चुनाव वहां और तलवारें मंज रही है यहां…गुस्ताखी माफ में नवनीत शुक्ला

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चुनाव वहां और तलवारें मंज रही है यहां...
इन दिनों बदनावर में उपचुनाव की आग इंदौर में भी जमकर लग रही है। भाजपा के दो दिग्गज नेता अब आमने-सामने आ गए हैं। तलवारें अच्छी-खासी खींच गई हैं। आगे मुकाबला अभी कुछ और समय चलता दिखाई दे रहा है। मामला कुछ ऐसा है कि राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने बदनावर जाकर चार घंटे में ही राजेश अग्रवाल को वापस भाजपा में प्रवेश दिलाकर मंत्री बनाने तक का वादा कर दिया। यह बात राजा छत्रसाल यानी भंवरसिंह शेखावत को हजम नहीं हो रही है, क्योंकि पिछला चुनाव उन्हें हरवाने में राजेश अग्रवाल की बड़ी भूमिका रही थी। राजेश अग्रवाल, कैलाश विजयवर्गीय के अच्छे-खास समर्थक हैं। भोपाल में बैठे तमाम नेता कह रहे हैं कि पार्टी से जब भी किसी को निकाला जाता है तो अनुशासन समिति को ही यह निर्णय लेने का अधिकार होता है। इसी प्रकार यदि किसी को आपातकाल स्थिति में लेना हो तो समिति ही सुनवाई के बाद निर्णय लेती है। इसके बाद यह रिपोर्ट संगठन मंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के पास अभिमत के लिए जाती है, परंतु अब भाजपा का पूरी तरह कांग्रेसीकरण प्रारंभ हो गया है। इसके चलते जिसकी चली, वह सिकंदर। यही स्थिति रही बदनावर में खाता न बही, भिया ने कहा तो फिर सब सही। पार्टी अब आने वाले समय में कांग्रेस कल्चर के साथ मैदान में दिखाई देगी, क्योंकि हांडी में बासमती चावल की खुशबू आसपास के चावल की खुशबू को समाप्त कर देती है। इधर भिया भी छत्रसाल के खिलाफ बिना बोले ही अपनी तैयारी कर रहे है। दूसरी ओर छत्रसाल के साथ उम्रदराज नेताओं की एक बड़ी फौज खड़ी हो रही है जो भाजपा को जीवन समर्पित करने के बाद आज भी खाली हाथ ही खड़ी हुई है।
जेल से बाहर आते ही रंगत बदली…
जमीनों के बड़े जालसाज, जो लंबे समय फरार चल रहे थे, उनकी अर्द्धांगिनी उनके कर्मों की सजा भोगने के लिए जेल में कैदियों की रोटियां थोप रही थीं और अपने दिन काट रही थीं। रोटी थोपते-थोपते उनका वास्तविक चेहरा भी दिखाई देने लगा था, यानी भरपूर बाल सफेद और रंगत गायब। तीन दिन पहले जमानत होने के बाद सबसे पहले उन्होंने ब्यूटी पार्लर का रुख किया और अपने आपको सजाया-संवारा, पर इसके बाद वे अपने पुराने घर न जाकर किसी और घर में स्थापित हो गई हैं। वैसे भी लंबे समय से फरार जमीनों के जालसाज को अय्याशी के दौरान भी यह याद नहीं आया था कि उनकी पत्नी जेल में है और पिता चक्की पीस रहे हैं। इसीलिए कुछ नया घर बसने जा रहा है।
अलंकारों से नवाज गए बाकलीवाल….
कल सांवेर उपचुनाव को लेकर विधायक विशाल पटेल के विशाल बंगले पर संपत हिल में दिग्गज कांग्रेस नेताओं की एक बैठक का आयोजन रखा गया है। इस बैठक में दो नेताओं के बीच जिस तरीके से भाषा और अलंकार का उपयोग हुआ उससे यह ज्ञात हुआ कि अलंकारों की लांचिंग मिल एरिये से ही शुरू होती है। मामला ऐसा था कि विनय बाकलीवाल ने सांवेर उपचुनाव को लेकर यह बैठक बुलाई थी। बैठक को लेकर पूर्व पार्षद चिंटू चौकसे और उनके सिपहसालार राजू भदौरिया ने बाकलीवाल को चार पीढ़ियां याद दिला दी। इतने अलंकार तो उन्हें भाजपा ने भी नहीं दिए। कारण यह था कि बैठक की सूचना उन्हें मात्र एक घंटे पहले दी। जैसे-तैसे मामला निपटा ही था कि दूसरी बार फिर सवारी आने पर यही घमासान चला। सवाल उठ रहा है कि इस खेल के पीछे कौन है। तो जानिये थोड़ी दूर की कौडी है। अध्यक्ष के बाद कार्यवाहक अध्यक्ष के लिए तीन नाम मैदान में थे। सज्जन भाई की तरफ से अभय वर्मा का नाम और जीतू पटवारी की ओर से अनवर दस्तक और चिंटू चौकसे के नाम थे। दोनों ही पटवारी के कलदार थे। चूंकि पटवारी को अनवर दस्तक की जरूरत इसलिए ज्यादा है क्योंकि दस्तक का बड़ा क्षेत्र राऊ विधानसभा में भी आता है। ऐसे में मसाला भरकर चिंटू की फुलझड़ी बम में बदल दी। विनय में हाथ डालना यानि कमलनाथ में हाथ डालना भी माना जाएगा। अब ऐसे में कहने को रहेगा बाकी तो आप समझ ही गए कि दो नए कार्यवाहक अध्यक्ष की लाइन किलीयर हो गई।
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