क्या प्रियंका गांधी बन सकती हैं भारत की प्रधानमंत्री ? जानें क्या कहती है कुंडली

इंटरनेशनल ‌ज्योतिषचार्य गुरु महेश ‌जैन का आंकलन

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प्रियंका गांधी अब राजनीति में हैंl इनकी शुरुआती यात्रा तो लगभग बेमानी थी लेकिन पिछले एक साल में उन्होंने अपना व्यक्तित्व और वर्चस्व पूरे देश में स्थापित कर लिया हैl हाल ही में लखीमपुर खीरी की घटना ने पूरे विपक्ष को यह मौका दिया कि बीजेपी की सरकार को ठीक से घेरा जाएl सबने अपनी-अपनी कोशिश की, लेकिन प्रियंका गांधी ने बाजी मार लीl शायद इसका कारण यह भी है कि कुछ राज्यों में इनकी सरकार हैlवहां के मुख्यमंत्री और नेता भी इनका हौंसला बढ़ाने के लिए लखनऊ, लखीमपुर पहुंच गएl इन्हें 40 घंटे से अधिक समय के लिए नजरबंद कर दिया गया था और ये अपने कमरे में झाड़ू लगाती हुई देखी गईंl सफलता अजीब चीज हैlअगर मिले तो हौंसला आसमान छूने लग जाता है और अगर असफलता हाथ लगे तो व्यक्ति लंबे समय तक दोबारा हौंसला भी जुटा नहीं पाताl

पलटी मार चुके हैं प्रियंका के ग्रह

राजनीतिक पंडित ऐसा ही बोलना पसंद करेंगे लेकिन हम ठीक से जानते हैं कि अगर आकाश के ग्रह आपके पक्ष में नहीं हैं तो आपकी तमाम योजनाएं जो कितने ही विशेषज्ञों ने बनाई हों वो धरी की धरी रह जाती हैं,अगर आकाश आपका साथ नहीं देता l जब आकाश साथ देता है तो यह फर्क नहीं पड़ता कि आप किस बैकग्राउंड से आए हैं और कितने योग्य हैंl आकाश का काम है कि आपको आकाश बना देनाl इस बार इनके ग्रहों ने एक पलटी मारी है जिसकी चर्चा आने वाले लंबे समय तक होती रहेगी l ऐसे में हमारा दायित्व हो जाता है कि आकाश के मन में क्या है उसे पढ़ा जाए और दुनिया के साथ शेयर भी किया जाए ताकि ताकीद रहेl

दिल्ली में हुआ था प्रियंका का जन्म

प्रियंका गांधी का जन्म 12 जनवरी 1972 को शाम के समय दिल्ली में हुआ था. लग्न-मिथुन, केतु-कर्क, चन्द्रमा-वृश्चिक, सूर्य, बुध, बृहस्पति-धनु, राहु-मकर, शुक्र-कुंभ, मंगल-मीन और वक्री शनि-वृष में स्थित हैं l प्रियंका गांधी का जन्म मिथुन लग्न में हुआ और सप्तम भाव में सूर्य, बुध और गुरु विराजमान हैं. सूर्य तृतीय भाव (पराक्रम) का स्वामी और बुध, दो केन्द्रों का और गुरु भी दो केन्द्रों का यानि चारों केन्द्रों- लग्न, चतुर्थ, सप्तम और दशम के मालिक बुध और गुरू साथ हैंl

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पति की वजह से सामने आई बाधाएं

गुरु यहां पर सप्तम (पति) भाव का स्वामी होकर बाधक भी हैl इसी कारण इनके पति रॉबर्ट वाड्रा को लेकर इनके राजनीतिक करियर में एक लंबे समय तक बाधा भी रहीl 2014 का लोकसभा चुनाव बीजेपी ने जीता उसमें अन्य कारणों के अलावा रॉबर्ट वाड्रा भी एक बहुत बड़ा मुद्दा थाl इनको गिरफ्तार और एक्सपोज करने के बहुत सारे वायदे बीजेपी के नेताओं ने किए और पूरा देश समझ ही रहा था कि इधर बीजेपी चुनाव जीती और उधर वाड्रा साहब जेल में और परिवार पर यातनाओं की झड़ी लग जाएगीlलेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआl

पति ही कराएंगे बेड़ा पार ?

