कढ़ी पत्ता मत समझो… दादा को…. गुस्ताखी माफ में नवनीत शुक्ला

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कढ़ी पत्ता मत समझो…
पूरे प्रदेश में सर्वाधिक मतों से जीतकर अपनी पहचान बनाने वाले दादा दयालू को भाजपा के दिग्गज नेता इन दिनों   कढ़ी  पत्ते की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं, यानी हर तड़के में जरूरत तो होती है, पर जब समय आता है तो पत्ते उठाकर किनारे कर दिए जाते हैं। कुछ ऐसा ही मामला दादा दयालू के साथ भी हो रहा है। कई विधानसभा सीटों पर अपने कार्यकर्ताओं की ताकत रखने वाले दादा दयालू को भाजपा का ही एक धड़ा दिल्ली और भोपाल में कमजोर करने में लगा हुआ है, परंतु इंदौर और उसके आसपास उनकी जमीन कमजोर नहीं कर पा रहा है। इधर दूसरी ओर पांचों विधानसभा में होने वाले उपचुनाव के दौरान भाजपा को यह लग रहा है कि यहां ठाकुर वोट निर्णायक होने जा रहे हैं। ऐसे में ठाकुर की काट के लिए ठाकुर को ही मैदान में उतार दिया है। जब शेखावत को घर बिठाया गया तो उषा ठाकुर को मैदान में लाया गया। इधर दादा दयालू ने सांवेर से अपनी दूरी बना ली है। कहने को तो वे सोमनाथ गए हैं और अभी उनके आने का प्रोग्राम तय नहीं है। इसी कारण वे बैठकों में भी नहीं पहुंचे, वहीं उषा ठाकुर ने अब सांवेर की कमान संभाल ली है। पेलवान को भी लग रहा है कि स्टूडियो कहीं महल के चक्कर में अपना हिसाब पूरा न कर ले, इसलिए एक नाव के बजाय दो नाव पर सवारी करना अभी तो ठीक लग रहा है। बाद में जरूरत होगी तो कूदाकादी कर लेंगे, क्योंकि कूदाकादी का अब उनको भी अच्छा-खासा अनुभव हो गया है।
बल्लेबाज विधायक और दीदी आमने-सामनेे
बल्लेबाज विधायक आकाश बाबू के खासमखास रहे भरत खस का इन दिनों तीन नंबर में अच्छा-खासा परचम लहरा रहा है। वे आकाश बाबू के हनुमान भी थे। इस बीच तीन नंबर से माताश्री के रवाना होने के बाद उनके शेर रत्नेश बागड़ी की हालत चिड़ियाघर के शेर जैसी कर दी गई थी। फरमान जारी कर दिया था कोरोना काल में इन्हें अनाज बांटने को नहीं दिया जाए। इनके क्षेत्र में भरत खस नए शेर होंगे और वे ही अनाज बांटेंगे, लेकिन समय ने ऐसा पलटा खाया कि अब भरत खस आने वाले दिनों में रत्नेश बागड़ी से दो-दो हाथ करने के बारे में सोचेंगे। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि भरत खस को अब तीन नंबर में पानी पिलाने वाले भी मिल जाएं तो बड़ी बात होगी। देखते हैं समय किधर करवट लेता है। जो कल मीर थे, आज फकीर हैं और जो कल फकीर थे, वे आजकल शहर के नए पीर हैं।
नाथ के नांदिये का नया फरमान…
महादेव तक पहुंचने से पहले नांदिये के कान में अब अपनी व्यथा सुनाना होगी। नांदिये को लगा कि व्यथा में दम है तो वह मिलने के लिए महादेव के पास अनुशंसा पत्र देगा। आप को लग रहा है हम किसी मंदिर की बात कर रहे हैं। जी नहीं… यह व्यवस्था इंदौर के कांग्रेस अध्यक्ष विनय बाकलीवाल ने शहर के तमाम कांग्रेसी नेताओं के लिए लागू कर दी है। अब नाथों के नाथ कमलनाथ से मिलने के लिए बाकलीवाल से विनय करनी होगी, जिसके बाद आगे का मार्ग तय होगा। हालांकि नांदिये को लेकर पार्टी के ही बड़े नांदिये उदार हो।
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