मध्य प्रदेश में भाजपा को चाहिए आदिवासी मुख्यमंत्री !

कान्ग्रेस और भाजपा  दोनों ही दलों ने  प्रदेश कोआदिवासी मुख्यमंत्री नही दिया है l

0
464

प्रदेश  भाजपा में  अब आदिवासी मुख्यमंत्री की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है इसका ये मतलब  यह कदापि नहीं है कि शिवराज सिंह चौहान को हटाया जा रहा है l आदिवासी मुख्यमंत्री की पटकथा तो 2018 के विधानसभा चुनाव  के बाद ही शुरू हो गई थी जब  भाजपा को ट्राइबल सीटों पर भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। उसे 47 में से 16 सीटों  सफलता मिल सकी थी l उल्लेखनीय है की इनमे से अधिकाँश सीटें मालवा निमाड़  इलाके की है l

लगातार तीन बार बहुमत से मुख्यमंत्री बनने वाले शिवराज सिंह जिनकी अनेक  कल्याणकारी योजनाओं को राष्ट्रीय स्तर   अपनाया गया था 2018 के विधानसभा चुनाव में जनता  ने बहुमत  नहीं दिया और शिवराज सत्ता की जगह विपक्ष के नेता बन गए l कांग्रेस  की कमलनाथ के नेतृत्व वाली सरकार के बनते ही भाजपा के  राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय  खुले आम बयान  देते रहे कि “जिस दिन बॉस का इशारा  हो जाएगा ये सरकार गिर जायेगी “ और हुआ भी वही मात्र ६ महीने में ही कमलनाथ सरकार की जनता द्वारा चुनी सरकार विपक्ष में आ गयी और  जनता  जिस भाजपा को वोटो से नकार चुकी थी फिर से सत्ता  पर काबिज  हो गयी l सरकार की इस अदला बदली में जनता का कोई रोल नही था l न भाजपा  और किसी नेता  का  कोई   सीधा हस्तक्षेप l कांग्रेस  का दामन छोड़ कर  अपने साथी विधायकों के साथ आये  सिंधिया ने सत्ता भाजपा के पाले में डाल दी l

बुलंद सितारे वाले निकले शिवराज सिंह चौहान 

2018 के विधानसभा  में  शिकस्त खाए  शिवराज सिंह चौहान के सितारे इतने बुलंद थे कि भाजपा शीर्ष को, न  चाहते हुए भी चौथी बार भी उन्हें ही मुख्यमंत्री बनाना पड़ा l कहा जाता है  दलबदल के बाद ज्योतिरादित्य को भी मुख्यमंत्री बनाने की मांग उठी थी ,लेकिन उसे अस्वीकार  कर  दिया गया था , यदि ऐसा किया जाता तो जनमानस में पार्टी और सिंधिया पर सत्ता लोलुपता का छवि बनती l

भले ही मध्यप्रदेश में हार कर भी भाजपा पुन: काबिज हो गयी हो मगर शीर्ष नेतृत्व को इस बात की चिंता रही कि पार्टी प्रदेश में  अनुसूचित जनजाति वर्ग में अपने जनाधार  को खोती जा रही है l इतना ही नहीं  अनुसूचित जनजाति वर्ग में अपने  सिमटते जनाधार को देखते हुए पार्टी इस क्षेत्र में अब आदिवासी मुख्यमंत्री की तलाश में जुटी है l  इसका यह आशय कदापि नही है कि शिवराज सिंह को हटाया जा रहा है l पार्टी के राष्ट्रीय  महासचिव विजयवर्गीय   और खुद ज्योतिरादित्य  सिंधिया सहित अनेक वरिष्ठ  नेता  बार बार इस बात का एलान करते नजर आते है आगामी चुनाव  शिवराजसिंह के ही नेतृत्व में लड़ा जाएगा l

इंदौर ने हासिल की एक बड़ी उपलब्धि : शत प्रतिशत हुआ पहले डोज का टीकाकरण

मध्यप्रदेश का प्रभार मिलने के बाद अपनी पहली बैठक में ही भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन पार्टी महामंत्री शिवप्रकाश आदिवासी का वर्ग में पार्टी के खिसकते जनाधार से को लेकर नई रणनीति पर काम करने की समझाइश दे चुके हैं।  इसके पीछे ऐसा माना जा रहा है कि प्रदेश स्तर पर पार्टी के पास अजजा वर्ग के प्रभावी नेतृत्व की कमी है। पार्टी के जो नेता इस वर्ग से आते हैं उनकी सक्रियता अपने ही क्षेत्रों तक सिमटी हुई है। प्रदेश के अन्य जिलों में उनकी मौजूदगी और सक्रियता नजर नहीं आती। पार्टी ने भी उनके लिए ऐसे कोई कार्यक्रम नहीं बनाए। केंद्रीय मंत्री से लेकर अजजा वर्ग के लोकसभा और राज्यसभा सदस्यों से लेकर प्रदेश के मंत्री-विधायकों की भी यही स्थिति है ।

ज्योतिरादित्य सिन्धिया की जन आशीर्वाद यात्रा का  मकसद ये तो नहीं 

नये केंद्र केन्द्रीय मंत्री बने ज्योतिरादित्य सिन्धिया की जन आशीर्वाद यात्रा को मालवा में आयोजित करने के पीछे  हो सकता हो ये  भी कारण हो  कि वे इन इलाकों के अदिवासी नेताओं का मन टटोले  l यह तय है किपार्टी के अंदर आदिवासी मुख्यमंत्री की खदबदाहट  शुरू हो गयी है और यदि ऐसा होता है तो ये मध्यप्रदेश के इतहास में मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि आज तक कान्ग्रेस और भाजपा  दोनों ही दलों ने  प्रदेश कोआदिवासी मुख्यमंत्री नही दिया है l

लोकल इंदौर का एप गूगल से डाउनलोड करने के लिए क्लिक करें... 👇 Get it on Google Play

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here