MP में राजनीति में भूचाल पैदा करने की कोशिश में संभावित नतीजों से उत्साहित भाजपा!

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लोकसभा के संभावित परिणामों को देखते हुए मध्य प्रदेश की राजनीति गरमाने लगी है। केंद्र में एनडीए की दुबारा सरकार बनने की संभावना को देखते हुए प्रदेश में शासित कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल लहराने के भी आसार बताए जा रहे हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले एग्जिट पोल के इशारे को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने कमलनाथ सरकार को अपदस्थ करने की तैयारियां शुरू कर दी! हालांकि, भाजपा के नेता खासकर पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव यह पहले से ही कहते आये हैं कि कमलनाथ सरकार ‘बॉस’ का इशारा मिलते ही गिरा दी जाएगी। यहाँ ‘बॉस’ से आशय है अमित शाह!
इस बात में कितनी सच्चाई है या तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन जिस तरह से लोकसभा परिणाम आने के पहले ही विपक्ष में बैठी भारतीय जनता पार्टी ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर कमलनाथ सरकार का शक्ति परीक्षण कराए जाने की मांग की, उससे लगता है कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश की कांग्रेस सरकार को अपदस्थ करने की तैयारियां गंभीरता से शुरू हो गई! लेकिन, खबर ये भी है कि पार्टी के दिल्ली दरबार से विधानसभा में प्रतिपक्ष के नेता गोपाल भार्गव को कड़ी लताड़ भी पड़ी है। उल्लेखनीय है कि हाल ही में हुए विधानसभा के चुनाव में लगातार तीसरी बार सत्ता में रही शिवराज सिंह की सरकार को शिकस्त खानी पड़ी थी। यहां शिवराज सरकार के अपदस्थ होने के बाद कमलनाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार ने प्रदेश का शासन संभाला है। लेकिन, इसके बाद लगातार कमलनाथ सरकार पर भारतीय जनता पार्टी हमले करते आई! चाहे वह कर्ज माफी का मुद्दा हो या अन्य सामाजिक मुद्दा! भाजपा ने कमलनाथ सरकार को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन, बीच-बीच में भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय यह कहकर राजनीतिक पंडितों को कयास लगाने के लिए मजबूर करते रहे कि यह सरकार एक इशारे पर गिर सकती है। वहीं, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान भी कमलनाथ के नेतृत्ववाली इस सरकार को लंगड़ी सरकार कहते आए हैं। वे यह कहते रहे हैं कि देखना है यह सरकार कब तक चल पाती है। इन्हीं बयानों के आधार पर प्रदेश के राजनीति सरोकार रखने वाले पत्रकार और अन्य प्रबुद्ध लोग भी यह मानने लगे थे कि कमलनाथ सरकार बस लोकसभा चुनाव तक ही मेहमान है। अब जबकि, लोकसभा चुनाव भी संपन्न हो गए हैं और ऐसे में एग्जिट पोल के आधार पर यदि नतीजा भाजपा के पक्ष में गया तो कमलनाथ सरकार का भविष्य क्या होगा? तब राज्यपाल से प्रदेश सरकार के लिए बहुमत साबित करने की मांग करना उन कयासों को सही साबित करने के लिए पर्याप्त है, जिनमें कमलनाथ सरकार को गिराने की बातें कही गई थी!
एक और जहां प्रदेश विधानसभा में विपक्ष के नेता गोपाल भार्गव ने राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार को शक्ति प्रदर्शन के लिए चुनौती दी है! वहीं दूसरी और राजनीतिक पंडितों का ये अनुमान है कि कांग्रेस के कई विधायक भारतीय जनता पार्टी के संपर्क में हैं। वे कभी भी पाला बदल सकते हैं। यदि ऐसा हुआ तो प्रदेश की कांग्रेस नेतृत्व वाली कमलनाथ सरकार को गिराने की में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ेगी। अब देखना यह है कि क्या लोकतंत्र में चुनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को गिराना लोकतंत्र का कौन सा चेहरा होगा?

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