ज्योतिष की नजर में उपचुनाव के नतीजे: शिवराज, सिंधिया के लिए समय अनुकूल  नहीं, पर भाजपा सत्ता में बनी रहेगी! 

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लोकल इंदौर 1 नवंबर ।  कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया का मध्यप्रदेश में सरकार बनने के बाद भी पार्टी में कोई ऐसा मुकाम हांसिल नहीं कर सके, जिसकी उन्होंने कल्पना की थी। अब वे अपनी फ़ौज समेत भाजपा में हैं और अपने फैसले पर मतदाताओं की मुहर लगाना चाहते हैं। लेकिन, सितारे सिंधिया के पक्ष में नहीं हैं! उधर, मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के ग्रहयोग भी सही दिशा में दिखाई नहीं दे रहे! लेकिन, मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनी रहेगी, उसमें कोई अड़चन नहीं! ये स्थितियां प्रदेश में बड़े उथल-पुथल की और संकेत दे रहे हैं।
ये उपचुनाव ज्योतिरादित्य सिंधिया, शिवराजसिंह चौहान और भाजपा के भविष्य पर कैसा डालेगें, इस पर एक नजर :
सिधिंया समर्थकों का भविष्य
    ज्योतिरादित्य सिंधिया की पत्रिका में मकर लग्न है, जिसका स्वामी शनि है। वर्तमान में शनि की महादशा में राहु अंतरदशा 6 फ़रवरी 2019 से चल रही है, जो 8 जुलाई 2021 तक चलेगी और तब तक इसका अशुभ प्रभाव भी राशि पर बना रहेगा। इस महादशा में स्वास्थ्य समस्या लगातार बनी रहने की आशंका है। राजपक्ष से भी हानि हो सकती है। कोई ऐसा कार्य जिससे लाभ की उम्मीद हो, वो हानि में परिवर्तित हो सकता है। ग्रहयोग की ऐसी स्थिति में प्रत्येक कार्य में बाधा आती है। मन की व्यथा के कारण इधर-उधर भटकता बना रहता है। इस दशा में एक समस्या से छुटकारा नहीं मिलता कि दूसरी समस्या आरंभ हो जाती है। साथ ही चौथे भाव में मेष राशि का शनि पूर्ण दृष्टि से तुला राशि के मंगल की तरफ देख रहा है। ये स्थिरी एक विस्फोटक योग का निर्माण करती है। इस दृष्टि के कारण वे 15 साल बाद सत्ता में आई कांग्रेस सरकार के पतन का कारण बने। कुडंली में उपस्थित चन्द्र राहु का ग्रहण योग, शनि की महादशा में राहु की अतंरदशा व शनि की पूर्ण दृष्टि का मंगल पर पड़ना, तीनों अशुभ स्थितियों के कारण योग्य होने के बाद भी सिंधिया की प्रतिष्ठा पर आघात लगेगा! साथ ही उनके साथ गए समर्थकों को भी इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। परन्तु इसके विपरित जुलाई 2021 के उत्तरार्ध से सिंधिया पुनः अपनी प्रतिष्ठा प्राप्त करने में सफल हो सकते हैं।
शिवराजसिंह चौहान का समय कष्टदायक
   मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान का जन्म 5 मार्च 1959 को दोपहर 12 बजे सिहोर में हुआ! वे 1990 में पहली बार विधायक बने! उनका राजनीतिक सफर सफलता से जारी रहा। विधायक बनने के कुछ ही समय बाद वे विदिशा से सांसद निर्वाचित हुए। वर्ष 1996,1998 में फिर सांसद बने। 5 बार सांसद रहने के बाद उनका कद बढ़ता गया। प्रदेश में भाजपा के बाबूलाल गौर के मुख्यमंत्री पद से हटने के बाद 29 नवम्बर 2005 से 2008 तक वे पहली बार मुख्यमंत्री बने। उसके बाद 2008 से 2013, 2013 से 2018 तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। 2018 में उन्हें मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ा। लेकिन, 15 माह में कांग्रेस में विद्रोह के बाद कमलनाथ की सरकार का अंत हुआ और 23 मार्च 2020 को वे चौथी बार मुख्यमंत्री बने।
