सरनेम है “अग्रवाल” और हैं अनुसूचित जाति के …..

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रनेम अर्थात् उपनाम के कई फण्डे चल रहे हैं इस पर भी शासन को गौर करने की जरुरत है।  चौंकाने वाले उपनामों में यह बात सामने आई है कि धोबी रजक समाज में सामान्य और अनुसूचित जाति के उपनाम भी पाए जाते हैं। धोबी रजक समाज को देश में कुछ राज्यों में ही अनुसूचित जाति का दर्जा मिला है जबकि कुछ राज्यों में यह पिछड़ी जाति में भी शामिल है।
पिछले सप्ताह अहमदाबाद दौरे में भरत अग्रवाल नामक शख्स से भेंट हुर्इं जो अहमदाबाद में ऑटो चलाते हैं। उनसे ये जानकर आश्चर्य हुआ वे धोबी रजक समाज के हैं और मूलत: दिल्ली के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि दिल्ली में भी धोबी रजक समाज के लगभग ७० घर अग्रवाल सरनेम से है। वे बताते हैं कि उत्तर प्रदेश में धोबी रजक समाज अनुसूचित जाति का दर्जा लिये हुए हैं, वहाँ भी अग्रवाल उपनाम के कई परिवार हैं जो धोबी रजक समाज में गिने जाते हैं। भरत अग्रवाल के अनुसार दिल्ली में अग्रवाल धोबी रजक समाज में अग्रवाल सरनेम तो पीढ़ी दर पीढ़ी चला आ रहा है।
इंदौर में रजक समाज के श्री ओ पी लश्करी से बात हुई जो कि अखिल भारतीय धोबी रजक समाज के पदाधिकारी भी हैं। श्री लश्करी बताते हैं कि धोबी समाज में उपनामों में पुरवैया, मालवीय, सोलंकी, बाथम, बुंदेला, लश्करी, परदेशी, भाटी, कनोजिया, वर्मा, चंदेल, ढालिया, चिलाटे, चौहान, वर्मा जैसे कई उपनाम शामिल हैं वहीं चौंकाने वाले सरनेम भी शामिल हैं जैसे अग्रवाल, भोसले, दिवाकर, भाटिया, निर्मलकर, माथुर, खत्री, प्रसाद, तँवर, चौरसिया, परमार, कदम, राउत, सिसोदिया आदि। धोबी रजक समाज में मुस्लिम वर्ग के भी कुछ परिवार शामिल हैं।
सिर्फ धोबी रजक समाज ही नहीं आजकल कई जातियों में ऐसे उपनाम मिल जाएंगे जो दूसरे राज्यों में दूसरी जातियों में भी पाए जाते हैं। खासकर ऐसे उपनाम पिछड़ी और अनुसूचित जातियों में ज्यादा पाए जा रहे हैं .(दिनेश सोलंकी)
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