Indore News : नए किस्म का गेंहू : रोटियां अब बनेगी रंगीन

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लोकल इंदौर ४ फरवरी।(धर्मेन्द्र सिंह चौहान) इंदौर के किसानों ने एक ऐसी किस्म के  गेंहूँ का किस्म तैयार करने में सफलता हासिल की है जिसकी रोटियां रंगीन बनेगी।  गेहूं गोल्डन नहीं बल्कि काला, नीला ओर बैंगनी रंग का है। गेंहूँ का आटा  तो सफेद होगा पर रोटियां गुलाबी रंग की  बनेगी।
 जानकारी के अनुसार लंबे प्रयास के बाद इंदौर के किसानों ने वैज्ञानिकों की सहायता से नए प्रकार के गेहूं की किस्म तैयार करने में सफलता हासिल कर ली। हालांकि इसके लिए सामान्य गेहूं से एक पानी ज्यादा लगेगा, परन्तु पौष्टिक होने के साथ ही इस गेहूं की रोटियां काली, सफेद और गुलाबी रंग की होगी, जो जल्द ही पकाई जा सकेगी। यह गेहूं दूसरे गेहूं की किस्म से ज्यादा पौष्टिक भी होगा। आने वाले समय में यह गेहूं बाजार में दिखाई देने लगेगा।
गेहूं गोल्डन नहीं बल्कि काला, नीला ओर बैंगनी रंग
कनक नाम का गेहूं गोल्डन नहीं बल्कि काला, नीला ओर बैंगनी रंग में आने लगा है। यह गेहूं सोने की चमक जैसा दिखने वाले गेहूं से कई गुना ज्यादा पौष्टिक तो होगा ही, साथ ही जामुन, स्ट्रॉबेरी, चुकुंदर, जैसे फलों में पाए जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट (एनथोसाइनिन) ज्यादा मात्रा में पाया जाता है। मानव शरीर को स्वास्थ रखने के लिए एंटीऑक्सीडेंट की बहुत आवश्यकता होती है और इस गेहूं में यह सभी गुण पर्याप्त मात्रा में है। यही कारण हैं कि इसे उपयोग में लेने के बाद दिल को रोग, डायबिटिज, कैंसर, मोटापा, कोलेस्ट्राल, तनाव जैसी कई दर्जनभर बीमारियों को दूर रखने में मददगार हो रहा है। स्वास्थ्य शरीर के लिए एंटीऑक्सीडेंट युक्त भोजन बहुत जरुरी होता है। यह गेहूं इसका विकल्प है। इसके सेवन से रोग-प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही हैं साथ ही किसानों की आमदनी में भी बड़ा इजाफा हो रहा है। गेहूं का वास्तविक नाम (नाबी एमजी) जिसे लोग काला गेहूं के नाम से जानते है। जिससे चलन में इसका नाम काला गेहूं ही पड़ गया है।
वैज्ञानिकों का दावा हैं कि काले गेहूं की तासीर प्रचलित गेहूं से कहीं अधिक पौष्टिक होती है। काले गेहूं में सामान्य गेहूं के मुताबिक एनथोसाइनिन की मात्रा अधिक होती है। आम गेहूं में पिगमेंट की मात्रा 5 से 15 पीपीएम होती है। जबकी काले गेहूं में पिगमेंट की मात्रा 40 से 140 पीपीएम होती है। एनथोसाइनिन एंटीऑक्सीडेंट का काम करता है। इसमें जिंक की मात्रा भी अधिक होती है। काला गेहूं 70 से 170 रुपए किलो मिल रहा है, जबकि क्विंटल में इसकी किमत 3500 रुपए मिल रही है। वहीं सामान्य गेहूं का भाव 1900 रुपए से लेकर 2400 रुपए प्रति क्विंटल रहता है।
इंदौर में देपालपुर तहसील में शाहपुरा गांव में भी इसकी खेती बड़े पैमाने पर शुरू हो गई है। खरगोन जिले के कसरावद के 12 गांवों में इसकी खेती की जा रही है। किसान रोशन सेन आरगेनिक खेती कर रहे है। काले गेहूं के लिए इन्होंने दो बीघा जमीन अलग से आरक्षित कर रखी है। इनका मानना हैं कि काले गेहूं की पैदावर सामान्य गेहूं से कम होती है, वहीं इसमें खर्च अधिक होता है। जबकि इसे बोने की और दवाई के छिड़काव की प्रोसेस एक जैसी ही हैं।
बावजूद इसके काले गेहूं में पौष्टिकता अधिक होती हैं, जबकि सामान्य गेहूं में गुणवत्ता कम पाई जाती है। इस गेहूं का प्रचार अभी प्रारंभ नहीं हुआ है। इसे प्रयोग के तौर पर ही किसान खरीद और बेच रहे हैं। सोशल मिडिया के माध्यम से काले गेहूं को अभी किसान ही खरीद रहा हैं और किसान ही बेच रहा है।

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