Indore News Treatment:क्या आपको ये लक्षण अपने शरीर में नज़र आते हैं तो तुरंत करें ये काम ……

0
558
क्या आपको  सिर दर्द रहता है , नींद नही आती है , कमजोरी महसूस होती है या मांसपेशियों  में दर्द रहता है    इसका कारण आपके द्वारा किया जाने वाला तनाव  हो  सकता है।  यदि ऐसा आपके  साथ भी  हो रहा है तो उसकी अनदेखी न करें और तुरंत अपने चिकित्सक से सम्पर्क करें। 
 आप  देश के तमाम युवाओं की तरह  तनाव या चिंता करते हैं। हालांकि, थोड़े समय के लिए तनाव होना सकारात्मक चीज होती है, जो किसी व्यक्ति को किसी काम को गम्भीरता से करने की शक्ति देती है, लेकिन जब यह एक सीमा से अधिक हो जाती है, तो इसका असर व्यक्ति के सेहत, जिंदगी इत्यादि पहलुओं पर पड़ता है।
युवाओं में बढ़ता तनाव का कारण, टारगेट पूरा न कर पाना तथा एकल फैमिली, जिसके कारण परिवार के बुजुर्गों की सलाह की कमी रह जाती है, उनमें सशक्त निर्णय लेने की अक्षमता होती है।
तनाव के कारण एसिडिटी (पेट में जनल) जी.ई.आर.डी./हायटस हर्निया, पाईल्स, फिशर तथा फिश्चुला आदि की समस्यायें बढ़ जाती हैं। तनाव  की शिकार  महिलायें   भी हो रही है।
मानव-शरीर की प्रतिक्रिया है {तनाव }स्ट्रेस 
स्ट्रेस से तात्पर्य शारीरिक और भावनात्मक रूप से चिंता महसूस होना है। यह भावना ऐसे किसी भी घटना या विचार से आ सकती है, जिससे किसी व्यक्ति को निराशा, गुस्सा या घबराहट महसूस हो। तनाव मुख्य रूप से किसी चुनौती या मुश्किल भरे समय में मानव-शरीर की प्रतिक्रिया है।
स्ट्रेस क्या है?
स्ट्रेस से तात्पर्य शारीरिक और भावनात्मक रूप से चिंता महसूस होना है। यह भावना ऐसे किसी भी घटना या विचार से आ सकती है, जिससे किसी व्यक्ति को निराशा, गुस्सा या घबराहट महसूस हो। तनाव मुख्य रूप से किसी चुनौती या मुश्किल भरे समय में मानव-शरीर की प्रतिक्रिया है। हालांकि, थोड़े समय के लिए तनाव होना सकारात्मक चीज होती है, जो किसी व्यक्ति को किसी काम को गम्भीरता से करने की शक्ति देती है, लेकिन जब यह एक सीमा से अधिक हो जाती है, तो इसका असर व्यक्ति के सेहत, जिंदगी इत्यादि पहलुओं पर पड़ता है।
स्ट्रेस या तनाव के प्रमुख 3 प्रकार 
एक्यूट स्ट्रेस- स्ट्रेस के सामान्य रूप या प्रकार को एक्यूट स्ट्रेस कहा जाता है। यह मुख्य रूप से किसी काम को करने से पहले होती है, जो किसी व्यक्ति के लिए सकारात्मक या गंभीर रवैया अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
एपिस्डिक एक्यूट स्ट्रेस– इसे एक्यूट स्ट्रेस का अगला स्तर कहा जाता है। जब किसी शख्स को एक्यूट स्ट्रेस बार-बार होता है तो उसे एपिस्डिक एक्यूट स्ट्रेस कहा जाता है।
क्रोनिक स्ट्रेस  जब एक्यूट स्ट्रेस दूर न हो और वह लम्बे समय तक रहे तो उस स्थिति को मेडिकल भाषा में क्रोनिक स्ट्रेस कहा जाता है। यह स्थिति किसी भी शख्स के लिए नुकसानदायक साबित हो सकती है, क्योंकि यह उसे काफी गंभीर बीमारियों जैसे दिल का दौरा पड़ना, डिप्रेशन, कैंसर इत्यादि का शिकार बना सकता है।
स्ट्रेस के लक्षण क्या हो सकते हैं?
