Indore Corona :इंदौर में कोरोना से डॉक्टर की मौत

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लोकल इंदौर 10 अप्रैल।इंदौर में  शनिवार को एमवाय अस्पताल के डॉक्टर दीपक सिंह की  कोरोना से मौत हो गई। वे एमवाय अस्पताल में मेडिकल ऑफिसर के पद पर कार्यरत थे और सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में कोविड मरीजों का उपचार कर रहे थे।

 जानकारी के अनुसार वे कोरोना मरीजों के उपचार के दौरान ही वे संक्रमण का शिकार हो गए थे। शनिवार को उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के बाद अन्य डॉक्टरों ने प्रदेश सरकार पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए सोशल मीडिया पर रोष व्यक्त किया है।

2010 बैच के पासआऊट थे

इंदौर के रहने वाले डॉ. दीपक सिंह एमजीएम मेडिकल कॉलेज की 2010 बैच से एमबीबीएस पॉसआउट थे। उनकी बैच के अन्य डॉक्टरों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि कोरोना वारियर्स की तरह काम कर रहे डॉ दीपक खुद संक्रमित हो गए थे। उनके फेफड़े 80 फीसदी से ज्यादा संक्रमित हो गए थे इसके बावजूद सरकार ने उन पर कोई ध्यान नहीं दिया।

प्रदेश की सरकार गहरी नींद  में सो रही है

डॉक्टर उमेश मंडलोई ने अपनी फेसबुक वॉल पर लिखा कि आज हमारे बैचमेट डॉक्टर दीपक सिंह कोरोना से लड़ते हुए शहीद हो गए है। वे हमारे बीच नहीं रहे। आज उन्होंने इंदौर के एमवाय अस्पताल अस्पताल में अपनी आखरी सांस ली। कोरोना से लड़ते हुए आज एक और डॉक्टर की मौत हो गई, लेकिन प्रशासन अभी भी खामोश है। क्या डॉक्टर इसी तरह मरने के लिए छोड़ दिया जाता है? क्या डॉक्टर के लिए प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नही है? प्रशासन की तरफ से ना ही कोई प्रशासनिक अधिकारी मिलने आया ना ही कोई पहल की गई। आज भी जूनियर डॉक्टर अपने साथियों के हक के लिए लड़ रहे है लेकिन प्रशासन द्वारा डॉक्टर्स को लगातार नजरअंदाज किया जाता है। प्रशासन द्वारा ना तो डॉक्टर्स को उच्च स्वास्थ्य केंद्र पर भेजा जाता है ना ही मरणोपरांत डॉक्टर्स के परिजनों की की सहायता की जाती है। बस सरकार बार-बार घोषणा करती है परंतु उसके अनुसार डॉक्टर्स को कोई सुविधाएं नहीं दी जाती है। एक और डॉक्टर का इस हालात मे पहुंचना और उसको ना बचाने की कोशिश करना प्रदेश सरकार के लिए बेहद ही शर्म की बात है। लेकिन हमारे प्रदेश की सरकार गहरी नींद  में सो रही है, ऐसे और कितने डॉक्टरों का बलिदान चाहिए? इससे ज्यादा शर्म की बात नहीं हो सकती है प्रदेश सरकार के लिए..!

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