तो क्या खत्म हो जाएगी नूरजहॉ !

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           रविवारीय विशेष 

इंदौर 15 अप्रैल।अपने वजन और आकार के लिए मशहूर आम की प्रजाति नूरजहॉ का अस्तित्व बदलते मौसम और ग्लोबल वांर्मिग की भेंट चढने का खतरा बन आया है। ऐसा ही चलता रहा तो आमों की यह मलिका नजरों से औझल हो जाएगी और किताबो और चित्रों में ही इसके दीदार हो पाएगें।

ढाई किलों से पांच किलों का वजनी एक आम वह भी अपने बहतरीन स्वाद के साथ बहुत से आम प्रेमी शायद इस आम से अभी तक दूर हो लेकिन हो सकता है कि अब वे कभी इस का लुफ्त  नहीं उठा पाए। मध्यप्रदेश के आदिवासी बहुल रविवारीय विशेष अलीराजपुर जिले के कट्ठीवाड़ा क्षेत्र में पाई जाने वाली नूरजहॉ के विलुप्त होने का खतरा मंडरा रहा है।

दशकभर पहले तक इसके फल का वजन पांच से सात किलोग्राम तक होता था।लेकिन अब जलवायु परिवर्तन और दूसरे मौसमी कारणों के चलते इसका वजन घटकर आधा रह गया है।इसी तरह चलता रहा तो हो सकता है कि इसका वजन एक बादामी आम के बराबर ही रह जाए या इसकी  पैदावार ही खत्म हो जाए।

नूरजहॉ वही आम है जिसे देखकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी आश्चर्य चकित रह गए थें उन्होनें खुद कट्ठीवाड़ा जाकर इसके पेड देखने कर इच्छा व्यक्त की थी।  साथ  ही  उद्वानकी विभाग को इसकी प्रजाती को सहेजने के निर्देश दिए थें। लेकिन सरकारी विभाग ने अपने मुखिया के आदेश को हवा में उडा दिया और नूरजहॉ के अस्तित्व पर ही बन आई।

जानकारों के मुताबिक भारत में केवल यही पाई जाने वाली नूरजहां मौसम की मार से आधी रह गई है और आखिरी सांसें गिन रही है। नूरजहां आम की प्रजाति अफगानिस्तान से भारत लाया गया था लेकिन यहा भी इसके अब कुछ ही पेड बचे है। सालो से नूरजहा बेच रहे एक विक्रेता ने बताया कि नूरजहां के पेड़ों पर जब आम आने शुरू होते हैं तो पेड़ फलों के वजन से झुकने लगते हैं। आखिर में स्थिति यह हो जाती है कि उन्हें नीचें से सहारा देना पड़ता है। नूरजहां की बाजार में मांग इतनी ज्यादा होती है कि पेड़ पर आमों के पककर बिक्री के लिए तैयार होने से पहले ही  फल का सौदा हो जाता है।

उसने बताया कि कुछ  किलों  नूरजहॉ को बेच की ही जो सकुन मिलता था वो सैकेडों किलो दूसरे प्रजाती के आम बेच कर भी नही मिलता है पर अफसोस के कुछ साल बाद ये सुकुन भी नहीं  रहेगा।

 

 

 

 

 

 

 

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