इस बार गोबर से बनी राखियाँ

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लोकल इंदौर ५ अगस्त . इस बार हो सकता है आप की कलाई पर राखी जो बंधी हो हो गाय के गोबर से बनी हो . गाय   के गोबर और मूत्र के उपयोग को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पहली बार उज्जैन में गोबर से निर्मित राखियां इस रक्षाबंधन पर भाइयों की कलाई पर सजेगी।

इन राखियों का निर्माण भारत की सबसे बड़ी गोशाला श्री गोधाम पथमेड़ा जिला जालोर राजस्थान में किया गया है। विविध तीज-त्योहार और मंदिरों के शहर में इस बार अनूठी पहल हुई है, रक्षाबंधन पर गोबर से निर्मित विशेष राखी आई हैं। यह राखियां पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने के साथ गोधन के समुचित उपयोग की प्रेरणा भी जन-जन को देगी। गायत्री परिवार से जुड़े गोसेवक गोविंद पाटीदार इन अनूठी राखियों को लेकर आए हैं। गोबर से निर्मित राखियां आर्टिफिशियल राखियों से अलग हैं। इसमें प्लास्टिक, कागज, पन्नी, सितारे, स्पंज और अन्य अप्राकृतिक सामग्री का उपयोग नहीं किया गया हैं। राखियां गाय के गोबर से निर्मित की गई हैं। इसमें गोबर के साथ अन्य प्राकृतिक सामग्री को मिलाया गया है।
सांचे में ढालकर आकार दिया
गोसेवक गोविंद पाटीदार ने बताया कि राजस्थान के पथमेड़ा में भारत की सबसे बड़ी गोशाला है। इसमें गोधन यानी गोबर और गोमूत्र का समुचित उपयोग करने के लिए अनेक मानव उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। श्री गोधाम में इस बार राखियों का निर्माण किया गया है। गाय के गोबर को लकड़ी का बुरादा, तिल, सरसों, गोमूत्र, कुछ मात्रा में गोंद मिलाकर आटे की तरह गूंथा जाता है। इस मिश्रण को सांचे की मदद से फूल-पत्तियों का आकार देकर विविध रंग भरे गए हैं। बंधन के लिए सूत का धागा लपेटा है। वर्तमान में २० से लेकर २५ रुपए तक की राखियां इनके पास उपलब्ध हैं।

अब गणेशजी और लक्ष्मीजी की प्रतिमा भी बनेगी 
पाटीदार के अनुसार आने वाले गणेशोत्सव और दीपावली पर लक्ष्मी पूजन के लिए गोबर और प्राकृतिक सामग्री से भगवान गणेशजी और माता लक्ष्मीजी की प्रतिमा निर्माण की योजना भी है। इसके लिए शोध किया जा रहा है।
गोवंश केवल दूध, दही, घी तक सीमित नहीं
पाटीदार का कहना है कि ग्रामीण भारत में किसान गोवंश को केवल दूध, दही, घी तक ही सीमित समझता है, जबकि गोवंश का गोबर, मूत्र बहुउपयोगी है। इसके कई उत्पाद सामान्य प्रशिक्षण से किसान अपने घर में ही बनाकर लोगों को उपलब्ध करा सकते हैं। इससे किसानों, गोपालकों को अतिरिक्त आय होगी। होता यह है कि गाय ने दूध देना बंद कर दिया तो पालक उसे छोड़ देते हैं। यह सहीं नहीं है, दूध के अलावा विक्रय के लिए मूत्र और गोबर भी महत्वपूर्ण है। इससे अनेक जीवन उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। (सभार)
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