अपना अपना दर्द …… रजत की लघु कथा

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शर्माजी के आंगन में लगे नीम के पेड़ को लहराता देखकर पास में लगा गुलाब का पौधा बोला- नीम दादा आप कितने बड़े हो। आप की शाखाऐ  तो आसमान को छू रही हैं।,और मुझे देखो मैं तो आपके घुटने तक भी नहीं पहुंच पाता हूं।

नीम ने एक लंबी सांस लेते हुए कहा- मेरे प्यारे गुलाब तुम मुझ जैसा होना चाहते हो और मैं तुम्हारे जैसा।  हर साल बड़ा होने का दर्द मैं ही जानता हूं।  मैं सोचता हूं काश मैं भी तुम्हारे जैसा होता तो इन शाखाओं के कटने का दर्द हर साल नहीं उठाना  पड़ता।  गुलाब आश्चर्य में पड़ गया वह बोला नीम दादा बड़ा तुम्हारी शाखाएं कौन काटेगा? इतने में शर्माजी की पत्नी की आवाज सुनाई दी अजी सुनते हो नीम की  शाखाएं फिर से बड़ी हो गई है घर का फ्रंट  भी  शो   नहीं हो रहा है,माली  को बुलवा लेना और उसकी शाखाएं फिर से कटवाना पड़ेगी।

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