वे दीन ही रह गए तो कई दयाल हो गए….गुस्ताखी माफ़

0
210

अब बात निकल गई है तो दूर तलख जाएगी मामला ऐसा है कि दो दिन पूर्व पंडित दीनदयाल उपाध्याय और लक्ष्मणसिंह गौड़ दोनों की ही पुण्यतिथि एक ही दिन आ गई। सजावट करने वालों को पंडित दीनदयाल से तो कोई विशेष मामला नहीं दिखाई दे रहा था पर लक्ष्मण जी से उनका प्रतिदिन का मामला था। ऐसे में दीनदयाल जी के आसपास तो हालात सामान्य रहे और दो चार हार में ही उनकी पुण्यतिथि हो गई जबकि लक्ष्मणसिंह गौड़ के प्रतिमा स्थल पर चारो तरफ भव्य हार लगाकर पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया गया। यह शिकायत हमारी नहीं है यह करने वालों ने दिल्ली में जाकर की है कि जिनकी बदौलत भाजपा खड़ी है उन गरीब की क्या हालत है? भाजपा में इन दिनों कई दीनदयाल एक-दो हार पहनने के लिए ही तरस रहे है तो वहीं कई लोग दीन से दयाल हो गए है।                                                               ००
पिक्चर में यह क्लाईमेक्स तो सोचा ही नहीं था….
कभी कभी बिना सिर मुंडाए भी ओले गिर पड़ते हैं कुछ ऐसा मामला वृहन माहाराष्ट्र मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव के दौरान देखने को मिला। महाराष्ट्रीयन समाज के बड़े नेता के रूप में जाने जाने वाले शेखर किबे जो पूर्व पार्षद भी है ने इस पद पर स्थापित होने के लिए पूरे देश का दौरा कर लिया था। परंतु सारी मेहनत कुछ ही मिनिटों में पानी हो गई और देखते ही देखते नये स्टार के फिल्म में प्रवेश करने से पिक्चर का क्लाईमेक्स ही बदल गया और पिक्चर दंगल सेपद्मावति में बदल गई। पद भी नहीं मिला, पैसा भी गया और फजीहत अलग हो गई। इसको कहते है होनी को कौन टाल सकता है।००
२ के देव ३ में महादेव हो गए
क्षेत्र क्रमांक तीन और इंदौर की शान राजवाड़े पर दो दिन पूर्व हुए कार्यक्रम में कैलाश विजयवर्गीय के तमाम साथी और उनके परिवारजनों ने जिस प्रकार कार्यक्रम के लिए लोगों को जोड़ा उससे यह सिद्ध हो गया कि वे अपने क्षेत्र में अगर देव है तो दूसरे के क्षेत्र में महादेव है। आकाश विजयवर्गीय के फौजफाटे और लटके झटकों ने युवाओं की बड़ी टीम यहां पर खड़ी कर दी। अभी तक राजवाड़े के अंदर मुशायरा होता था पहली बार यहां पर महादेव पहुंचे। भारी भीड़ में तीन नंबर की विधायक दर्शन देने नहीं पहुंची पर तीन नंबर के कुछ पार्षद जरूर दर्शन करने पहुंच गए थे और उन्होंने अपने दर्शन दिए और साक्षात दर्शन किए। इस दौरान दो नंबर की भी रामायण मंडली के नर नाग, सूर, गंर्दव भी अपने साथियों के साथ यहां पहुंच गए थे। वैसे भी दादा के पहले भैया की मंडली में ही लंबे समय तक खंजरी बजाते रहे थे। अब सूत्रों का कहना है कि अगले कुछ समय में महादेव चार नंबर में भी पहुँच सकते हैं। इससे देवों को तकलीफ हो या न हो परंतु महादेव के आने की आहट में ही खलबली जरूर मच रही है। अब अगले विधानसभा चुनाव में हर विधानसभा क्षेत्र में लोग देवों की बजाए यह पुछेंगे की महादेव किधर है।

नवनीत शुक्ला 

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here