Indore : इंदौर में 24  दिन में बनी फिल्म मनस्वी 7 अक्टूबर को बड़े पर्दे पर होगी रिलीज

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लोकल इंदौर  २९ सितम्बर l आगामी 7 अक्टूबर को देशभर के सिनेमाघरों  में रिलीज होने वाली आध्यात्मिक थ्रिलर फिल्म मनस्वी  फिल्म  के लेखक- निर्देशक, कलाकार  और प्रोडक्शन हाउस भी इंदौर भी का है। निर्देशक मनोज ठक्कर ने  बताया कि यह फिल्म “अघोरी. बायो ग्राफिकल नॉवेल’ से प्रेरित है। यह किताब मैंने, जयेश और पटकथा लेखक नूपुर ने कुंभ में मिले अघोरी से मुलाकात के आधार में पर लिखी थी।
फिल्म की शूटिंग 24  दिन में पूरी हुई
फिल्म को पूरी तरह से इंदौर के 30 किलोमीटर क्षेत्र के भीतर, अगस्त 2020 के दौरान, सभी कोविड -19 सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करते हुए शूट किया गया था। टीम ने अपने व्यवसाय चलाने के कई वर्षों के प्रबंधन अनुभव को फिल्म के सेट पर उपयोग में लाया है।
फिल्म का निर्देशन मनोज ठक्कर ने किया है, जो एक प्रकाशित लेखक और टीम के आध्यात्मिक गुरु हैं। वह आध्यात्मिक विषयों की चार पुस्तकों के लेखक भी हैं, व मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल और भारत में चार राष्ट्रपति सम्मानों के प्राप्तकर्ता हैं। उन्होंने अपनी पुस्तक काशी मरणान्मुक्ति के लिए कई पुरस्कार जीते हैं और उन्हें उनके काम के लिए ऑस्ट्रेलिया में विक्टोरियन संसद में भी सम्मानित किया गया है।
डिवाइन ब्लेसिंग स्टूडियो की फिल्म में लीड रोल में हैं सीए रवि मित्तल। अघोरी का किरदार वास्तविक जीवन में साधक शशांक  चतुर्वेदी ने निभाया है। मुकेश दुबे भी अहम भूमिका में हैं। जयेश राजपाल प्रोड्यूसर, शिवकुमार शर्मा एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर और  प्रतीक संघवी को-प्रोड्यूसर हैं।
फिल्म मनस्वी का ट्रेलर इंदौर में काफी धूमधाम से लॉन्च किया गया। रिंकू ठक्कर, अर्चना दुबे और प्रतीक संघवी के सहयोग से जयेश राजपाल के नेतृत्व में इंदौर के फिल्म प्रेमियों के समूह द्वारा निर्मित, इस फिल्म की घोषणा पिछले हफ्ते प्रसिद्ध बॉलीवुड ट्रेड एनालिस्ट कोमल नाहटा ने की थी।
ये है कहानी 
मनस्वी अपने नायक सत्यकाम, जो एक सीबीआई अधिकारी है, की आध्यात्मिक यात्रा के इर्द-गिर्द घूमती है, जो मध्य भारत में निरंतर हो रही बाल हत्याओं के मामले को सुलझाने का प्रयास कर रहा है। इस प्रवास के दौरान उसकी मुलाकात अपने गुरु, अघोरी बाबा से होती है, जो अपनी करुणा से उन्हें सिखाते हैं कि अघोर होना क्या है। उसी समय उसके गुरु उसका परिचय बौद्ध भिक्षु लामाजी से भी कराते हैं, जो तंत्र को अपने जीवन में शामिल करने के अर्थ पर प्रकाश डालते हैं।
इन दो गुरुओं की मदद से, सत्यकाम की हत्याओं के रहस्य को सुलझाने की बाहरी यात्रा को परम सत्य की खोज की उसकी आंतरिक यात्रा के साथ बुना गया है।
मनोज के अनुसार, इस फिल्म को बनाने के कई कारण थे, लेकिन मुख्य रूप से, “यह अघोर और तंत्र की अवधारणाओं के आसपास की जनसामान्य भ्रांतियों को दूर करने के लिए है। हम आज के युवाओं को उनकी अपनी भाषा में अध्यात्म का बहुप्रतीक्षित संदेश देना चाहते थे। क्योंकि इस आधुनिक जीवन में, हम कई नकारात्मक विचारों, भय, चिंता, आक्रोश, दिमागी तनाव, अनिद्रा के बोझ तले दबे हुए हैं, ऐसा लगता है कि हम अपने उद्देश्य की भावना खो चुके हैं। मनस्वी का लक्ष्य हमें यह दिखाना है कि बाहर का रास्ता तो भीतर की ओर मुड़ना है।
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