कोरोना वायरस का असर :इंदौर में 70 सालों से निकलने वाली “गेर ” इस बार नहीं निकलेगी

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लोकल इंदौर १३मार्च । पिछले 70  सालों से  रंग पंचमी पर लगातार इंदौर में निकाली जाने वाली रंगारंग गैर इतिहास में पहली बार करोना  वायरस के चलते निरस्त  कर दी गयी है। जिला प्रशासन  ने ये निर्णय लिया है।  उल्लेखनीय है इस  गैर  में यूनिस्को  धरोहर में  शामिल करने के प्रयास किये जा रहे है।

पहली गेर का श्रेय बाबूलाल गिरी को 

होल्कर रियासत के वक्त महाराजा रंग खेलने लाव लश्कर के साथ शहर में निकलते थे।बाद में इस परंपरा कोटोरी कार्नर की गेर के  रूप में बाबूलाल गिरि ने शुरु किया।पानी और रंग गुलाल उड़ाती इस गेर में जमीन से चार-छह मंजिल तक के मकानों में मिसाइल से रंग-गुलाल फेंकने की शुरुआत रमेश शर्मा (बोरिंग वालों) कोजाती है।उन्होंने तेज गति से बेहद ऊंचाई तक रंग फेंकने वाली मिसाइल गेर में शुरु की इस प्रयोग को बेहद सफलता मिलने का कारण यह भी रहा कि  दूर तक उस हिस्से में रंगों के गुबार छा जाते थे।

शहर में पहली बार1948 में टोरी कॉर्नर से गेर  निकाली गई थी। इसके बाद अन्य स्थानों से भी गेर निकलने की परंपरा शुरू हुई।

गेर को विश्व धरोहर में शामिल करने का 40 पेज का प्रस्ताव केंद्र ने भेजा यूनेस्को को 

रंगपंचमी पर निकलने वाली गेर को यूनेस्को के रेकार्ड में विश्व धरोहर बनाने के लिए 40 पेज का प्रस्ताव केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी को भेजा जा चुका है। रंगपंचमी की गेर को विश्वधरोहर में शामिल कराने की पहल कलेक्टर लोकेश जाटव के प्रयास से हुई है।

टोरी कार्नर नाम रखा दद्दू तिवारी ने और सबसे पुरानी गेर की शुरुआत की बाबूलाल गिरि ने

जिस टोरी कार्नर (मल्हारगंज) से शहर की पहली गेरकी शुरुआत हुई है, उस तिराहे का टोरी कार्नर नामकरण पुराने समाजवादी दद्दू तिवारी ( गंगा प्रसाद तिवारी) ने किया।शहर की इस पहली गैर की शुरुआत कांग्रेस केपूर्व पार्षद बाबूलाल गिरि (गिरि होटल) ने की, अब उनके पुत्र शेखर गिरि इसे जारी रखे हुए हैं।इस गेर के बादअन्य संस्थाओं ने भी गेर निकालना प्रारंभ की, उनमें भी अधिकांश आयोजक पश्चिम क्षेत्र के ही हैं।

पुराने समाजवादियों में दद्दू तिवारी का नाम जाना पहचाना है। उनकी इस तिराहे पर नियमित रात्रिकालीनबैठक थी। ब्रिटेन में मजदूरों की राजनीतिक पार्टी का नाम टोरा टोरी (गुरिल्ला) होने से उन्होंने करीब 70 सालपहले नियमित बैठक वाले इस तिराहे को टोरी कार्नर नाम दिया था।बस तब से मल्हारगंज की गिरि होटलवाला यह क्षेत्र टोरी कार्नर के रूप में पहचाना जाने लगा।

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