ममतासुर का संहारक हैश्री गणेश का विघ्नहर्ता अवतार

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भगवान श्री गणेश का विघ्नराज नामक अवतार विष्णु बह्म का वाचक है। वह शेष वाहन पर चलने वाले है और ममतासुर का संहारक है ।
एक बार की बात है।भगवती पार्वती अपनी सखियों के साथ बात करती हुई हॅंस पडी । उनकी हंसी से एक पुरूष कर जन्म हुआ । देखते ही देखते वह पर्वताकार हो गया । पार्वती जी ने उसका नाम ममतासुर रख दिया और भगवान श्री गणेश का षडक्षर…वक्रतुण्डाय हुम..मंत्र दे कर उनका स्मरण करने को कहा । वन में शम्बरासुर से मिलने पर उससे समस्त आसुरी विद्याएं सीख ली। श्रीगणेश ने उसकी आराधना से प्रसन्न हो उसे वरदान मांगने को कहा ।इस पर उसने कहा मुझे ब्रह्माण्ड का राज्य प्रदान करें। युद्ध में मेरे सम्मुख कभी कोई विध्न न हो । भगवान शिव से भी मैं अजेय रहूं।प्रभु ने उसे वरदान दे दिया ।
दैत्य गुरू शुक्रचार्य ने वरदान की बात सुन कर उसे असुरों का राजा बना दिया और शम्बर की पुत्री से ममतासुर का विवाह करा दिया । ममतासुर ने विश्वजिय की बात कही तो शुक्रचार्य ने कहा कि कभी भी विघ्नेश्वर का विरोध नही करना ।
इसके बाद ममता सुर ने तीनों ब्रह्माण्ड पर अपना वर्चस्व कायम कर देवताओं को कारागर में डाल दिया । देवताओं ने विघ्नहर्ता की पूजा की।बाद में भगवान प्रगट हुए और उन्होने ममतासुर से मुक्ति दिलाने की बात कही । भगवान ने नारद को ममतासुर के पास भेजा ओर देवताओं को छोडने और अत्याचार न करने की बात कही । गुरू शुक्रचार्य ने भी उसे समझाया। अन्त मे विघ्नराज ने अपना कमल उसकी सेना पर छोड दिया जिसकी खुश्बु से उसकी सेना मुर्छित हो गई और उसकी शक्ति भी जाती रही । बाद में वह प्रभु की शरण में आ गया । प्रभु ने उसे क्षमा कर पाताल लोक भेज दिया।

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