सांवेर में हाथी और बागी ने बढ़ाया कांग्रेस भाजपा का तनाव

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लोकल इंदौर १२ अक्टूबर। {प्रदीप जोशी}   इंदौर जिले की सांवेर सीट दोनों ही मुख्यदल भाजपा और कांग्रेस की प्रतिष्ठा बन चुकी है  .  पूर्व मंत्री तुलसीराम सिलावट के कारण सीधे तौर पर इस सीट से प्रतिष्ठा ज्योतिरादित्य सिंधिया की जुड़ी है तो
वही प्रेमचंद गुड्ड को टिकट देने के बाद कमलनाथ के सामने जीत की चुनौती है। बहरहाल इस सीट पर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला था ऐसे में बसपा ने मैदान में आकर दोनों दलों की रणनीति को बिगाडऩे का काम कर दिया। बसपा की आमद का तनाव अभी खत्म भी नहीं हुआ था कि भाजपा के वरिष्ठ नेता जगमोहन वर्मा ने पार्टी
से नाता तोड़ लिया। वर्मा ने शिवसेना के बैनर पर चुनाव लडऩे का भी ऐलान किया है। कांटा जोड़
मुकाबले में फंसी सांवेर सीट पर एक एक वोट की जद्दोजहद जारी है। ऐसे में बसपा और शिवसेना की मौजूदगी कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए खतरा बन सकते है। यों कि इनके द्वारा काटे गए वोट परिणाम को उलट भी सकते है।

उपेक्षा से नाराज वर्मा को मनाने के नहीं किए प्रयास :

कभी प्रकाश सोनकर के अभिन्न साथी रहे जगमोहन वर्मा पार्टी में हो रही अपनी उपेक्षा से नाराज थे। युवा मोर्चा के नगर अध्यक्ष से लेकर भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा की राष्ट्रीय कार्यकारणीतक का हिस्सा रहे वर्मा स्व सोनकर के खास सिपहसालार रहे है। सांवेर में ही उनकी ज्यादा सक्रियता रही है लिहाजा स्थानीय संगठन के सामने अपना वजूद दिखाने का यह मौका उन्हें ज्यादा मुफिद लगा। उम्मीद  थी कि पार्टी नेता उन्हें मना कर रोक लेंगे मगर किसी ने भी उनसे चर्चा नहीं की। यह बात उन्हें और ज्यादा चुभ गई और उन्होंने चुनाव लडऩे का ऐलान कर दिया। जागरण से चर्चा में उन्होंने कहा कि वे शिवसेना में शामिल हो रहे है और उसी के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरेंगे। वर्मा
ने पार्टी संगठन द्वारा की जा रही उपेक्षा की बात स्वीकार की साथ ही इंदौर में मजदूरों द्वारा किए जा रहे आंदोलन को अपनी नाराजी की असल
वज़ह बताया है।

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