स्ट्रेस या तनाव किसी भी व्यक्ति को हो सकता है। इसके अलावा, किसी भी अन्य बीमारी की तरह तनाव के भी कुछ लक्षण होते हैं, जो इसके शुरूआत के संकेत देते हैं। इस प्रकार, यदि किसी व्यक्ति को अपने शरीर में ये  लक्षण नजर आए तो, उसे तुरन्त मनोवैज्ञानिक से मिलकर अपनी सेहत की जाँच करानी चाहिए-
कमजोरी महसूस होना- स्ट्रेस का प्रमुख लक्षण कमजोरी महसूस होना है। जब कोई शख्स तनावग्रस्त होता है, तब उसका कुछ खाने में मन नहीं लगता है, जिसका असर उसके शरीर में देखा जा सकता है।
सिरदर्द होना- चूंकि, स्ट्रेस एक मानसिक रोग है, इसलिए इसका असर मानवशरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग अर्थात् दिमाग पर पड़ता है। स्ट्रेस से पीड़ित लोगों को अक्सर सिरदर्द रहने की शिकायत रहती है।
नींद न आना- यदि किसी शख्स को नींद न आने की समस्या रहती है, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। उसे इसकी सूचना अपने डॉक्टर को जल्द-से-जल्द देनी चाहिए क्योंकि यह स्ट्रेस का लक्षण हो सकता है।
माँसपेशियों में दर्द होना- तनाव का अन्य लक्षण माँसपेशियों में दर्द होना है। ऐसी स्थिति में मेडिकल सहायता लेना ही बेहतर विकल्प साबित हो सकता है ताकि स्थिति को समय रहते काबू में किया जा सके।
स्ट्रेस किन कारणों से हो सकता है?
किसी प्रियजन की मौत होना- किसी भी शख्स के लिए प्रियजन को खोना सबसे बड़ा दुख होता है। एक ओर, कुछ लोग थोड़े समय के बाद इस दुख से उभर जाते हैं, तो कुछ लोगों के लिए इससे उभरने के लिए मेडिकल सहायता लेनी पड़ती है।
तलाक होना- स्ट्रेस का अन्य कारण तलाक होना भी है। जब दो लोग अलग होते हैं, तो इसका असर उनके साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों पर भी पड़ता है, जो स्ट्रेस जैसी समस्या का रूप लेता है।
नौकरी का छूटना- यदि किसी व्यक्ति की रोजी-रोटी या नौकरी छूट जाती है, तो उसे तनावग्रस्त होने की सम्भावना काफी हद तक बढ़ जाती है। इस प्रकार, स्ट्रेस नौकरी के छूटने का भी परिणाम हो सकता है।
नौकरी में खुश न रहना- हम सभी लोगों का सपना मनपसंद नौकरी का होता है। जहाँ एक ओर, कुछ लोग इस लक्ष्य प्राप्त करने में सफल हो जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर, कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें यह सुख नहीं मिल पाता है। ऐसी स्थिति में वे स्ट्रेस के शिकार बन जाते हैं।
पारिवारिक परेशानियाँ होना- प्रोफेशनल लाइफ के अलावा स्ट्रेस होने का कारण व्यक्तिगत भी हो सकता है। यदि लोगों के परिवार में लगातार लड़ाई-झगड़े हों, तो उस परिवार के सदस्य स्ट्रेस का शिकार हो सकते हैं।
स्ट्रेस का इलाज कैसे करें?
