कमलनाथ सरकार गिरेगी या रहेगी तय करेगा झाबुआ का उपचुनाव …….!

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लोकल इंदौर 11 जून. आगामी 6 माह के भीतर झाबुआ में होने वाले विधानसभा के चुनाव का परिणाम कमलनाथ सरकार की स्थायित्व का निर्धारण करेंगे. यदि कांग्रेस यह सीट जीत जाती है तो यह उसके लिए संजीवनी बूटी होगी.और भाजपा जीती तो कमलनाथ सरकार को अपना बहुमत साबित करने में परेशानी आ सकती है यानी झाबुआ विधानसभा  सीट के परिणाम प्रदेश की कमलनाथ सरकार के जीवन मरण का निर्धारण करेंगे .

एक बार फिर झाबुआ प्रदेश की राजनीति का  एक नया केंद्र बन गया है.  झाबुआ में आने वाले 6 महीने कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए मुश्किल वाले  होंगे क्योंकि झाबुआ विधानसभा सीट के लिए होने वाले उपचुनाव दोनों पार्टियों के लिए एक तरह के लिए लिटमस टेस्ट होगा इस चुनाव का नतीजा जिसके पक्ष में रहेगा   उसके अपने अलग मंतव्य होंगे .यही कारण है कि दोनों पार्टियां चुनाव तक झाबुआ में पूरे दमखम से अपनी ताकत दिखाएंगे. कांग्रेस की सरकार को बनाए रखने और और अपनी जमीनी ताकत साबित करने के लिए  यह एक मौका होगा  और यदि यह चुनाव भारतीय जनता पार्टी जीत जाती है तो कांग्रेस को अपना बहुमत साबित करने के लिए एडी  चोटी का जोर लगाना पड़ेगा. उल्लेखनीय है कि भाजपा 2018 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के बागी जेवियर मेड़ा के कारण जीत गई थी,  भाजपा ने   गुमान सिंह डामोर को पहले विधानसभा और फिर लोकसभा का चुनाव लगवाया लड़ाया और वे दोनों ही जीत गए .यदि कोई व्यक्ति दोनों सदनों में  चुना जाता है तो उसे 14 दिन के अंदर किसी एक सदन से अपनी सदस्यता छोड़ना पड़ती है. इस कारण भाजपा को डामोर को विधानसभा से इस्तीफा दिलाना पड़ा इस कारण प्रदेश  सरकार में उसके विधायकों की संख्या 108 रह गई है अब यदि विधानसभा में बहुमत हासिल करने का सवाल उठातो 229 विधायको के बीच  कांग्रेसअपने ११५ विधायकों के साथ अभुमत हांसिल कर लेगी . झाबुआ विधानसभा का चुनाव परिणाम कमलनाथ सरकार के लिए जीवन मरन का सबब बनेगा .

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