विधायक आकाश विजयवर्गीय की जमानत का फैसला भोपाल की विशेष अदालत करेगी

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लोकल इन्दौर 27जून। गुरुवार को इंदौर में दिनभर चली कानूनी प्रक्रिया के बाद विधायक आकाश विजयवर्गीय  को जमानत नही मिल सकी उन्हें अब जमानत  के लिए भोपाल  की विशेष अदालत में गुहार लगानी होगी . उल्लेखनीय है कि बुधवार को निगम की गैंग से जेलरोड के समीप गंजी कम्पाउण्ड में विवाद के दौरान बेट से पिटाई का वीडियो वायरल  होने के बाद आकाश  को गिरफ्तार  किया गया था और अदालत में जमानत नहीं मिलने से बुधवार को ही उन्हें जिला जेल में भेजा गया था।आज जमानत अर्जी को एडीजे जज ने क्षेत्राधिकार का हवाला देकर जमानत अर्जी खारिज कर दी। अब जमानत के लिए भोपाल आकाश विजयवर्गीय को वकीलों के माध्यम से जाना होगा।

गुरुवार को आकाश विजयवर्गीय  की ओर से भी वकील लगे रहे,वहीं निगम ने भी जमानत रुकवाने और विधायक के लिए भोपाल न्यायालय का हवाला देकर यहां जमानत रुकवाने की कोशिश की। आखिरकार आकाश विजयवर्गीय की जमानत निरस्त हो गई, आज भी वे जेल में ही रहेंगे।

विधायक आकाश विजयवर्गीय के रिहाई की मांग को लेकर गुरुवार सुबह से ही जेल के बाहर भाजपा समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। यहां पर कमलनाथ सरकार, पुलिस और निगम अधिकारियों के लिखाफ समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की। दोपहर में आकाश के छोटे भाई कल्पेश विजयवर्गीय उनसे मिलने जेल पहुंचे।

सांसदों और विधायकों के लिए विशेष अदालत!
सुप्रीम कोर्ट ने अश्विनी कुमार उपाध्याय विरुद्ध यूनियन ऑफ़ इंडिया के एक मामले में व्यवस्था दी थी कि चुने गए विधायकों और सांसदों (पूर्व और वर्तमान) से जुड़े आपराधिक मामले विशेष सत्र न्यायाधीश की विशेष अदालत में ही चलाए जाएं। इस संदर्भ में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट ने 27 सितम्बर 2018 को एक आदेश जारी करके आदेशित किया था कि ऐसे सभी मामले अब भोपाल के 21वें विशेष सत्र न्यायाधीश की अदालत में चलेंगे! आदेश के मुताबिक प्रदेश की अदालतों में चल रहे सारे मामले तत्काल प्रभाव से विशेष अदालत को ट्रांसफर कर दिए गए थे। आकाश विजयवर्गीय का मामला भी ऐसा ही है इसलिए सत्र न्यायाधीश ने जमानत याचिका ख़ारिज करते हुए इसे अपने क्षेत्राधिकार से बाहर का माना और याचिका सांसदों और विधायकों के लिए बनी भोपाल की विशेष अदालत के सामने प्रस्तुत करने को कहा है!

महापौर मालिनी ने कहा- आकाश को मुझसे बात करनी थी
विधायक और निगमकर्मी विवाद को लेकर गुरुवार को महापौर मालिनी गौड ने मीडिया से चर्चा की। भाजपा कार्यालय पहुंची महापौर ने कहा कि आकाश को मुझसे बात करना थी। वहीं, अधिकारियों के नहीं सुनने पर कुछ नहीं बोलीं। आकाश की जमानत पर बार-बार निगम अधिकारियों द्वारा आपत्ति लेने के बाद याचिका खारिज होने के मामले में सीधे जवाब नहीं देते हुए कहा- संगठन जो बोलेगा, उस पर काम करूंगी।

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