विशेष : एक एक सीट पर संघर्ष है मालवा निमाड में

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लोकल इंदौर 23 नवंबर । विशेष । प्रदेश के मालवा-निमाड अंचल में सबसे ज्यादा विधानसभा सीटें है. इसलिए इसे सत्ता का गलियार कहा जाता है. जब जब भी इस अंचल के मतदाताओं ने जिस भी पार्टी को अपना समर्थन दिया वह सत्ता में काबिज हुई.पिछले दो बार से भाजपा को इस अंचल से व्यापक जन समर्थन मिला है. लेकिन 2003 की तुलना में 2008 के चुनाव में इस क्षेत्र में सत्ताधारी दल भाजपा की स्थिति कमजोर हुई है. खास कर आदिवासी जिलों में जहाँ भाजपा के पास सिर्फ 10 सीटे ही है.
पग पग रोटी-डग डग नीर,मालवा भूमि अति गम्भीर कहे जाने वाले इस मालवा-निमाड अंचल के मतदाता भी इसी कहावत के अनुरुप है. 2008 के चुनाव के पहले इस अंचल में 59 विधानसभा सीटे थी जो परिसमन के बाद बढकर 66 हो गई. यदि 1990 से 2008 तक के हुए चुनाव को देखा जायें तो सत्ताधारी दल भाजपा को 1990 में 46 ,2003 में 48 और 2008 41 सीटे मिली. तो विपक्षी दल कांग्रेस को 1993 में 30, 98 में 42 सीटें. जब यहाँ के मतदाताओं नें 93 और 98 में कांग्रेस को अपना समर्थन दिया तो प्रदेश की सत्ता में वे आये और जब 1990,2003 वा 2008 में भाजपा का साथ दिया तो भाजपा ने शासन किया. लोकल इंदौर ने अपने वरीष्ठ साथी पत्रकार के माध्यम से क्षेत्र का दौरा कर पाया कि इस बार भी दोनों ही दलों के बीच इस अंचल की एक एक सीटों को लेकर घमासान मचा हुआ है. भाजपा के लिए चिंता का सबब धार- झाबुआ- रतलाम वा अलीराजपुर जिले की सीटे है. इन क्षेत्रों में 17 सीटे है. जिनमें भाजपा के पास सिर्फ 4 सीटें ही है. 2003 के चुनाव में जब पुरे प्रदेश में कांग्रेस विरोधी लहर थी तब इन्हीं आदिवासी सीटों में भाजपा का केसरिया झंडा फहरा था लेकि अठीक 2008 के चुनाव में भाजपा को समर्थन देने वाला आदिवासी अपने घर लौट गया. इस चुनाव में कांग्रेस ने अपनी अधिकाश सीटे वापस हासिल कर ली. 2013 के चुनाव में भी कांग्रेस को उम्मीद है कि इन सीटों पर उन्हें अदिवासी समर्थन देगा तो भाजपा फिर से अपना प्रभूत्व कायम करना चाहती है.वही कांग्रेस के लिए खंडवा-खरगौन-देवास-शाजापुर-इन्दौर-उज्जैन-मन्दसौर और नीमच जिले की 41 सीटे परेशानी का कारण है.जिनमें उसे जीत की तलाश है. यदि कांग्रेस ने भाजपा के इस गढ में 93 और 98 की तरह सेन्ध लगा लिया तो उसे सत्ता में आने से कोई नहीं रोक सकता. mm
66 सीटों में से सिर्फ धार शहर,मनावर,रतलाम शहर जोबट,थान्दला,हरसूद और झाबुआ को छोडकर.बाकि की सीटों में कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा संघर्ष है. झाबुआ से कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कांतिलाल भूरिया की भतीजी और जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती भूरिया निर्दलिय मैदान में खडी है.इसलिए यह कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो गई है. वही मनावर,रतलाम शहर,हरसूद,जोबट,थान्दला,और धार शहर की सीटों पर भाजपा के बागी समीकरण बिगड रहे है.

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