भाजपाइयों को अब नया खेला… गुस्ताखी माफ में नवनीत शुक्ला

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भाजपाइयों को अब नया खेला…
हो गया नगर चुनाव का खेला… अब नया खेला शुरू होने जा रहा है। पिछले चार महीनों से कार्यकर्ताओं को गुड़ गीला कर जमकर हिलगाए रखा, खूब उम्मीदवारी के लिए दौड़ाया। अंतत: जो कार्यक्रम पहले दिन से तय था, वह लागू हो गया। निकाय चुनाव नहीं हो रहे हैं। इसके पहले पंचायत चुनाव का कामकाज चलेगा। वह भी तय नहीं है। दो महीने उलट-पलटकर इसी में निकल जाएंगे, इसके बाद बारिश का खेला शुरू हो जाएगा और बारिश के बाद ही निकाय का खेला फिर शुरू होगा। मानना पड़ेगा, भाजपा में भी कार्यकर्ताओं को झंत्री बनाकर ये घूमियो, वो घूमियो करने के बाद अब सुस्ताने के लिए घर बैठा दिया है। वैसे भी टिकट की आस में सौ रुपए लीटर का पेट्रोल भरवा-भरवाकर जेब भी खाली हो गई है, दूसरी ओर देश को संभालने वाले इस कदर जुटे हुए हैं कि चौदह घंटे से सोलह घंटे पूरी ताकत लगा रखी है। दाढ़ी बनाने की फुर्सत भी नहीं मिल रही है। इधर उम्मीदवारी की आस में कई युवा नेताओं की काली दाढ़ी थोड़ी-बहुत सफेद नहीं, पूरी सफेद हो गई है। चुनाव की बात करो तो एक भाजपा नेता ने कहा कि हमने पहले ही कहा था, आधी कैबिनेट बंगाल हो गई और आधी कैबिनेट भिया के कांग्रेस में आने के बाद कंगाल हो गई।
वाकई सांसदजी सठिया गए है क्या…
अंतत:  शहर के सांसद ने कोरोना का टीका लगवा ही लिया। हालांकि अभी तक यह व्यवस्था फ्रंट लाइन कार्यकर्ताओं और 60 साल से ऊपर के लोगों को ही लगने की गाइडलाइन थी। फ्रंट लाइन में वे आते नहीं है। वैसे भी राजनीति में वे बेकलाइन से आए है। दूसरा उनके पेनकार्ड और दूसरे पैदा होने के दिवसों से जोड़ा जाए तो वे अभी तक सठियाए नहीं है। सठियाने का मतलब 60 साल का होना होता है। शहर में लोग बुजुर्गों से पूछते है सठियाए हो कि नहीं। फिर तीसरा कारण वे बीमार है। शरीर से तो सांसदजी स्वस्थ ही दिखते है अब कोई आंतरिक स्थिति गड़बड़ हो तो बात अलग है। शारीरिक रूप से भी वे चुस्त लगते है, दिमाग के बारे में अभी तक दो-तीन बार ही टेस्टिंग हुई है उसमें थोड़ी गड़बड़ हम नहीं कह रहे लोग कह रहे है। हम तो अभी भी कह रहे है जैसे भी है भले है। पर फिर ये टीका लग कैसे गया सवाल यह भी उठ रहा है। ये सवाल लोग नहीं हम उठा रहे है। सांसद ने सफाई दी है .. आगे की आप जानो…
मनीष बाबू यानि छत्ते में बरैया…
भोपाल के वल्लभ भवन में इन दिनों अधिकारियों के बीच मनीष बाबू को लेकर बड़ी चर्चाएं हैं। पिछले दिनों उन्होंने प्रगति विहार यानि शहर के नए करोड़पतियों और धनाढ्यों की कॉलोनी को अवैध घोषित कर दिया है। यानि अब यहां रुपए का माल चवन्नी में भी नहीं बिकेगा। तीन हिस्सों में बने प्रगति विहार में इंदौर में पदस्थ रहे कई धाकड़ अधिकारियों के भूखंड भी है। कुछ के बंगले भी है और उन्हीं की आड़ में कुछ कंगले भी है। इधर वल्लभ भवन में अधिकारियों में चर्चा यहां से शुरू हुई कि मनीष बाबू ने इस बार बरैया के छत्ते में हाथ डाल दिया है। कई दिग्गज रानी मक्खियों से मोर्चा खुल गया है। इस पर वहां बैठे एक प्रमुख सचिव ने बड़े ही मजाकिया लहजे में कहा कि इस बार बरैया के छत्ते में हाथ नहीं डाला है बल्कि बरैया छत्ते में घुस गई है और इसीलिए छत्ते में हड़कंप मचा हुआ है। इसी के साथ ये सवाल लोग नहीं हम उठा रहे है। आगे की आप जानो…
भिया पॉजिटिव…
अंतत: राजनीति में कोई नेता पॉजीटिव हो तो कई कार्यकर्ताओं को अच्छा लगता है। कई कार्यकर्ता कहते हैं कि अपने नेताजी नेगेटिव नहीं हैं। सबका भला सोचते हैं। भले ही उनका भला न हो रहा हो। ऐसे में इन दिनों भाजपा के बड़े पदाधिकारी, जो दीनदयालजी की सम्पदा को संवारने में कार्यालय पर जुटे हुए थे, वे अचानक खबर मिली कि पॉजीटिव हो गए हैं। पॉजीटिव होने के पहले नक्षत्र गार्डन में पंडित वी.डी. शर्मा के विराट दर्शन दिखाई देने के दौरान ठीक एक दिन पहले वे कई नक्षत्रों से गले मिले और कुछ के गले भी पड़े थे। अब समझ ये नहीं आ रहा है कि उस विशाल गार्डन में राहू-केतु से लेकर पुण्य प्रतापी सूर्य, चंद्र, घंटे और घड़ियाल भी मौजूद थे। बैठे-बिठाए इनमें से कितने पॉजीटिव हुए होंगे या अब हो रहे होंगे।
कार्यकर्ता भी शंका के दायरे में….
ज्योति बाबू भाजपा की सरकार बनाने के बाद एक साल से ज्यादा समय से मंत्री बनने की आस में पपीहे की तरह इंतजार कर रहे हैं। कांग्रेस में उनका जलवा फरोश अलग था, अब वे भाजपा की बेकबैंचर हो गए हैं। राहुल गांधी ने भी यह बोलकर और मुसीबत खड़ी कर दी कि वे आने वाले समय में कांग्रेस में ही वापस आएंगे। एक तो वैसे ही जो दूसरे दलों से भाजपा में आते हैं, उन पर भाजपा नेताओं का विश्वास करना मुश्किल होता है। ऐसे में और नई शंका को जन्म दे दिया। देखते हैं वे अपने पिता की तरह वापस तमाम राजनीति करने के बाद फिर कांग्रेस के साथ दिखेंगे या फिर भाजपा के साथ। इधर ज्योति बाबू के करीबी नेता कह रहे है साहब ने कहा है अभी शांति बनाए रखे।
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