भाजपा से जुड़ा घोटालेबाज कांग्रेस संगठन में शरीक …मालवा मंत्रा में हेमन्त पाल

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प्रदेश कांग्रेस में इन दिनों जो कुछ चल रहा है, वो पार्टी के टालमटोल करने या हल्के अंदाज में लेने वाली बात नहीं है! कमलनाथ प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद से ही संगठन में एक अजीब तरह की उठापटक का माहौल है। तीन-चार महीने से संगठन में नियुक्तियाँ करने और फिर उन्हें हटाने का माहौल ही ज्यादा दिखाई दे रहा है! ऐसे में लग ही नहीं रहा कि प्रदेश कांग्रेस विधानसभा चुनाव के लिए अपनी जुझारू टीम खड़ी कर रही है। ताजा मामला आईटी सेल के प्रभारी धर्मेंद्र बाजपेई को हटाकर अभय तिवारी को बैठाने का है। जबकि, अभय तिवारी का नाम भाजपा नेताओं के साथ लम्बे समय से बड़े-बड़े गोलमाल से जुड़ा है। भिंड के पूर्व भाजपा सांसद रामलखन सिंह के साथ तो अभय तिवारी कस 1 करोड़ 29 लाख का कंप्यूटर घोटाला जगजाहिर है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ में 7 साल तक चली जांच के बाद ये मामला भी दर्ज भी किया गया। ये मामला मेसर्स कंप्यूटर स्टडीज एंड सर्विसेज रीवा के मैनेजिंग डायरेक्टर अभय तिवारी, पूर्व सांसद रामलखन सिंह, तत्कालीन भिंड कलेक्टर मुकेश वार्ष्णेय सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। कांग्रेस ने ही विधानसभा में ये मामला उठाया था! ऐसी गड़बड़ियों के अभी और भी पत्ते खुलना बाकी है। आश्चर्य तो इस बात का है कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के जिस मुद्दे को लेकर भाजपा सरकार के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने का दम भर रही है, उसने ही भ्रष्टाचार के एक आरोपी अभय तिवारी को बिना जांचे-परखे आईटी सेल का अध्यक्ष बना दिया! कहने वाले तो इस बात का भी दावा कर रहे हैं कि अभय तिवारी को भाजपा ने ही कांग्रेस संगठन में प्लांट किया है! सच्चाई जो भी हो, पर संदेह की सुई तो इस आशंका की तरफ झुकी ही दिखाई दे रही है।
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सोशल मीडिया के नाम पर बड़ा खेल!
  कांग्रेस में सिर्फ नियुक्तियाँ होने और उन्हें हटाने का काम ही नहीं हो रहा, आदेश भी निकलने के बाद उन्हें पलटना भी उसी गति से चल रहा है! हाल ही में प्रदेश कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव के टिकट दावेदारों के बारे में सोशल मीडिया से जुड़ा एक आदेश निकाला था! इस आदेश में फेसबुक पर 15 हजार लाइक और ट्विटर पर 5 हजार फॉलोवर होना अनिवार्य किया गया था! निकलते ही इस आदेश की जबरदस्त प्रतिक्रिया हुई और अंततः उसे वापस ले लिया गया! अंदर की ख़बरें बताती हैं कि यह आदेश पार्टी के लिए सोशल मीडिया पर एक्टिव सक्षम उम्मीदवारों की खोज का प्रयास नहीं, बल्कि एक बड़ा खेल था! क्योंकि, जैसे ही आदेश बाहर आया, कुछ आईटी कंपनियों ने टिकट के दावेदारों से फेसबुक और ट्विटर पर लाइक्स और फॉलोवर बढ़वाने के लिए संपर्क करना शुरू कर दिया था! बकायदा रेट लिस्ट भी सामने आई, कि किस सोशल मीडिया पर फर्जी लाइक्स और फॉलोअर बढ़ाने के लिए कितनी राशि लगेगी! लेकिन, हेराफेरी और बंदरबांट का ये बड़ा खेल जल्दी ही उजागर हो गया! कहीं, ऐसा तो नहीं कि ये आदेश किसी आईटी कंपनी ने ही अपने फायदे के लिए निकलवाया हो?
