हवन करने के चक्कर में हाथ जला बैठे… गुस्ताख़ी माफ में नवनीत शुक्ला

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कभी-कभी बांस भी उलटे बरेली होती है। वैसे तो उलटे बांस बरेली के होते है परंतु सांवेर के एक कार्यक्रम में कुछ ऐसा ही दृश्य हो गया। पुण्य मिलने की बजाय पाप माथे आ गया। हवन करने बैठे थे हाथ जल गए। पिछले दिनों सांवेर में नर्मदा लाने को लेकर मुख्यमंत्री द्वारा ढाई हजार करोड़ के फोड़े गए नारियल के बाद इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री की सभा के बीच में ही बड़ी तादाद में महिलाओं द्वारा सभास्थल छोड़कर जाने का जो क्रम शुरू हुआ उसके कारण इस कार्यक्रम की अच्छी खासी भद्द पीट गई। अब इस कार्यक्रम को लेकर की गई तैयारियों और उनके आयोजक जो इन दिनों मुख्यमंत्री से भी नाराज चल रहे है के माथे ढोले जाने की तैयारी हो चुकी है। सवाल उठ रहा है कि जब कार्यक्रम 2 बजे से होना था तो पूरे सांवेर से 600 बसों में सुबह से ही महिलाओं और वृद्धों को भरकर क्यों ले आया गया। 1 बजे तक तो महिलाओं का धैर्य जवाब दे गया था। हालांकि घड़ी-घड़ी यह कहा जा रहा था कि खाने की व्यवस्था की गई है, परंतु इसमें से 100 से अधिक बसों में सवार होकर आई महिलाएं खाने को छोड़कर पैदल ही अपने घरों की ओर निकल गई। इनमें से कई को 5 किमी से लेकर 8 किमी तक चलना पड़ा है। ऐसे में यह कार्यक्रम अच्छा प्रभाव छोड़ने की बजाय पेलवान के लिए उनकी चुनावी जड़ों में दही डालने का काम हो गया। हालांकि बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम की रूपरेखा भाजपा के ही एक ताकतवर विधायक और संगठन के एक मजबूत नेता ने तैयार की थी। इस कार्यक्रम में तमाम काम की जानकारी देना थी, परंतु कार्यक्रम के बाद काम तमाम हो गया।
कांग्रेसी कृष्ण मुख हुए तो भाजपाई प्रसन्न…
अपने जीतेजी भाजपा के लिए लगातार मुसीबत बने रहने वाले स्व. माधवराव सिंधिया को उनके जन्मदिवस पर कांग्रेसी ही माल्यार्पण करते रहे। चूंकि इंदौर में उनके समर्थक ताकतवर रहे अत: माल्यार्पण पर समारोह भी मजबूत होते रहे। परंतु उनके निधन के बाद अब उनकी मूर्ति का भी भाजपाईकरण हो गया। अच्छे भले कांग्रेसी से भाजपाई बना दिए गए। ताउम्र वे कांग्रेस की राजनीति करते रहे। आज उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण करने के लिए कांग्रेसियों के मुखड़े नहीं दिखे। उन्होंने इस कार्यक्रम के पहले ही कृष्ण मुख कर लिया था। वहीं पहली बार भाजपाई उन्हें माल्यार्पण करने पहुंचे। कभी-कभी जीवन में बच्चों की खुशी के कारण भी स्वर्ग से अटलजी के साथ बनी दीर्घा पर बैठकर यह मजमा देखते हुए शायद वे गुनगुना रहे होंगे मिल गया होता सुर मेरा तुम्हारा तो बदल गया होता मजमा हमारा…
साहब आईजी का कारोबार देखने लगे थे…
क्राइम ब्रांच में रहे एक अधिकारी जिले के प्रभारी मंत्री के प्रयास के बाद भी अपना तबादला नहीं रुकवा पाए। वहीं उनकी यह भी शिकायत थी कि वे पूर्व आईजी के नाम पर खुद ही आईजी की तरह फैसले लेने के साथ कारोबारी कामकाज भी देखने लगे थे। कारोबारी कामकाज का मतलब तबादले और रियायत दिलाने का, आप इसे व्यापार न समझे। हालांकि सिंघम के नाम से जलवा दिखाने वाले उक्त अधिकारी ने कुख्यात भू-माफिया को जमानत में राहत दिलाने के जुगाड़ में धाराओं में भी हेरफेर कर दिया था। यह हेरफेर इतना था कि इस पर लताड़ तो हुई साथ में सौदे का भांडा भी फूट गया। प्रभारी मंत्री अब इसके बाद कुछ भी करने की स्थिति में नहीं बचे थे। अत: उन्होंने मौन धारण करने में ही अपनी इज्जत समझी। वरना जाने वाले थे जापान और पहुंच जाते चीन…
अंतत: ‘प्रतिभाÓ ने सबको ‘पालÓ ही लिया...
पुरुष अधिकारियों की काम करने की कला अलग होती है और महिला अधिकारियों के काम करने का हुनर अलग होता है। पुरुष अधिकारियों को तेवर-कलेवर बदलते रहना पड़ता है। कुछ जगह भय भी बताना पड़ता है, परंतु महिला अधिकारियों के काम कराने का तरीका बड़े पदों पर कैसा होता है, यह इंदौर नगर निगम में पदस्थ निगम आयुक्त प्रतिभा पाल से देखा जा सकता है। उनके व्यवहारिक हुनर ने निगम के अधिकारी और कर्मचारियों को अपने पालने में प्रसन्नचित्त से पाल ही लिया। इसके पूर्व दोनों निगम आयुक्त रहे मनीष सिंह और आशीष सिंह के काम करने का तरीका सख्त था। हालांकि उस वक्त उसकी जरूरत थी, परंतु प्रतिभा पाल ने थोड़े समय में ही सहज भाव से अपने काम करने के तरीके से अधिकारियों और कर्मचारियों के मन में विशेष जगह बना ली। काम उसी गति से चल रहे हैं, पर अब भय नहीं है। काम को लेकर शिकायतें कम हैं, कसावट ज्यादा है, पर सजा नहीं है। सबसे बड़ी बात नगर निगम में लंबे समय से जनकार्य विभाग में उन्नीस झोन में नोटिसों की आड़ में चल रहे लाखों रुपए के खेल को उन्होंने सहज हालत में ही बंद करवा दिया। वहीं दूसरी ओर समन्वय से काम करने का हुनर भी उन्होंने कर्मचारियों को सिखा दिया।
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