इस साल का आखरी सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर :भारत में ज्यादा असर नहीं…!

आंशिक ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा एक सीधी लाइन में नहीं होते और चंद्रमा सूर्य के एक हिस्से को ही ढंकता है

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इस साल का आखरी सूर्य ग्रहण 4 दिसंबर को लगने वाला है। यह एक कुंडलाकार ग्रहण होगा, जिसे आमतौर पर आंशिक ग्रहण के रूप में जाना जाता है। यह वह ग्रहण है जिसमें आकाश में रिंग ऑफ फायर दिखाई देता है। ऐसा तब होता है जब चंद्रमा सूर्य को ढक लेता है, लेकिन पूरी तरह से नहीं। हमने इस साल पहले से ही अलग अलग ग्रहण देखे हैं, जिसमें मई में होने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण और जून में दिखाई देने वाला रिंग ऑफ फायर सूर्य ग्रहण शामिल रहा है। पहले दिखाई देने वाले आंशिक सूर्य ग्रहणों के बीच का अंतर यह है कि चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से ढंक लेगा क्योंकि वे एक दूसरे के पास से गुजरते हैं। यह ग्रह पर एक छाया बनाएगा और सूर्य के कोरोना को उजागर करेगा, जो सूर्य के वातावरण का सबसे बाहरी हिस्सा है। चूंकि यह पूर्ण ग्रहण है, इसलिए यह पूरे आकाश को काला कर देगा, विशेष रूप से अंटार्कटिका में इसे देखा जा सकेगा।

यहां दिखाई देगा ग्रहण
ज्योतिषों के अनुसार मार्गाशीष माह की अमावस्या यानि कृष्ण पक्ष तिथि को अंतिम सूर्य ग्रहण दक्षिण अफीका, अंटार्कटिका, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अमेरिका और अटलांटिक के दक्षिणी भाग के निवासियों को दिखाई देगा। भारत में इसका असर ज्यादा नहीं होगा। सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है। ज्योतिष के मुताबिक इसने कम समय के अंतराल में दो ग्रहण का इं होना अशुभ होता है। 19 नवंबर को सबसे लंबी अवधि का चंद्र ग्रहण लगा था, हालांकि चंद्र ग्रहण का भी भारत में कोई असर नहीं हुआ था और न ही सूर्य डॉ ग्रहण का भारत में कोई असर होगा ।
आंशिक सूर्य ग्रहण को खंडग्रास ग्रहण भी कहते हैं। आंशिक ग्रहण तब होता है जब सूर्य और चंद्रमा एक सीधी लाइन में नहीं होते और चंद्रमा सूर्य के एक हिस्से को ही ढंकता है। इस खगोलीय स्थिति  को खण्ड ग्रहण कहा जाता है। इस स्थिति में जब ग्रहण सूर्य या चंद्रमा के कुछ हिस्से पर ही लगता है। यानि चंद्रमा सूर्य के सिर्फ कुछ हिस्से को ही  ढंकता है।
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