सूर्य, चन्द्रमा, आकाश कोई भी नहीं बना सका

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लोकल इन्दौर 4 मई। प्रत्येक जीव सुख और मृत्यु के बाद मोक्ष चाहता हैं। भगवान ने मनुष्य, प्रकृति और सृष्टि की रचना इतने अदभुत ढंग से की हैं कि विज्ञान चाहे जितना आगे बढ गया हो, आज तक कोई भी सूर्य, चन्द्रमा, आकाश और रक्त की एक बूंद भी नहीं बना सका हैं। जीवन में हम स्वयं को अपने शरीर और करोडो की सम्पत्ति का मालिक मानते हैं लेकिन आज तक कोई भी व्यक्ति अपनी कोई सम्पत्ति साथ लेकर नहीं गया। शरीर भी यहीं जलकर दो मुटठी राख में बदल जाता हैं। यह राख भी किसी काम नहीं आती। मनुष्य जीवन परमात्मा का सबसे बडा उपहार है, लेकिन हम माया और अहंकार के पर्दे के कारण परमात्मा को भी भुला बैठे हैं। भक्ति के मार्ग में चलना है तो अहंकार को तत्काल बाहर खदेडना पडेगा।

श्री नारायण भक्ति पंथ के संत श्री लोकेशानंद महाराज ने आज स्मृति नगर-छोटा बांगडदा स्थित शिवशक्ति धाम पर चल रहे भागवत ज्ञान यज्ञ एवं भक्ति सत्संग के दिव्य अनुष्ठान मे उक्त प्रेरक विचार व्यक्त किये।

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