में ज्योतिरादित्य सिंधिया ऐसा नाम है, जो अपनी पहचान का मोहताज नहीं! उन्होंने पिता की राजनीति विरासत को सहेजे रखा है और उसे आगे भी बढ़ाया है। 2001 में पिता माधवराव सिंधिया की मौत के बाद ग्वालियर राजघराने की जिम्मेदारी के साथ राजनीतिक जिम्मेदारी भी संभाली। 15वीं लोकसभा के मंत्रिमंडल में वे वाणिज्य एंव उदयोग मंत्री रहे! लेकिन, राजनीतिक रूप सक्षम और योग्य होने के बाद भी वे मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री बनने से वंचित रह गए!
ज्योतिरादित्य सिंधिया का आगे का भविष्य कैसा होगा, जानते हैं ज्योतिष की नजर से : 
   ज्योतिरादित्य सिधिंया का जन्म 1 जनवरी 1971 को मुंबई में हुआ था। मकर लग्न में जन्मे ज्योतिरादित्य की जन्मकुंडली में कुछ विषिष्ठ योग होने से उन्होंने काफी कम उम्र में लोकप्रियता पाई। 12वें भाव में सूर्य बुध की उपस्थिति और बुधादित्य योग के कारण वे अपनी ओजस्वी वाणी से जनसामान्य को प्रभावित करते हैं। चौथे भाव मे सूर्य की उच्च राशि मेष में शनि नीच राशि का होने से नीचभंग राजयोग का निर्माण हो रहा है। जो राजनीतिक सफलता का प्रतीक है। इस योग के कारण ही अमिताभ बच्चन सदी के महानायक बने।
 क्या कहती है नितिन गडकरी की कुंडली
गुरू के कारण गडकरी की पद प्रतिष्ठा बढ़ेगी! ..पंडित अजय शर्मा  https://localindore.com/?p=54632
दसवें भाव में तुला राशि का मंगल होने से कुल दीपक योग का निर्माण हुआ। एकादश भाव अर्थात आय भाव में देव गुरू और दैत्य शुक्र की युति बहुत शुभ होने से वे भाग्यवान और बेशुमार और स्थिर लक्ष्मी के मालिक हैं। ऐसा व्यक्ति ख्याति प्राप्त करता है और महिलाओं में ज्यादा लोकप्रिय होता है। साथ में मंगल रूचक योग भी बन रहा है। चौथे भाव में मेष राशि में स्थित शनि अपनी पूर्ण दृष्टि से दशम भाव में स्थित तुला राशि के मंगल को देख रहा है! इस स्थिति से अमात्य योग का निर्माण हो रहा है, जिस कारण सिंधिया ने जनता में लोकप्रिय होने के साथ ही सम्मान भी प्राप्त किया।
  सिंधिया की जन्म पत्रिका में दूसरे भाव में चन्द्र के साथ राहु की उपस्थिति ग्रहण योग बना रही है, जो पूर्ण सफलता को प्रभावित करता है। 2005 से शुरू हुई नीच राशि के शनि की महादशा में वे सत्ता से दूर रहे किंतु शनि की महादशा में शुक्र की अंतर्दशा के दौरान 2012 से 2014 तक केंद्रीय मंत्री रहे।सिंतबर 2018 से चल रही शनि की महादशा में राहू की अंतर्दशा के कारण प्रदेश में कांग्रेस के सबसे ज्यादा लोकप्रिय नेता होने के बाद भी वे मुख्यमंत्री पद प्राप्त नहीं कर सके। वर्तमान में उक्त महादशा के कारण उनके स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है! लेकिन, इस दौरान ज्योतिरादित्य सिंधिया को व्यर्थ की बहस से बचना होगा। वे यदि ऐसी किसी बहस ने उलझते हैं, तो प्रतिष्ठा पर प्रभाव पड़ सकता है। इससे वर्तमान दशा में भी कार्य बाधा उत्पन्न होती और अपने लोगों से परेशानी आती है। लेकिन, कुंडली में मौजूद विभिन्न शुभयोग होने के कारण चुनाव में विजयी होने में कोई व्यवधान नहीं होगा! परंतु, इसके बाद भी अभी उन्हें वो मुकाम हांसिल नहीं होगा, जिसके वे हकदार है। 2019 से 2021 तक का समय सिंधिया के लिए अनुकूल नहीं है। इस अवधि में उन्हें शासन व अपने गुप्त शत्रुओं से परेशानी आ सकती है। लेकिन, उनकी ख्याति और प्रभाव में कमी नहीं आएगी!
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– पंडित अजय शर्मा 
  ज्योतिष / एडवोकेट
  संपर्क :  9893066604
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