मध्यप्रदेश की जन्मकुडंली :प्रदेश की कुंडली से मुखिया का भाग्य प्रभावित होगा ..पं.अजय शर्मा

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मध्यप्रदेश का जन्म 1 नवंबर 1956 को हुआ था। इसमे मध्यभारत, विंध्यप्रदेश तथा भोपाल राज्य को मिलाकर इसका गठन किया गया। इसके बाद 1 नवंबर 2000 में प्रदेश का पुनगर्ठन हुआ। प्रदेश का जन्म कर्क लग्न में हुआ है। कर्क लग्न वाले सामाजिक व कला के क्षेत्र में काफी उन्नति करते हैं। सामाजिक कार्यों व देशसेवा की भावना भी होती है और राजनीतिक क्षेत्र में भी मान प्रतिष्ठा अर्जित करते हैं। मध्यप्रदेश का जन्म कर्क लग्न में चन्द्र की दशा में हुआ था। चन्द्र में शुक्र की दशा रविशंकर शुक्ल ने प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। प्रदेश के मुखिया ही राज्य सेवा के लिए उत्तरदायी है, इसलिए कुडंली के प्रभाव के इससे जोड़कर देखा जाना चाहिए।
ज्योतिष के नजरिए से मध्यप्रदेश की आगे की स्थिति :
  प्रदेश की जन्म कुंडली में शुभ अशुभ योगों का निर्माण के होने से प्रदेश धीरे-धीरे बाधाओं के साथ तरक्की करेगा। चौथे भाव में उपस्थित बुधादित्य योग के कारण ऐश्वर्यपूर्ण, सुविधापूर्ण घर, वाहन, सुख, विदेश भ्रमण आदि प्रदान करता है। इससे प्रभावित होने पर व्यक्ति चतुर बुद्धिमान के साथ-साथ अहंकारी भी होता है। अपनी वाणी से दूसरे को पस्त कर सकता है। लेकिन, यहाँ कुंडली में सूर्य अपनी नीच राशि तुला में होने से वाणी में खोट उत्पन्न करता है, इससे हानि उठाना पड़ती है।
* शापित योग : पांचवें भाव में शनि राहु की उपस्थित शापित योग का निर्माण कर रही है। इसके प्रभाव से बुद्धि प्राप्त होती है। लेकिन, व्यापार करियर व जीवन पर असर होता है व विघटन की स्थिति उत्पन्न करता है। इसी कारण प्रदेश का विघटन होकर छत्तीसगढ़ अलग राज्य बना।
* चंद्र मंगल योग : आठवें भाव में उपस्थित मंगल पूर्ण दृष्टि से चन्द्र को देख रहा है। इस योग का मतलब होता है, जल और अग्नि का मिलन होना। यहाँ मंगल अपनी शत्रु राशि में बैठा होकर चन्द्र के साथ गुरू और शुक्र को देखने से अशुभ प्रभाव के कारण वाद-विवाद में लगातार फंसे रहना धन कमाने के लिए अनुचित रास्तों का प्रयोग करना आदि दुष्परिणाम भी होते हैं। यही कारण है कि राज्य के मुखिया वीरेंद्र कुमार सकलेचा को भ्रष्टाचार के आरोप में हटाया गया। सुंदरलाल पटवा दो बार मुख्यमंत्री बने, पर दोनों बार बर्खास्त कर दिए गए! इंदौर में आपरेशन बॉम्बे बाजार में चर्चित रहे। मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह की भूमिका पर भोपाल गैस कांड में गंभीर सवाल उठाए गए, चुरहट लाटरी घोटाले में भी नाम आया। प्रकाशचन्द्र सेठी डाकुओं पर बम बरसाना चाहते थे, दिग्विजय सिंह पर भी कई आरोप लगे! उमा भारती, बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह तक गंभीर सवाल उठाए गए।
आठवें मंगल के कारण प्रभाव अधिक होता है, अपने भाई बंधुओं से पीड़ित रहना, शत्रुओं के सामने नतमस्तक होना आदि प्रभाव होते है। मित्रों से व्यवहार ठीक नहीं रहता मन में घबराहट बनी रहती है। तीसरे भाव में उपस्थित पृथ्वी राशि के शुक्र के प्रभाव से आनंदमय समय व्यतीत होता है, प्रवास अधिक होता अनैतिक कार्य करना प्रभाव में होता है। पंचम भाव में वृश्चिक राशि के शनि की मौजुदगी से भूमि, खदान, मकान के व्यवसाय से लाभ होता है। शनि भाग्योदय में सहायक होता है, साथ ही शनि के साथ राहु की उपस्थिति से नीचकर्म वाले लोगों से संगति, राज्य की और से दंड का भय भी उत्पन्न होता है।  वहीं 11वें भाव में वृषभ के केतु के प्रभाव से जातक ऐश्वर्यपूर्ण जीवन के बाद भी संतुष्ट नहीं होता और चिंताग्रस्त रहता है।
