Honey Trapकी जांच क्यों न CBI से कराएं:सरकार को उच्च न्यायालय का नोटिस

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लोकल इंदौर 1 अक्टूबर।मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने प्रदेश के बहुचर्चित हनी ट्रेप मामले में जांच सीबीआइ से कराए जाने की जनहित याचिका पर गृह विभाग और एसआईटी प्रमुख सहित सात को नोटिस दे कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।

प्रदेश के चर्चित हनी ट्रैप मामले की जांच सीबीआइ से कराने की मांग को लेकर हाई कोर्ट में दायर जनहित याचिका पर मंगलवार को जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला की युगल पीठ में सुनवाई हुई। कोर्ट ने प्रदेश के गृह विभाग, एसआइटी प्रमुख और एसएसपी सहित 7 जिम्मेदारों को नोटिस जारी कर पूछा है, क्यों न हनी ट्रैप मामले की जांच सीबीआइ को सौंप दी जाए।

भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता शिरिष मिश्रा ने एडवोकट निधि बोहरा के माध्यम से यायिका दायर की है। सीनियर एडवोकेट अशोक चितले ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि, इस मामले में रिपोर्ट दर्ज हुए करीब १५ दिन हो गए हैं। मामले में प्रदेश के बड़े नेताओं, ब्यूरोक्रेट्स और रसूखदार लोगों के शामिल होने की आशंकाएं जाहिर की जा रही हैं। सरकार ने जांच के लिए एसआइटी गठित की, नोटिफिकेशन जारी होने के 24 घंटे के भीतर ही एसआइटी प्रमुख को बदल दिया गया। पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों से जब्त वीडियो, सीडी और मोबाइल सहित अन्य इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस सीधे लैब में भेज दिए गए हैं।

मामले में प्रदेश के कई मंत्री और पूर्व मंत्रियों के शामिल होने की आशंका के आधार पर सबूतों में छेड़छाड़ की आशंका है। मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच के लिए इसे सीबीआइ को देना चाहिए। कोर्ट ने तर्कों से सहमत होकर नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं।

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