लेकिन इससे बीजेपी को एक लाभ तो अवश्य हुआ कि प्रियंका गांधी की राजनीति में शुरुआत अवश्य लेट हो गईl हम ऐसा मानते हैं कि यहां भी ग्रहों का योगदान हैl निःसंदेह बृहस्पति बंधकाधिपति है जो पत्नी और पति को अपने-अपने कारणों से बांध देता है लेकिन बृहस्पति एक सशक्त पंचमहापुरूष राजयोग ‘हंस’ बनाकर सप्तम में बैठा हुआ है और लग्नेश के साथ है. इसका तात्पर्य यह हुआ कि इस योग के प्रभाव से अभी तक तो वाड्रा को कुछ नहीं हुआ और अब लगता नहीं है कुछ होगाl अगर फिर भी यह हिमाकत हुई तो प्रियंका गांधी को बहुत फायदा होगा.

मंगल की उपस्थिति दशम भाव में उत्तम है और यह मंगल दर्शाता है कि प्रियंका को एक दिन राज्य प्राप्त होगा और आने वाले महीनों और वर्षों में इनकी इमेज बहुत हद तक इंदिरा गांधी जैसी हो जायेगी. पिछले कुछ समय से दुनिया ने देखा कि ये हिम्मतवर और दबंग महिला हैं और बड़े प्रभाव के साथ अपनी बात को भी रखती हैं और लोगों को अपने साथ बांध भी लेती हैंl यह क्वालिटी जिस भी नेता में होती है वह राजनीति में दीर्घायु हो जाता है.

शुक्र पंचम का स्वामी होकर नवम भाव में स्थित है अर्थात ये भाग्यशाली तो हैं ही. इनके पिता प्रधानमंत्री थे. इनकी माता आज भी कांग्रेस की प्रेसीडेंट हैं और पुरखों की तो बात ही क्या. एक बात तय है कि पूरी जिंदगी भाग्य इनका पीछा नहीं छोड़ेगा. शनि द्वादश में हैं लेकिन विपरीत राजयोग में हैं. इसका मतलब यह हुआ कि जब-जब इन्हें विपरीत स्थितियां मिलेंगी और उनका डटकर मुकाबला करेंगी तो विपरीत स्थितियां राजयोग में परिणित हो जाएंगी जैसा अभी लखीमपुर खीरी में देखने को मिला.

 

इस कुंडली में एक ही ग्रह खराब है और वो है नीच का चन्द्रमा छटे भाव में. यह चन्द्रमा बृहस्पति से बारहवें होने के कारण ‘सकट योग’ में भी है. यानि मुश्किलें तो कम नहीं होंगी और परिवार का बर्डन भी इन्हें झेलना पड़ेगा. जैसे पहले दादी की हत्या, फिर पिता की हत्या और विरोध में होने के कारण इनके परिवार पर हर तरह के लांछन. कुंडली में यही ग्रह कमजोर है. इस कारण संघर्ष बहुत करना पड़ेगा लेकिन अंत में सफलता भी मिलेगी.

वर्तमान में इन्हें शुक्र की दशा में बुध का अंतर 10 मार्च 2020 से 9 जनवरी 2023 तक है. बुध लग्नेश होकर सप्तम भाव में बैठा है और शुक्र के साथ उसका कनेक्शन बहुत अच्छा है और इसी अंतर्दशा में इन्हें व्यक्तिगत तौर पर देश और विदेश में जबरदस्त सफलता और प्रतिष्ठा प्राप्त हुई. सूर्य के साथ बुध स्थित होकर ‘बुधादित्य राजयोग’ भी बनाए हुए है. सफलता का सिलसिला तो बुध की अंतर्दशा में चलना शुरू हुआ और यह सिलसिला चलता रहेगा. इनका एक मात्र ग्रह जो इनके जीवन में आमूलचूल परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है वो ग्रह है- बुध. जब सूर्य की महादशा 2024 से 2030 तक चलेगी, वो समय राजनैतिक तौर पर इनके लिए बेहतर रहेगा. प्रियंका गांधी को कोई भी अंडरएस्टीमेट न करे.

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