* वर्तमान में प्रदेश की स्थिति : हम पहले की बता चुके है कि प्रदेश की स्थिति का आकलन मुखिया से जोड़कर देखा जाए। गुरू की महादशा में शुक्र के अंतर में दिग्विजय सिंह के गुरू प्रबल होने से 7 दिसंबर 1993 को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली व गुरू की दशा में राहू के अंतर में पुनः 1998 में शपथ ली! परंतु, शनि में बुध के अंतर व सूर्य के प्रत्यतंर आने पर सत्ता से हटना पड़ा। वहीं, इसी अंतर के प्रभाव से उमा भारती ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी! शनि की दशा में बुध का अंतर व गुरू की प्रत्यतंर दशा में उमा भारती को भी 2004 में मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था। इसी प्रकार बाबूलाल गौर को शनि में केतु की अंतर्दशा व मंगल के प्रत्यतंर में सत्ता से हटना पड़ा। वही प्रदेश की कुंडली में शनि की दशा व शिवराज सिंह की कुंडली में धनु राशि के शनि के प्रभाव व गुरू की महादशा के चलते असामान्य घटना घटी और वे सबको दरकिनार करते हुए मुख्यमंत्री की कुर्सी पर विराजमान हो गए।
   प्रदेश में शनि की दशा आरम्भ होने के बाद दिग्विजयसिंह, उमा भारती, बाबूलाल गौर को मुख्यमंत्री पद से हटना पड़ा था। अजीब संयोग कहें कि प्रदेश की कुंडली में 14 सितम्बर 2018 को शनि की महादशा समाप्त हो गई, वहीं दूसरी और शिवराज की पत्रिका में 8 मई 2014 से शनि की दशा आरंभ हो गई। शनि देव की कृपा से मुख्यमंत्री बने शिवराज के साथ शनि में शनि के अंतर तक सब ठीक रहा! परंतु, शनि में बुध के अंतर के प्रभाव व मंगल की अंतर्दशा में चलती सत्ता से बेदखल होना पड़ा, लेकिन शनि में बुध की अंतर्दशा समाप्त होते, जैसे ही केतु का अंतर आरंभ हुआ व शुक्र का प्रत्यतंर शुरू होने पर शिवराज वापस मुख्यमंत्री पद पर विराजमान हो गए। लेकिन, एक बार पुनः प्रदेश की जन्म पत्रिका में बुध की दशा में बुध का अंतर व शनि का प्रत्यतंर सिंतबर माह शुरू होकर फरवरी माह तक चलेगा! वहीं, दूसरी और शिवराज की जन्म कुंडली में शनि की दशा में केतु की अन्तर्दशा व बुध का प्रत्यतंर जनवरी माह में आएगा और 2 मार्च तक चलेगा! इस अवधि में संकट के बादल जरूर शिवराज पर आएंगे और सत्ता से हटना पड़ सकता है! परन्तु, यदि उक्त बाधा से शिवराज पार हो जाते हैं, तो उनके लिए आगे की राह काफी आसान हो जाएगी।
* प्रदेश पर असर : वर्तमान में बुध की महादशा में बुध की अन्तर्दशा होने से लाभ, कीर्ति और वैभव प्राप्त होता है। सत्ता में सम्मान की प्राप्ति होती है। परन्तु, चौथे भाव में नीच सूर्य के साथ होने से सम्मान में कमी आएगी। कोरोना संक्रमण में इज़ाफा होगा! आशा के अनुरूप नियत्रंण करने में सफलता प्राप्त नहीं होगी। अगस्त माह के पूर्वार्ध तक वैचारिक मतभेद बढ़ेंगे। व्यापार मंदा रहेगा, विवादों की स्थिति बनेगी और अराजकता में इज़ाफा हो सकता है। लेकिन, 16 अगस्त के बाद समय अपेक्षाकृत अच्छा रहेगा। व्यापार, नौकरी और पैसे वालों को लाभ होगा! तुरंत निर्णय लेना उचित हो सकता है। अक्टूबर से नबंवर माह में एक बार फिर स्थिति खराब होने के संकेत हैं। प्रदेश की आर्थिक स्थिति बदतर हो सकती है। बीमारी और तनाव बढ़ेगा, अराजकता बढ़ने की भी सम्भावना है। प्राकृतिक आपदा से नुकसान होगा।सरकार के लिए समय उत्तम नहीं है। अपने परिवार के लोगों से सामना करना आसान नहीं होगा और तनाव भी बढ़ेगा।
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(लेखक ज्योतिष और कुंडली विशेषज्ञ हैं)
संपर्क : +91 98930 66604

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