Indore:शहर की आबोहवा सुधार में खुद पहल करे प्रशासन !

अपने वाहनों को इलेक्ट्रॉनिक मोड़ में लाये, सबसे ज़्यादा प्रदूषण तो वही फैलाते है ।

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लोकल इंदौर । (विशेष संवाददाता)चौराहों पर रेड सिग्नल पर अब वाहनों के इंजन बन्द करना जरूरी होगा । शहर की आबोहवा सुधारने व वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए शहर में अब  यह मुहिम  भी शुरू  की गई है ।
मगर इस मामले में ऑटो मोबाइल इंजीनियर , ऑटो गैरेज संचालक सहित पर्यावरण प्रेमियों की , जंहा अलग अलग राय है, वंही प्रशासन की इस मुहिम से कई कतई सहमत नही है। कुल मिला कर शुरू होने के पहले ही , रेड सिग्नल पर इंजन बन्द मुहिम पर सवाल उठने लगे है।

इस मुहिम की शुरुआत करने वाले प्रशासन का कहना है रेड सिग्नल के वक्त चौराहे पर रुके वाहनों से जो धुंआ निकलता है, उसके कारण वायु प्रदूषण बढ़ता है। जबकी ऑटो मोबाइल इंजीनियर व ऑटो गैरेज संचालको का कहना है कि वाहन को स्टार्ट करने औऱ उसमे पहला गियर डालने के दौरान कोई भी वाहन सबसे ज्यादा धुंआ छोड़ता है।

इस मामले में जब अधिकारियों से बात की गई तो, उनका मानना था रेड सिग्नल पर वाहन रोकने के बाद उसका इंजिन गर्म रहता है , इसलिए वाहन स्टार्ट करते वक्त धुंआ नही छोड़ता । मगर अधिकारियों के इस तर्क से ऑटोमोबाइल इंजीनियर कार्तिक बाजपेयी निवासी भोलेनाथ कालोनी व वाहन रिपेयर करने वाले गैरेज संचालक सहमत नही है। लोकप्रिय नाम से ऑटोगेरेज चलाने वाले शाहिद अशर्फी का कहना है रेड सिग्नल पर वाहन का इंजिन बन्द होने के बाद स्टार्ट करने के दौरान उतना ही धुंआ निकलता है जितना पहली बार स्टार्ट करने पर निकलता है ।

पहले सरकार व प्रशासन खुद संकल्प ले

इधर शहर के पर्यावरण प्रेमियों का कहना है कि यदि प्रशासन शहर की वाकई आबो- हवा साफ स्वच्छ रखना रखना चाहता है , तो उसे सभी शासकीय विभागों में पेट्रोल डीजल से चलने वाले वाहनो का उपयोग बन्द कर ,देना चाहिए इलेक्ट्रिक कार वाहनों का इस्तेमाल करना चाहिए । पर्यावरण प्रेमी व सामाजिक कार्यकर्ता किशोर कोडवानी के अनुसार , इसकी शुरुआत सबसे पहले भारत सरकार सहित राज्य सरकारों को खुद करना चाहिए ।
पर्यावरण को साफ स्वच्छ बनाने के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रपति राज्यपाल लोकसभा अध्यक्ष विधान सभा अध्यक्ष के अलावा मुख्यमंत्री , मंत्री , विधायक पार्षद मंडल संचालक निगम अध्यक्ष सहित प्रमुख सचिव सम्भाग आयुक्त ,कलेक्टर निगम आयुक्त सही सभी को संकल्प लेना चाहिए कि अब पेट्रोल डीजल वाहनों का इस्तेमाल न करके इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग करेंगे।

विद्युत कम्पनी ने 6 इलेक्ट्रिक वाहन से की शुरुआत

इंदौर में पश्चिम क्षेत्र विद्युत वितरण कम्पनी ने इसकी शुरुआत कर दी है , इतना ही नही वाहनों की बैटरी चार्ज करने के लिए इलेक्ट्रिक चार्जर स्टेशन भी बना डाला है। यह अलग बात है 6 इलेक्ट्रिक वाहनों के बाद ,सभी डीजल पेट्रोल वाहन इसलिए नही हटाया जा सका क्योकि कम्पनी में सबसे ज्यादा निजी वाहन अटैच है । यह सभी वाहन कम्पनी के अधिकारियों के परिजनों व रिश्तेदारों के है। इसलिए विद्युत कम्पनी द्वारा की गई इलेक्ट्रिक वाहनो के इस्तेमाल का अभियान अटक गया है।

डीजल -पेट्रोल घोटाले पर रोक लगेगी।
इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल से जंहा शहर की आबोहवा साफ स्वच्छ होगी वंही प्रदूषित हवा के कारण दमा अस्थमा सहित श्वांस व फेफड़े हार्ट सम्बन्धित कई बीमारिया नही होंगी । इसके अलावा शासकीय व अर्धशासकीय विभागों निगमो में पेट्रोल डीजल सम्बन्धित हेराफेरी व घोटालों पर लगाम लगेगी । इसलिए नए साल 2022 से सभी शासकीय विभागों में इलेक्ट्रिक सरकारी वाहन करने का सरकारी फरमान जारी होना चाहिए।

सबके अपने अपने तर्क है

यदि 10 सेकंड से अधिक वाहन खड़ा रहे तो उसकी अपेक्षा रिस्टार्ट होने में कम ही धुंआ छोड़ता है, क्योंकि तब रिस्टार्ट करते समय इंजन गर्म रहता है। कई बार सिग्नल पर 60 से 180 सेकंड तक रुकना पड़ता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है।
डॉ. दिलीप वागेला
पर्यावरण विद व वरिष्ठ वैज्ञानिक

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