कल से होंगे शनि वक्रीय:कुछ की प्रतिष्ठा बढ़ेगी, बड़े बदलाव के भी संकेत! ….. ज्योतिष पं. अजय शर्मा

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शनि देव के वक्रीय होने का मतलब है अपनी दिशा से उलटी दिशा में चलना। शनि देव 23 मई 2021 से वक्रीय होंगे व 141 दिनों के बाद वे 11 अक्टूबर से पुनः मार्गी होंगे! ज्योतिष में माना गया है कि वक्रीय ग्रह सबसे अधिक पावरफुल होते हैं और व्यक्ति के जीवन में वक्रीय होने से निश्चित तौर से परिवर्तन होते हैं! शनि ग्रह का वक्रीय होना अलग-अलग राशियों व जन्म कुंडली में भाव, स्थिति,के आधार पर कुछ जातकों को कि मानसिक शारीरिक और आर्थिक रूप से परेशानी दे सकता है। वहीं वक्रीय शनि कुछ जातकों को पद प्रतिष्ठा, धन लाभ, सुख शांति भी प्रदान करेंगे।
शनि ग्रह का वक्रीय होना आम लोगों के जीवन को भी प्रभावित करेगा। आपकी राशि में क्या परिवर्तन होगा, प्रदेश देश लिए यह समय कैसा रहेगा, इस पर एक सरसरी नजर!
मध्यप्रदेश
    शनि का वक्रीय होना प्रदेश में बड़े बदलाव के संकेत दे रहा है। जहाँ महामारी के खतरे से निकलना इतना आसान नहीं दिखाई दे रहा, वहीं अराजकता व जनता का विरोध बढ़ने के संकेत भी साफ़ नजर आ रहे हैं। प्रदेश के मुखिया पर भी संकट के बादल दिखाई देने  लगे हैं।
शिवराज सिंह चौहान
  मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जन्म कुंडली में वर्तमान में शनि की महादशा चल रही है। 8वें भाव में स्थित शनि इस महादशा में प्रतिष्ठा के साथ चिंता और दुख भी बढ़ाता है। शनिदेव के प्रभाव के कारण शिवराज सिंह चौहान चौथी बार मुख्यमंत्री पद पर विराजित हुए। जहां बुध की अंतर्दशा आने पर उन्हें पद से हाथ धोना पड़ा था। लेकिन, शनिदेव की कृपा के साथ केतु की अंतर्दशा और शुक्र की प्रत्यंतर दशा में वे फिर मुख्यमंत्री पद पर 21 अप्रैल 2020 को बैठे थे। 10वें भाव में शनि देव की मकर राशि होने से उनकी मान प्रतिष्ठा में लगातार इजाफा हुआ। वर्तमान में शनि की महादशा में शुक्र का अंतर चल रहा है, जो अत्यंत ही शुभ योग है। परंतु, वर्तमान दशा में शुक्र की अंतर्दशा के साथ ही राहु की प्रत्यंतर दशा चल रही है। इस दशा में मानसिक कष्ट एक साथ तनाव भी होता है एवं जीवन में कई प्रकार के संघर्ष होते हैं। ऐसे में जातक जो सफलता चाहता वह उसे नहीं मिलती। 23 मई से शनि देव के वक्रीय होने की दशा में निश्चित तौर से उसका असर दिखाई दे सकता है। इसके परिणाम विपरीत होकर शिवराज सिंह को संकट में डाल सकते हैं। ऐसी स्थिति में शिवराज सिंह को काफी सावधानी रखनी होगी, अन्यथा उनके पद पर संकट आ सकता है।
* भारत
     शनि के वक्रीय होने से भारत की चिंता और बढ़ेगी एवं महामारी के साथ अन्य समस्याओं से आसानी से छुटकारा नहीं मिलेगा। सरकार कि प्रतिष्ठा निरंतर कम होते दिखाई दे सकती है। ऐसे में जन आक्रोश और अराजकता बढ़ने के संकेत हैं! शनिदेव के वक्रीय होने से वृषभ राशि, सिंह, कन्या, तुला, मकर, धनु राशि वालों के लिए शुभ होगा। जबकि मेष, मिथुन, कर्क, वृश्चिक, मीन राशि वालों के लिए इसका प्रभाव अशुभ हो सकता हैं!
