दुबई तक बिक रहे हैं इंदौर के माटी गणेश

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इंदौर १ सितम्बर ।  क्या श्रद्धा और आस्था का पर्व गणेशोत्सव आर्थिक मंदी से निपटने का माध्यम बन सकता है ? क्या गणेशोत्सव युवाओं, उद्यमियों और व्यापार जगत के लिए  प्रतिभा, उद्यमिता, रचनात्मकता, नवाचार और सफलता के महोत्सव में बदल सकता है ? ये सवाल आपको भी कुछ अजीब सा लग सकता है पर इंदौर के एक स्टार्टअप ने इसकी पहल की है.
माटी गणेश ने एक नई पहल करते हुए शास्त्रोक्त ढंग से मिट्टी में जड़ी बूटियों मिलाकर बिना रंग और केमिकल की मूर्तियां बनाना शुरू किया था। माटी गणेश ब्रांड की बिना रंग की उनकी मूर्तियां अब इन्दौर के अलावा मुंबई, दिल्ली, हरियाणा, सूरक्त, बड़ौदा, अहमदाबाद,जयपुर, जोधपुर और अलवर के अलावा दुबई तक जाती है। इस बार माटी गणेश ने मूर्तियों के साथ एक वाल टैगर डिजाइन करवाया  है. ये वॉल टैगर गणपति भगवान् के प्रति भक्ति को नए ढंग से डिफाइन कर सफलता का सन्देश दे रहा हैं.
इसके मुताबिक़ गणपति जी को प्रसन्न करने के लिए हमें पूजा के साथ-साथ रिद्धि की साधना करनी होगी.
रिद्धि को नए सिरे से डिफाइन करते हुए इसमें लिखा गया है कि रिद्धि सिर्फ भगवान् गणेश की पत्नी नहीं बल्कि प्रतिभा, बौद्धिकता, रचनात्मकता, कौशल और नवाचार का प्रतीक है. रिद्धि का अर्थ
समस्या को संभावना में , चुनौती को अवसर में, विचार को सर्विस या प्रोडक्ट में, प्रोडक्ट को ब्रांड और ब्रांड  को सुपर ब्रांड में बदलने का विजन और क्षमता है.
यदि हमने इस विजन और क्षमता को विकसीत  किया तो गणपति जी प्रसन्न होकर सिद्धि का वर जरूर देंगे।
सिद्धि का अर्थ निरंतर सफलता, यश और समृद्धि और सिद्धि का वर मिलने पर कोई मंदी, कोई रिसेशन, कोई स्लो डाउन हमें रोक नहीं सकेगा. 
माटी गणेश ने अपनी इस पहल को रिद्धि से सिद्धि की यात्रा का नाम देकर गणेशोत्सव को आस्था के साथ प्रतिभा, रचनात्मकता, नवाचार, उद्यमिता और सफलता के उत्सव में बदलने का आग्रह किया है.
माटी गणेश नाम से  शुरू हुए इस स्टार्ट अप ने अपनी शुरुआत मिट्टी में जड़ी बूटियों मिलाकर बिना रंग की शास्त्रोक्त मूर्तियां बनाने से की थी. मूर्तियां बनाने के साथ इसकी एक वेबसाइट matiganesh.comबनाई और ऑनलाइन और ऑफलाइन बिना रंग की मूर्तियों का सिलिसिला शुरू हो गया. उस समय बिना रंग की मूर्तियां देख लोग हैरान रह गए थे.
माटी गणेश ने बताया कि त्यौहारों को आस्था के साथ रचनात्मकता से जोड़ने की कोशिश कर रहें है।  होली के लिए फूलों से ऐसा रंग बना रहें है उबटन या स्क्रब की तरह त्वचा का पोषण कर उसे निखारे।
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