Indore woman Day:इंदौर की इन 61 महिलाओं ने खुद बनाया है अपना सम्मान

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लोकल इंदौर 7 मार्च  .अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर इंदौर में अनेक  संगठन और संस्थाएं महिलाओं का सम्मान करेंगी,  लेकिन शहर में 61 ऐसी भी महिलाएं हैं जो आज   अपना सर  उठाकर स -सम्मान अपना जीवन व्यतीत कर रही  हैं इन 61 महिलाओं को करीब 2 साल पहले मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत लोन दिलाया गया था और महिलाओं ने  रिक्शा  खरीद कर अपना कामकाज शुरू किया था हालांकि पुरुष के वर्चस्व को चुनौती देते हुए ये  महिलाएं भारी जद्दोजहद के बीच सड़क पर निकल पड़ी थी . किसी ने  पति ना होने की मजबूरी ने तो किसी ने परिवार के पेट पालने की मजबूरी के तहत यह निर्णय लिया तो  कुछ विकलांग महिला नौकरी ना मिल पाने कारण भी इस रोजगार से जुड़ी  . आज ये सभी महिलाये अपनी  और परिवार  की जिमेदारिया अपने कंधों पर उठाये है .

भागीरथ पुरा निवासी अर्चना शर्मा 2 साल से रिक्शा चला रही है .सुबह 9:00 से रात 9:00 बजे तक काम के दौरान अर्चना शर्मा को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है . सिटी बस, वेन और  ऑटो चालक भी परेशान करते हैं राजबाड़े पर पुलिस का सहयोग नहीं मिलता इसके अलावा कई बार शराबी लोग रिक्शा में बैठ जाते हैं उनसे  किराए को लेकर माथापच्ची भी होती है महिला चालकों ने कई बार अपनी शिकायत पुलिस से की मगर कोई समाधान नहीं हुआ

गौरीनगर    निवासी  देवकन्या पांडे बताती हैं कि उन्होंने 10वीं तक पढ़ाई की है लेकिन पैरों से विकलांग है. इस कारण उन्होंने रिक्शा चलाने के लिए मजबूर होना पड़ा . उन्हें कहीं नौकरी नहीं मिली परिवार पालने की मजबूरी में ई-रिक्शा चलाती हैं .उनके पति सुनील पांडे भी रिक्शा  चलाते हैं . सवारी को लेकर कई बार सिटी बस चालक और वैन चालकों  विवाद  करते रहते हैं .
नन्द बाग़   निवासी सावित्री लोधी ने बताया कि 1 साल पहले रिक्शा  करना शुरू किया है ₹160000 का लोन लिया और 5000 उसका बैंक किश्त  आती  दी है उनकी 4 बच्चे हैं और परिवार चलाने के लिए पति कमाई पूरी नहीं होती इसलिए  रिक्शा  चला रही है रही है.
कुशवाहा नगर निवासी सीमा ने बताया कि कई बार रिक्शा और अन्य वाहन चालक उन्हें परेशान करते हैं और कहते हैं कि यह धंधा क्यों कर रही है कौन  रिक्शा  चलाती है यह पुरुषों का काम है.

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