#MPStartupPolicy हर स्टार्टअप को पढ़नी चाहिए इंदौर के सर सेठ हुकुमचंद की कहानी

आज इंदौर में स्टार्टअप पॉलिसी लांच हो रही है मुझे लगता है इस अवसर पर एमपी सरकार को इंदौर के सर सेठ हुकुमचंद पर आधारित पाठ सिलेबस में शामिल करने की घोषणा करना चाहिए ताकि नई पीढ़ी के स्टार्टअप फाउंडर इंदौर के इस सेल्फ मेड टाइकून से कुछ सीख सकें। -Subodh Khandelwal

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हर स्टार्टअप को पढ़नी चाहिए इंदौर के सर सेठ हुकुमचंद की कहानी
हर स्टार्टअप को पढ़नी चाहिए इंदौर के सर सेठ हुकुमचंद की कहानी

इंदौर। आज शाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंदौर में एमपी की स्टार्टअप नीति की घोषणा करेंगे।सरकार को भरोसा है कि ये नीति एमपी को कर्नाटक, महाराष्ट्र और दिल्ली की तरह स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित कर देगी। इस समिट के शुरू होने के पहले इंदौर के सेल्फमेड उद्यमी सर सेठ हुकुमचंद को याद करना लाजमी है जिन्होंने अपने विजन से अपनी इंडस्ट्रीज को उस ऊंचाई तक पहुंचाया कि कमाई तो छोड़िए उनके द्वारा दिए गए मोटे-मोटे दान की वेल्यू इंडेक्सिंग, इन्फ्लेशन के आधार पर आज के 4 हजार करोड़ रुपए के बराबर होती है।

हर स्टार्टअप के रोल मॉडल है सर सेठ हुकुमचंद

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सर सेठ हुकुमचंद

लोग उन्हें कारोबारी सेठ की तरह देखते है पर उद्यमी के रूप में वे हर स्टार्टअप के रोल मॉडल हो सकते है।स्टार्टअप किसी समस्या का आकलन कर उसके समाधान का ऐसा रास्ता खोजता है जो सबके हित में हो। इसके लिए ये जरूरी है कि स्टार्टअप फाउंडर परिस्थिति का आकलन कर सकें, उसमें अवसर को भांपने की क्षमता हो, वो चुनौती को अवसर में बदल सकें और जोखिम उठाने का साहस रखता हो और सोशली कनेक्टेड हो।ये सब क्वालिटीज सेठ हुकुमचंद के जीवन का हिस्सा थी।

कम कास्ट में बेहतर प्रोडक्ट बनाने का सिद्धांत

उनके विजन का अंदाजा आप इस बात से लगा सकते है कि 1920 के दशक में इंदौर में रहते हुए उन्होंने जूट इंडस्ट्री में छिपे अवसरों का आकलन कर लिया और कोलकाता में देश की पहली सबसे आधुनिक भारतीय जूट मिल लगाई। जिस जमाने में लोग इंश्योरेंस का नाम भी अच्छे से नहीं जानते थे उस जमाने में यानी 1940 में उन्होंने मुंबई में एक जनरल इंश्योरेंस कंपनी शुरू कर दी थी।

मालवा – निमाड़ में चार टैक्सटाइल मिल लगाई। उनकी हुकुमचंद मिल उस देश की सबसे आधुनिक टैक्सटाइल मिल थी। इसके अलावा उन्होंने 4 जीनिंग,एक स्टील मिल और एक शेविंग ब्लेड बनाने की फैक्ट्री भी लगाई। सेठ हुकुमचंद सबसे नई तकनीक की मशीन लगाते थे। उन्होंने उस समय हर इंडस्ट्री का मैनेजमेंट उसकी समझ रखने वाले लोगों के हाथ में दिया था। वे कम कास्ट में बेहतर प्रोडक्ट बनाने के सिद्धांत में भरोसा रखते थे।वे उस समय देश के लगभग हर प्रभावशाली नेता, उद्योगपति, साहित्यकार, संत, समाजसेवी और राजा -महाराजाओं से जुड़े हुए थे

सीएसआर की सबसे बड़ी मिसाल थे सेठ हुकुमचंद

सरकार ने कुछ साल पहले बड़ी इंडस्ट्रीज के लिए सीएसआर कानूनी रूप से अनिवार्य किया। सेठ हुकुमचंद उस जमाने में सीएसआर के भी सबसे बड़े रोल मॉडल थे। बनारस का काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, दिल्ली का लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज, इंदौर का कस्तूरबाग्राम संस्थान, नसिया धर्मशाला, प्रेमदेवी अस्पताल, कांच मंदिर सहित उन्होंने देश भर में 200 से ज्यादा स्कूल,कॉलेज, मंदिर, धर्मशाला, अस्पताल और होस्टल बनाने के लिए दान किया था।एक आकलन के अनुसार 1950 तक उन्होंने करीब 80 लाख रूपए का दान किया था। इंडेक्सिंग और इन्फ्लेशन रेट के आधार इसकी गणना की जाए तो ये रकम आज के 4000 करोड़ के बराबर होती है।

आज इंदौर में स्टार्टअप पॉलिसी लांच हो रही है मुझे लगता है इस अवसर पर एमपी सरकार को इंदौर के सर सेठ हुकुमचंद पर आधारित पाठ सिलेबस में शामिल करने की घोषणा करना चाहिए ताकि नई पीढ़ी के स्टार्टअप फाउंडर इंदौर के इस सेल्फ मेड टाइकून से कुछ सीख सकें।

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