शिवराजसिंह चौहान की जन्मकुंडली उनके भविष्य के बारे क्या इशारा करती है! इस पर एक नजर :
     8 मई 2014 से शनि की महादशा चल रही है। शनि के आठवें भाव में स्थित होने से इस महादशा में पद प्रतिष्ठा के साथ चिंता और परेशानी बढ़ती है। वर्तमान में शनि में नीच राशि के बुध की अंतरदशा के चलते उन्हें 2018 के विधानसभा चुनाव में अपने पद से हाथ धोना पड़ा था! लेकिन, आय भाव में बैठा केतु नीचभंग राजयोग का निर्माण कर रहा है। नीच के बुध के साथ उच्च के शुक्र की मौजूदगी ने शनि की दशा में केतु की अंतरदशा व उच्च शुक्र की प्रत्यतंर दशा ने राजयोग की और इशारा किया है। इस दशा में केतु की अंतरदशा के कारण 21 अप्रैल 2020 के बाद सूर्य के प्रत्यंतर आते ही उन्हें पुनः मुख्यमंत्री पद मिला। सिंह की पत्रिका में 10वें भाव में वायु राशि की मौजूदगी ने ही पूर्व में भी उन्हें तीन बार मुख्यमंत्री पद पर विराजित करवाया था। एक बार पुनः सूर्य का प्रत्यंतर आते ही उन्हें इस पद पर बैठाया! लेकिन, जनवरी 2021 में बुध की प्रत्यतंर दशा भारी पड़ सकती है! क्योंकि, नीच राशि के बुध के अंतर से सिंह को सत्ता से बेदखल होना पड़ा था। शनि में बुध का प्रत्यतंर आते ही पून इस तरह के हालात से सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल के उपचुनाव में शिवराज की प्रतिष्ठा में कमी होने की उम्मीद है।
प्रदेश की जन्म पत्रिका
 प्रदेश की जन्म पत्रिका में बुध की दशा में बुध का अंतर व शनि का प्रत्यतंर सिंतबर से शुरू हो गया है, जो फरवरी माह तक चलेगा! ये प्रदेश के लिए हितकारी रहेगा। लेकिन, वर्तमान मुखिया के लिए प्रदेश में चल रही बुध की दशा में बुध का अंतर भारी पड़ सकता है।
उपचुनाव
  प्रदेश में हो उपचुनाव के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया व शिवराजसिंह की प्रतिष्ठा पर ग्रह अपना असर डाल सकते हैं। शिवराज की जन्म कुंडली में शनि की दशा में केतु की अंतरदशा व बुध का प्रत्यतंर जनवरी माह में आएगा व 2 मार्च तक चलेगा। इस अवधि में संकट के बादल जरूर शिवराज पर आएंगे। ऐसी स्थिति में उन्हें सत्ता से हटना भी पड़ सकता है! परन्तु इस बाधा से शिवराजसिंह पार हो जाते हैं, तो आगे उनकी राह काफी आसान हो जाएगी। दूसरी और ज्योतिरादित्य सिंधिया की जन्म पत्रिका शनि की महादशा में राहु अंतरदशा 6 फ़रवरी 2019 से चल रही है, जो 8 जुलाई 2021 तक चलेगी। तब तक इसका अशुभ प्रभाव बना रहेगा। इस स्थिति में सिंधिया व उनके समर्थकों को भी काफी नुकसान होने के संकेत हैं। लेकिन, जुलाई 2021 के उत्तरार्ध में सिंधिया फिर अपनी प्रतिष्ठा की और अग्रसर होगें।
ग्रहों की ये स्थिति प्रदेश भाजपा के लिए अनुकूल है! वहीं, दूसरी और शिवराजसिंह व ज्योतिरादित्य के लिए समय प्रतिकूल रहने की संभावना होगी।
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पंडित अजय शर्मा
(एडवोकेट और कुंडली विशेषज्ञ)
संपर्क : 9893066604
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