मुखबिरों की चांदी :25 गुना वृद्धि

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इंदौर२८अप्रैल । सरकारी कर्मचारियों की मुखबिरी करने वालों के लिए लोकायुक्त संगठन ने खजाना खोलने की तैयारी कर ली है। संगठन ने शासन से बजट में 25 गुना वृद्धि की मांग की है। फिलहाल संगठन को 75 हजार रु. सालाना मुखबिरी के लिए आवंटन हो रहा है। अब सरकार से इस काम के लिए 20 लाख रु. मांगे हैं।

पिछले दिनों लोकायुक्त संगठन को मिली सफलता के बाद संगठन ने खुद को चुस्त-दुरुस्त बनने की कवायदें शुरू कर दी है। इसी कड़ी में मुखबिरी के बजट में 25 गुना से अधिक वृद्धि करने का राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। संगठन सूत्रों के मुताबिक अभी तक संगठन मुखबिरों पर फिर 75 हजार रुपए ही खर्च कर सकता है। लोकायुक्त सूत्रों का मानना है कि मुखबिरी की राशि बढऩे से भ्रष्ट लोकसेवकों के खिलाफ और ज्यादा जानकारियां जुटाई जा सकेगी, साथ ही राशि के प्रलोभन में उसे मिलने वाली सूचनाओं में बढ़ोतरी होगी।

शिकायतों में खूब हुआ इजाफा

गौरतलब है कि हाल के दिनों में लोकायुक्त संगठन की सक्रियता में खासा इजाफा हुआ है। पिछले साल संगठन ने 145 प्रकरण दर्ज किए। इस साल के पहले चार महीनों में यह संख्या 100 के करीब हो गई है। संगठन के अधिकारियों के अनुसार शिकायतों की संख्या में ही खासा इजाफा हुआ है। करीब दस साल पहले लोकायुक्त संगठन का मुखबिरी का बजट करीब 76 हजार रुपए मंजूर हुआ है। तब से अब तक इसमें कोई इजाफा नहीं हुआ। खासतौर से रिश्वत लेते रंगे हाथों पकडऩे के लिए संगठन को अधिक राशि की जरूरत महसूस हो रही है। इसके अलावा बड़े अधिकारियों से संबंधित मामलों की जानकारी देने के लिए मुखबिरों पर अधिक राशि खर्च करना पड़ती है।

संसाधन बढ़ाने का प्रस्ताव

संगठन ने होशंगाबाद और शहडोल जैसे नए संगठनों के लिए पुलिस अधिकारी की प्रतिनियुक्ति पर देने का अनुरोध किया है। संगठन में हर संभाग में एसपी स्तर के अधिकारी नियुक्त होते हैं, लेकिन नए संभागों में यह कार्यालय नहीं खुल पा रहे हैं। मौजूदा कार्यालयों में पुलिस बल की कमी महसूस की जा रही है। लोकायुक्त संगठन की जरूरतें बढ़ी है। उस हिसाब से संसाधन बढ़ाने का प्रस्ताव शासन का है।

 

 

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