देश में पहली बार शास्त्रौक्त गणपति इंदौर में,आन लाइन हाजिर

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 लोकल इंदौर  27अगस्त  ।( विकास यादव ) इस बार आप चाहे तो सिर्फ इको फ्रेंडली नहीं बल्कि शास्त्रौक्त सामग्री और विधि से मंत्रौच्चार के बीच बने माटी के  गणेश से  गणेशोत्सव मना सकते है। देश में पहली बार इंदौर के दो युवाओं ने एक अनूठी पहल की है। माटी गणेश के नाम से  बनाये इको फ्रेंडली और शास्त्रौक्त गणपति  आन लाइन पर भी खरीदे जा सकते है .

इंदौर के रौनक और रचित खंडेलवाल बताते है कि माटी ग़णेश प्रतिमाएं बनाने के पहले हमने  वेद, पुराण और शास्त्रों के ज्ञाताओ के मार्गदर्शन में मिट्टी  में गाय का गोबर, पांच पवित्र नदियों का जल,  सात तीर्थों की मिट्टी, पंच गव्य, पंचामृत, दूर्वा सहित कुल 56 औषधियों के अर्क को मंत्रों से अभिप्राणित कर मिलाया गया.  मूर्ति बनाने के स्थान पर 24 घंटे गण्पति के बीज मंत्र का आडियो चलता रहा ताकि मंत्र के पाजीटिव वाइब्रेशन मूर्ति में समा सके. केमिकल का उपयोग ना करने की शर्त के कारण ही इन पर कोई  रंग नही किया गया है ये मिट्टी के प्राकृतिक रंग में उपलब्ध कराई कराई जाएंगी.  वैसे भी शास्त्रों में भी गणपति पर रग करने का कोई विधान नहीं है. रौनक के मुताबिक़ मिट्टी की बनी ये मूर्तियां वजन में बहुत भारी है लेकिन चूंकि ये १०० फीसदी इको फ्रेंडली है इसलिए इनका विसर्जन बहुत आसान भी होगा और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की जगह पर्यावरण को पोषित करने वाला होगा। माटी गणेश प्रतिमा को  एक बाल्टी पानी में डालने पर  पूरी प्रतिमा लगभग डेढ़ से दो घंटे में पानी में घुल जाएगी। वे कहते है कि हमने  लोगों से ये कहा है कि वे इस पानी को बहाने की जगह इसे घर के किसी पौधे में डाल दे मूर्ति में मिली औषधियों और मन्त्रों के कारण इस पानी से पौधा बहुत तेज विकास करेगा.इस विचार को लोगों तक पहुंचाने के लिए ये दोनों युवा सोशल मीडिया और इंटरनेट का उपयोग करने की योजना बना रहे है.

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