12 राशियों पर प्रभाव
   शनिदेव का वक्रीय होना 12 राशियों पर अपना असर जरूर डालेगा। जहां शनि की उल्टी चाल कुछ राशियों को प्रभावित करेगी, वहीं कुछ राशियों के लिए उत्तम समय आएगा। जिन राशियों में शनि देव  के कारण परेशानी उत्पन्न हो रही थी, उन्हें फायदा मिलने की उम्मीद है। जबकि, जिन राशियों को पहले से फायदा मिला था, उन्हें नुकसान मिलने की उम्मीद भी हो सकती हैं!
– वृषभ :  वृषभ राशि वालों के लिए शनि देव नवम भाव में वक्रीय हो रहे हैं। इसे इस राशि वालों के रूट रुके हुए काम की अड़चन दूर होगी एवं पारिवारिक लाइफ में मधुर था आ सकती है ,साझेदारी व्यापार में नुकसान हो सकता है !
– सिंह :  शनि राशि से छठे घर में गोचर करेंगे, यह सिंह राशि वालों के लिए बहुत शुभ संकेत है। ऋण, रोग व अन्य कार्यों में सफलता मिलेगी। किसी भी प्रकार का कोई कार्य, मार्केटिंग या कोई भी कोई भी यदि आप कर रहे हैं, तो उसमें फायदे की संभावना है।
– कन्या : कन्या राशि वालों के पंचम भाव में शनि वक्रीय हो रहे हैं, वहां से शनि की दृष्टि 7वें भाव पर पड़ रही है। काफी समय से इस राशि वाले अगर जोखिम का काम कर रहे हैं। शेयर मार्केट अथवा अन्य ऐसे कार्य जो सट्टा बाजार से संबंधित हैं और उन्हें हानि हो रही है, तो शनि के वक्रीय होने से उन्हें इन कार्यों में सफलता हाथ लगेगी। संतान से संबंधित कार्य सफल होंगे एवं चिंताएं दूर होगी। पार्टनर, ई-साझेदारी में भी लाभ होगा। वैवाहिक जीवन एवं स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
– तुला : तुला राशि के चौथे भाव में शनि के वक्रीय होने एवं उनकी दृष्टि उनकी तस्वीर 10वें भाव छठे भाव एवं प्रथम भाव में दृष्टि पड़ रही है। तुला राशि वालों के लिए जिस प्रकार सुख सुविधाओं का अभाव था, वह दूर होगा एवं उसमें वृद्धि होगी। आत्मविश्वास बढ़ेगा एवं जहां भी कार्य कर रहे हैं, वहां सफलता मिलेगी अथवा कार्यस्थल चेंज भी हो सकता है!
– धनु : राशि वालों की साढ़ेसाती की साढ़ेसाती भी चल रही है। शनि देव धनु राशि वालों के दूसरे भाव में होने से और अब उनकी दृष्टि चौथे, आठवें एवं ग्यारहवें भाव में होने से अभी तक धन की हानि हो रही थी। भाग्य में अड़चन हो रही थी, वह दूर होगी। घर में जो छोटी-छोटी बातों को लेकर तनाव की स्थिति थी, वह दूर होगी। सुख सुविधाओं में वृद्धि होगी, परंतु इस राशि वालों को विशेष तौर से स्वास्थ्य का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जरूरत से ज्यादा मानसिक तनाव लेना यह सोचना परेशानी में डाल सकता है इसलिए अपने मस्तिष्क से पर नियंत्रण रखना आवश्यक है। छोटी-मोटी बात को लेकर भावुक होना और गुस्सा होना परेशानी में डाल सकता है। पेट से संबंधित कोई परेशानी उत्पन्न हो सकती है।
– मकर : मकर राशि के स्वामी शनिदेव हैं और इस राशि पर शनि की साढ़ेसाती में वर्तमान में चल रही है। शनि की दृष्टि 10वें भाव में और 7वें भाव में पड़ रही है। अगर आपको काफी समय से मेहनत करने पर भी उचित परिणाम प्राप्त नहीं हो रहे हैं, पर शनि के वक्रीय होने की स्थिति में लाभ होगा। अगर आप इस अवधि में अपनी वाणी से संबंधित कार्य अर्थात स्पीच काउंसलिंग या सलाह देने का कार्य करते हैं, तो उसमें अच्छा लाभ होने के संकेत हैं। अपने ज्ञान का जितना उपयोग कर सकते हैं, वह करें। छोटी-छोटी बातों को लेकर गलती निकालना और नकारात्मकता पैदा करने से पारिवारिक समस्याएं उत्पन्न हुई थी, उसमें कभी आएगी और पारिवारिक सुख का लाभ मिलेगा!