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देपालपुर से इस बार कांग्रेस का नया ‘पटेल’
  इंदौर जिले की देपालपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस की उम्मीदवारी को लेकर एक ही परिवार में फिर तनातनी होना तय है। इस सीट पर कलौता समाज का दबदबा है। यहाँ से पहले रामेश्वर पटेल और उनके बेटे सत्यनारायण पटेल चुनाव जीत चुके हैं! लेकिन, बाद में सत्यनारायण पटेल के नाम हार का रिकॉर्ड बन गया! वे देपालपुर के अलावा इंदौर के क्षेत्र क्रमांक-5 और लोकसभा का चुनाव भी हारे हैं। कांग्रेस ने इस चुनाव में लगातार हारने वाले को उम्मीदवार न बनाने का एलान किया है। यही कारण है कि अबकी बार रामेश्वर पटेल टिकट की उम्मीदवारी में हैं। उनकी सक्रियता देखकर इस बात की पुष्टि भी हो रही है। उनका भव्य जन्मदिन भी इसी मकसद से मना था! लेकिन, इसी परिवार से जुड़े दावेदार विशाल पटेल का पलड़ा इस बार कुछ वजनदार लग रहा है। बताते हैं कि संभावना को देखते हुए, विशाल पटेल ने मैदान भी संभाल लिया है।
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बोलने से बचते रहे भाजपा प्रवक्ता!
    भाजपा प्रवक्ताओं की वाचालता का कोई जवाब नहीं! दिल्ली से लगाकर भोपाल तक और यहाँ तक कि इंदौर तक किसी भी मामले में तर्क और उससे ज्यादा कुतर्क करने का वे कोई मौका नहीं छोड़ते! लेकिन, पैट्रोल, डीजल महंगा होने के मुद्दे पर 10 सितम्बर को हुए ‘भारत बंद’ पर भाजपा के ज्यादातर प्रवक्ता बोलने से बचते रहे! कई चैनलों पर रोजाना बहस करने वाले भी इस मुद्दे पर मुँह छुपाते दिखे! जब इन्हें चैनलों पर उस दिन राजनीतिक शास्त्रार्थ के लिए बुलाया गया तो कई प्रवक्ता बहाना करके बच निकले! किसी ने कहा कि मैं मुख्यमंत्री की जनआशीर्वाद यात्रा में हूँ, तो किसी ने शहर से बाहर होने का बहाना किया! क्योंकि, आज भाजपा के पास पैट्रोल और डीजल की बेतहाशा मूल्यवृद्धि के पक्ष में कोई तर्क नहीं है!
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पेटलावद में निर्मला पर भारी डामोर! 
   झाबुआ जिले में इस बार विधानसभा चुनाव के टिकट के लिए भाजपा में जमकर जोर-आजमाइश चल रही है। लेकिन, हाल ही में पेटलावद आए मुख्यमंत्री के साथ मंच पर पीएचई के रिटायर्ड ईएनसी जीएस डामोर की मौजूदगी ने नया संकेत दिया! ख़बरें बताती है कि भाजपा ने डामोर को पेटलावद से चुनाव लड़ाने का मूड बनाया है। अभी यहाँ से निर्मला भूरिया विधायक है, उन्हें घर भेजा जा सकता है या झाबुआ से मैदान में उतारा जा सकता है! क्योंकि, वे लोकसभा का उपचुनाव हारी थी और क्षेत्र में भी उनका विरोध भी कुछ ज्यादा है। डामोर का नाम झाबुआ-रतलाम के लोकसभा उप-चुनाव के समय भी उम्मीदवारी के लिए सामने आया था, पर तब बात नहीं बनी! जीएस डामोर को राजनीतिकों के संपर्क में रहने की आदत पुरानी है। कांग्रेस के शासनकाल में नौकरी में रहते हुए भी वे फायरब्रांड नेता जमुनादेवी के काफी नजदीक थे। लेकिन, भाजपा के सत्ता में आते ही उन्होंने अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता बदलने में देर नहीं की! अब वे भाजपा से चुनाव लड़ना चाहते हैं! लेकिन, ऐसे में कांग्रेसी उनकी पुरानी काली-पीली फाइलें खोलने लगे तो आश्चर्य नहीं!
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भय के कारण शाह की यात्रा टली 
  भाजपा ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की असलियत को तब शायद नहीं समझा था, जब उसने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ संविधान संशोधन का मन बनाया था। लेकिन, भाजपा नेताओं और मंत्रियों की जिस तरह विरोध हो रहा है और जगह-जगह घेराबंदी की जा रही है, पार्टी को अपनी गलती का अहसास तो हुआ होगा। लोगों के इसी विरोध को देखते हुए पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का उज्जैन और ग्वालियर दौरा टल गया! पार्टी को खबर मिल गई थी, कि सवर्ण वर्ग मंत्रियों और भाजपा नेताओं की तरह अमित शाह के सामने अपना आक्रामक विरोध प्रकट कर सकते हैं। इससे क़ानून-व्यवस्था बिगड़ने का भी अंदेशा था! यही कारण है कि फिलहाल ये यात्रा स्थगित कर दी गई!
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(लेखक ‘सुबह सवेरे’ इंदौर के स्थानीय संपादक हैं)

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