लोगों को स्ट्रेस की वजह से काफी सारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके बावजूद, राहत की बात यह है कि किसी भी अन्य बीमारी की तरह स्ट्रेस का भी इलाज संभव है, जिसके द्वारा वे अपनी जिंदगी खुशहाल तरीके से जी सकते हैं। यदि कोई व्यक्ति तनाव से पीड़ित है, तो वह इन पाँच तरीकों से अपना इलाज करा सकता है-
घरेलू नुस्खे अपनाना- स्ट्रेस का इलाज करने का सबसे आसान तरीका घरेलू नुस्खे को अपनाना है। इसके लिए एक्सराइज करना, पौष्टिक भोजन खाना, परिवार के साथ समय बिताना इत्यादि तरीके को अपनाया जा सकता है।
दवाई लेना- स्ट्रेस का इलाज दवाई के द्वारा भी सम्भव है। ये दवाई स्ट्रेस को बढ़ने से रोकने के साथ-साथ इसे कम करने में सहायक साबित होती हैं।
सप्लीमेंट का सेवन करना- सप्लीमेंट को सेहत के लिए नुकसानदायक समझा जाता है, लेकिन यदि इसका सेवन पर्याप्त मात्रा में किया जाए तो यह काफी सारी बीमारियों का इलाज करने में सहायक साबित हो सकता है। यह बात स्ट्रेस पर भी लागू होती है इसलिए स्ट्रेस का इलाज सप्लीमेंट का सेवन करके किया जा सकता है।
योगा  शिरोधारा करना चूँकि, स्ट्रेस का सीधा असर व्यक्ति के मस्तिष्क पर पड़ता है, इसलिए इसका इलाज योग के द्वारा किया जा सकता है। इस स्थिति में ध्यान लगाना बेहतर विकल्प साबित हो सकता है, जो स्ट्रेस से पीड़ित लोगों के दिमाग को शान्त करने का काम करता है।
मनोवैज्ञानिक से मिलना- यदि स्ट्रेस का इलाज किसी भी तरीके से नहीं हो, तब मनोवैज्ञानिक से मिलना ही एकमात्र विकल्प बचता है। मनोवैज्ञानिक स्ट्रेस से पीड़ित लोगों से बात करके स्ट्रेस को दूर करने की कोशिश कर सकते हैं।
तनाव का इलाज कराकर कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी फिर से खुशहाल तरीके से जी सकता है। इसके बावजूद, दुख की बात यह है कि तनाव या स्ट्रेस के प्रति जागरूकता न होने के कारण तनावग्रस्त लोग सही समय पर इसका इलाज नहीं करा पाते हैं। इस कारण उन्हें निम्नलिखित खतरों का सामना करना पड़ता है-
एसिड पेप्टिक रोग होना: तनाव का इलाज कराने पर इसका असर शरीर के अन्य अंगों पर पड़ सकता है। इसके कारण, लोगों को काफी सारी बीमारियाँ होने की संभावना बढ़ जाती है, जिनमें एसिड पेप्टिक रोग शामिल है, जिसे आम भाषा में गैस कहा जाता है।
नशीले पदार्थों की लत लगना- स्ट्रेस से पीड़ित लोगों की हालत दिन-प्रतिदिन बगड़ती जाती है। इसकी वजह से उन्हें नशीले पदार्थों जैसे शराब या धूम्रपान की लत लग सकती है।
वजन का बढ़ना- स्ट्रेस से पीड़ित व्यक्ति को किसी चीज का होश नहीं होता है, जिसकी वजह से वह अनियमित तरीके से भोजन करने या फिर आलस का शिकार बन जाता है। उसका वजन काफी तेजी से बढ़ सकता है, जो उसके लिए घातक साबित हो सकता है।
दिल सम्बन्धी बीमारियों का होना- जैसा कि ऊपर स्पष्ट किया गया है कि स्ट्रेस काफी सारी गम्भीर बीमारियों का कारण बन सकता है। इस प्रकार यदि स्ट्रेस को समय रहते ठीक न किया जाए तो यह दिल के दौरा का कारण भी बन सकता है।
मानसिक सन्तुलन बिगड़ना- स्ट्रेस का असर व्यक्ति की शारीरिक सेहत के साथ-साथ मानसिक सेहत पर भी पड़ता है। इसी कारण, उसका मानसिक संतुलन बिगड़ सकता है, जिसके लिए मेडिकल सहायता लेने की जरूरत पड़ सकती है।
स्ट्रेस की रोकथाम कैसे करें?
किसी भी व्यक्ति के लिए अधिक स्ट्रेस लेना काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है, जिसका असर उसके साथ-साथ उसके प्रियजनों पर भी पड़ता है.
होम्योपैथिक चिकित्सा : ये चिकित्सा   आपके मन के भाव के आधार पर की जाती है। चिकित्सक से खुल कर अपनी बात समस्या कहिये छुपाएँ नहीं। इन्दौर,मध्य भारत के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. ए.के. द्विवेदी इन्दौर  से सम्पर्क किया जा सकता है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here