– कुंभ : शनिदेव की उपस्थिति 12वें भाव में होने एवं दूसरे 6ठे भाव में दृष्टि होने से काफी लाभ के आसार हैं। अगर आपके पारिवारिक जीवन में दोस्तों से बेवजह किसी प्रकार के विवाद हो रहे थे, तो उस विवादों से मुक्ति से आपके जीवन की परेशानियां दूर होंगी। लेकिन, इस समय आपका भावुक होना आपको नुकसान पहुंचा सकता है। यदि विदेश यात्रा का सोच रहे हैं या वहीं पर बसने का विचार है, तो यह भी आपके लिए काफी फायदेमंद होगा। भाग्य की रुकावट दूर होगी।
– मेष : मेष राशि वालों के लिए शनि का वक्री होना मिलाजुला असर दिखाई देगा। जहां एक और आय में वृद्धि हो सकती है, खर्चे भी बढ़ सकते हैं, पारिवारिक स्थिति में तनाव उत्पन्न हो सकता है इसलिए सामंजस्य बहुत जरूरी है। व्यापार को लेकर शंका उत्पन्न हो सकती है, इसलिए सोच समझकर कार्य करें।
– मिथुन : इस राशि वालों के लिए समय उत्तम नहीं है। कार्यक्षेत्र में असफलता मिल सकती है एवं वाणी की कटुता के कारण विवाद उत्पन्न हो सकता है। पारिवारिक रूप से स्वास्थ्य की दृष्टि ठीक नहीं है, इसलिए स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखें। पत्नी के स्वास्थ्य पर विपरीत असर हो सकता है।
– कर्क : कर्क राशि वालों के लिए भी समय मिलाजुला रहेगा। अगर आपके कानूनी मामले चल रहे हैं, तो उसमें नुकसान हो सकता है। कानूनी विवाद में फंसने की भी संभावना है। लेकिन, एक अच्छी बात यह कही जा सकती है किसी प्रकार की लेनदेन को लेकर अथवा हिस्सेदारी को लेकर कोई विवाद चल रहा है, तो वह समाप्त होगा!
– वृश्चिक : इस राशि वालों के लिए शनिदेव का वक्रीय होना उत्तम नहीं है। पारिवारिक विवाद हो सकते हैं और स्वास्थ्य की दृष्टि से भी समय ठीक नहीं है। इस राशि वालों को अपने स्वास्थ्य एवं अपने परिवार के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। बिना किसी कारण यात्रा न करें। यात्रा करने से नुकसान हो सकता है।
– कुंभ : इस राशि वालों के लिए भी परिणाम मिले-जुले हो सकते हैं। जहां शनिदेव का वक्रीय होना स्वास्थ्य पर असर डालेगा, वहीं धन लाभ की संभावना भी दिखाई दे रही है। लेकिन, इस अवधि में मानसिक कष्ट हो सकता है और परिवार से विवाद की स्थिति उत्पन्न हो सकती। अतः संयम से काम ले और सोच समझकर निर्णय लें।
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(राशियों के आधार पर सटीक आकलन नहीं किया जा सकता। जन्म कुंडली में शनि की स्थिति भी प्रभावित करती है। शनि की स्थिति भाव के एवं उच्च निम्न स्थिति के आधार पर भी परिवर्तन हो सकता है)
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(लेखक अजय शर्मा वकील और ज्योतिष विज्ञान के जानकार हैं)
संपर्क : 98930 66604

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