लेप्रोस्कोपी से किया जा सकता कैंसर का सफल ईलाज

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Dr Dilip Godeलोकल इंदौर 22अगस्त। इंदौर में आज से शुरू हुई8वीं इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस अमासिकॉन २०१३ में देश विदेश से आए 1500 से ज्यादा सर्जनों ने दूरबीन, गॉलब्लेडर, पेरियाटिक सर्जरी और बड़ी आंत की सर्जरी से जुड़ी नई तकनीक व समस्यओं आदि पर चर्चा की।डाक्टरों के अनुसार लेप्रोस्कोपी से कैंसर का सफल ईलाज किया जा सकता है।

एसोसिएशन ऑफ मिनिमल एक्सेस सर्जन ऑफ इंडिया के बैनर तले गुरूवार को सर्जरी में दूरबीन पद्धति (लेप्रोस्कोपी) करने वाले सर्जन्स के साथ ही एक्सपर्ट्स इस कान्फ्रेंस का हिस्सा बने। इसमें राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, मद्रास, उप्र, छत्तीसगढ और मध्यप्रदेश के अलावा अन्य देशों बेल्जियम, कनाडा, यूएसए, चाइना, जापान, कोरिया से भी सर्जन्स शामिल हुए हैं। 25 अगस्त तक विभिन्न सत्रों में आयोजित हो रही इस कॉन्फ्रेंस के पहले दिन थ्योरिटिकल बेस जानकारियों पर चर्चा की गई। कॉन्फ्रेंस के पहले दिन 1300 रजिस्टर्ड डेलीगेट्स के अलावा 200 स्पॉट रजिस्ट्रेशन भी हुए। बेल्जियम के गेस्ट्रोइंट्रोलोजिस्ट डॉ. जीबी केडियर इस कॉन्फ्रेंस का खास आकर्षण रहे।

पत्रकारों से चर्चा में उन्होंने बताया कि एडवांस टेक्नोलोजी ने लेप्रोस्कोपी को बहुत आसान बना दिया है। अब हमें माइक्रोस्कोप में घंटों तक आंख लगाकर सर्जरी नहीं करना पड़ती, बल्कि एक छोटे से कैमरे की मदद से स्क्रीन पर देखकर सर्जरी करना आसान हो गया है। मरीज के लिए भी यह सर्जरी फायदेमंद हैं, क्योंकि उसकी रिकवरी जल्दी होती है।

देश में लागू होगी अमासि गाइडलाईन
कॉग्रेस प्रेसिडेंट डॉ. दिलीप गोड़े (नागपुर) ने बताया कि इस कांग्रेस में पहली बार कुछ प्रयोग हमने किए हैं, मसलन अमासि गाइडलाइन्स तैयार करना, ओबेसिटी सर्जरी, जिसे आज के दौर में मेटाबोलिक सर्जरी भी कहा जाता है, इससे संबंधित जानकारी का विस्तार से आदान-प्रदान करना और सबसे खास लेप्रोस्कोपी से सफल कैंसर का ईलाज।

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