300 करोड़ वाले नहीं सुधार पाए… गुस्ताखी माफ में नवनीत शुक्ला

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बल्लेबाज विधायक ने एक बार फिर शहर को समझाने के लिए तीन लाख रुपए खर्च कर विज्ञापन का प्रकाशन करवा दिया कि मास्क जरूर लगाएं। उन्होंने आपसे मास्क के लिए आग्रह करते हुए मेरा मास्क-मेरी सुरक्षा का आह्वान किया। विज्ञापन में चार क्षेत्रों के विधायक नदारद रहे तो वहीं नगर अध्यक्ष भी कोने-कचारे में नहीं दिखे। सवाल उठ रहा है कि तीन लाख के विज्ञापन से ही शहर के लोग सुधर सकते तो सरकार के विज्ञापनों पर तीन सौ करोड़ रुपए खर्च हो गए हैं। उसके बाद भी बीमारी और शहर वहीं खड़ा है, जहां पिछली बार खड़ा था। शहर को ठीक करने के लिए मनीषसिंह का लट्ठ ही ठीक है। जब तक लट्ठ है, तब तक मास्क है। धड़ाधड़ बन रहे चालानों और संस्थानों के सील होने के बाद दो दिन में अस्सी प्रतिशत शहर मास्क के झंडे तले आ गया। हालांकि हम तो चाहेंगे कि उनका यह अभियान क्रमवार चलता रहे, भले ही तीन लाख की जगह पांच लाख लग जाएं। अखबारों के लिए भी यह दो बूंद जिंदगी की तरह होगा।
बैठे बिठाए पड़वा कौन मनाएं…
इन दिनों महू में धोक पड़वा को लेकर एक नई चर्चा शुरू हो गई है। इस बार किसके आगे मनेगी धोक पड़वा। महू में इस कार्यक्रम के दौरान सबसे पहले इंदौर की सांसद और लोकसभा अध्यक्ष रही ताई ने यहां जाकर इस परंपरा में अपने प्रति विश्वास को भी जगाया था। आम लोगों के बीच महोत्सव के रूप में इस कार्यक्रम में उन्होंने अपनी राजनीतिक जड़ें भी मजबूत की थीं। इसी परंपरा को बाद में कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपने परंपरागत स्वभाव के अनुसार निभाया। इस दौरान उन्होंने भी यहां पर अपनी जड़ें भरपूर मजबूत कीं। ताई की सौम्यता के बाद भाई की योग्यता के बाद इस बार यहां दीदी की दबंगता से अब भाजपा के पुराने चेहरों का पाला पड़ रहा है। दीदी ने चुन-चुनकर कई दिग्गजों को उनकी फौज के साथ ही दरकिनार कर दिया है। ऐसे में उनके स्वभाव को लेकर भी यहां इस समारोह में उन्होंने कितना सम्मान मिलेगा, यह सवाल उठ रहा है। कुल मिलाकर धोक पड़वा वैसे भी इस बार महू में कोरोना की भेंट चढ़ सकती है और नहीं चढ़ी तो राजनीति की भेंट जरूर चढ़ जाएगी।
कार्यालयीन मंत्री एक ईमानदार व्यक्तित्व…
भोपाल भाजपा कार्यालय में सौ करोड़ के घोटाले में भाजपा के कई दिग्गजों की सांसें रुकी हुई हैं। यहां पर सारा कामकाज कार्यालयीन मंत्री राजेंद्रसिंह पिछले कई बरसों से देख रहे हैं। राजेंद्रसिंह, कुशाभाऊ ठाकरे की पसंद रहे और उन्होंने ही अपने कार्यकाल में कई स्थानों पर उपयोग के बाद उन्हें कार्यालयीन मंत्री के रूप में यहां पर रखा था। कुशाभाऊ ठाकरे की राजनीति तो भाजपा में अब बची नहीं है, परंतु उनके द्वारा जिन्हें प्रशिक्षित किया गया, उनके बारे में शहर के पुराने बड़े भाजपा नेता मानते हैं कि उनके कपड़ों पर कोई दाग नहीं हो सकता। ठाकरेजी, कार्यकर्ताओं के चयन में संस्कार को सबसे पहले आंकते थे। उल्लेखनीय है कि सौ करोड़ के फंड घोटाले में पिछले दिनों राजेंद्रसिंह को ही दिल्ली तलब किया गया था।
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