Indore :कैलाश विजयवर्गीय के बयान से प्रदेश की “भाजपा” राजनीति में उबाल

जुबान का फिसलना और फिर उसे सही ठहराने की कोशिश

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लोकल इंदौर। राजनीति में हर बात का अपना मतलब होता है। यहाँ तक कि भूल-चूक वाले बयानों के पीछे भी कुछ राज होता है। पर, यदि बात कैलाश विजयवर्गीय की हो, तो उनके बारे में कहा जा सकता है कि वे कोई भी बात बिना सोचे नहीं बोलते और न उनकी जुबान फिसलती है। यदि कभी फिसलती भी है तो उनकी मर्जी से। हाल ही में उनका एक कार्यक्रम में खेल मंत्री यशोधरा राजे को मुख्यमंत्री बोलना, उनकी जुबान फिसलना माना जा रहा है! शायद ऐसा हुआ भी हो, पर उन्होंने बाद में इसके पीछे जो तर्क दिए उससे स्पष्ट हो गया कि उन्होंने जो कहा वो सोच समझकर ही बोला गया।
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय की भले ही मंशा वह नहीं रही हो, लेकिन उन्होंने इंदौर में जो बयान दिया, उसके वायरल होते ही  प्रदेश की भाजपा राजनीति में उबाल सा आ गया। हालांकि, यह तय माना जा रहा है कि अगले विधानसभा चुनाव तक प्रदेश सरकार में नेतृत्व परिवर्तन होगा! लेकिन, कैलाश विजयवर्गीय के बयान से राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई।
उल्लेखनीय है कि इंदौर के एक खेल आयोजन में कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश के खेल मंत्री यशोधरा राजे को जो कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थी, उन्हें ‘मुख्यमंत्री’ कह दिया था। इसे एक मानवीय भूल कहा जा सकता है। लेकिन, जिस तरह से बाद में कैलाश विजयवर्गीय ने अपनी इस भूल को ‘सप्तऋषियों’ का आशीर्वाद बताकर अपनी बात को सही ठहराने की कोशिश की, उससे यह कतई नहीं लगता कि यह मानवीय भूल होगी। लगता यही है विजयवर्गीय ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज के सन्तुष्टो को हवा देने का काम किया है।

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राजनीति में कुछ भी कहना कुछ भी देखना, होने से अलग होता है। कैलाश विजयवर्गीय के इस बयान से पहले ही प्रदेश के गृह मंत्री और कद्दावर नेता डॉ नरोत्तम मिश्रा अचानक दिल्ली चले गए थे। कहा जा रहा कि उन्हें हाईकमान ने बुलाया था। लेकिन, उन्होंने इस पर कोई स्पष्टीकरण नहीं दिया मिश्रा का अचानक दिल्ली जाने को लेकर प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री गोपाल भार्गव ने तंज भी कसा था। दिल्ली से लौटने के बाद नरोत्तम मिश्रा का उनके घर जाकर अकेले में बातचीत करना और उसके बाद कैलाश विजयवर्गीय का इस तरह का बयान भूलवश ही सही प्रदेश की राजनीति में सरगर्मी पैदा कर रहा है।
इसके पहले भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को समय-समय पर हटाने की मुहिम चलाई जाती रही है। लेकिन, कोई भी मुहिम अभी तक मुकाम तक नहीं पहुंची। इसे शिवराज सिंह की किस्मत कहें या उनका विकल्प न मिल पाना। अगले विधानसभा चुनाव तक शिवराज सिंह बने रहेंगे या नहीं, इसे लेकर संशय है।

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