मुंह और गले का  कैंसर ………  बायोप्सी करना  डॉक्टर की मजबूरी होती है – डॉ.  मोहम्मद अखील …

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मुंह और गले के कैंसर का इलाज कईं परिस्थितियों पर निर्भर करता है । इसके इलाज के लिए कईं बातों का डॉक्टर को पता होना बहुत आवश्यक है, जैसे – कैंसर का मूल कहां है, अर्थात इसकी जड़ कहां है, अभी कैंसर किस स्टेज पर है और आखिरी बात यह कि यह किस तरह का कैंसर है।  कैंसर  के इलाज के लिए पहले दवाओं से ठीक करने का प्रयास किया जाता  है लेकिन अन्य परिस्थियों में जब ये बीमारी  बढी हुई होती है  तो बायोप्सी करना जरूरी हो जाता है .

कैंसर  के इलाज के कई तरीके  है लेकिन  ये सब कैंसर पर  निर्भर करता है कि वो किस स्टेज पर है. समान्यता दवाईयों के इलाज से शुरुआत होती है यदि प्रारम्भिक अवस्था में इसका पता लग जाय तो  इलाज से ये ठीक हो सकता है .

दवाईयां

मुंह के कैंसर की शुरुआती स्टेज में   दवाईयां  दे कर  इलाज किया जाता है और मरीज ठीक भी हो जाते है .ये दवाईयां शरीर में कैंसर के विकास को रोक देती हैं, जिससे कैंसर दूसरे अंगों में नहीं फैलता ।

रेडिएशन थेरेपी 

कई बार रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल भी किया गया है । इस थेरेपी के ज़रिए शरीर में कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है ।

कीमोथेरेपी

कीमो थेरेपी  तब उपयोग में लाई जाती है जब कैंसर आखिरी स्टेज का हो और आपरेशन और रेडीएशन का उपयोग नही करसकते ,ये आपरेशन के पहले देते है ताकि बीमारी को कम कर सर्जरी और आपरेशन के बाद भी एडियेशन के साथ भी देते है .

कैंसर सर्जरी जब पीड़ित को किसी भी प्रकार के उपचार से आराम नहीं मिलता है तब कैंसर सर्जरी की जाती है । इसमें ट्यूमर और उसके आस-पास के टिश्यू को सर्जरी द्वारा निकाल दिया जाता है।

बायोप्सी को ले  यह भ्रम रहता है कि  उक्त गठान से छेड़खानी करने से क्या कैंसर पूरे शरीर में फ़ैल जाएगा ? ऐसा बिल्कुल नहीं है. बिना बायोप्सी किसी भी  डॉक्टर को  पता नहीं चल  सकता की ये कौन से प्रकार का  कैंसर  है ?  हर प्रकार  के कैंसर का  इलाज अलग होता है .

अत:  बायोप्सी को लेकर  भ्रमित नही होना चाहिए .  मुंह और गले के मामले में यदि आप को लगता है आप के मूंह में कोई छाला या घाव है जो दो सप्ताह से ज्यादा समय से भी  दवाईया लेने के बाद भी ठीक नही हो रहा है तो अपने डाक्टर को अवश्य दिखाए और उनसे सलाह ले .

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

दवाईयां

मुंह के कैंसर की शुरुआती स्टेज में   दवाईयां  दे कर  इलाज किया जाता है और मरीज ठीक भी हो जाते है .ये दवाईयां शरीर में कैंसर के विकास को रोक देती हैं, जिससे कैंसर दूसरे अंगों में नहीं फैलता ।

रेडिएशन थेरेपी 

कई बार रेडिएशन थेरेपी का इस्तेमाल भी किया जाता  है । इस थेरेपी के ज़रिए शरीर में कैंसर की कोशिकाओं को नष्ट करने का प्रयास किया जाता है ।

बायोप्सी

माउथ कैंसर को बायोप्सी सर्जरी से भी ठीक किया जाता है। इसके ज़रिए शरीर में कैंसर वाले टिशू को अलग किया जाता है ।

 

कीमोथेरेपी

कैंसर के अधिकतर मामलों में डॉक्टर कीमोथेरपी को ही अपनाते हैं। इसमें कोशिश यही रहती है कि कैंसर को खत्म करके ठीक किया जाए । लगभग हर तरह के कैंसर में इसका प्रयोग होता है, जैसे स्तन कैंसर, लंग कैंसर, ब्रेन ट्यूमर आदि ।

 

सामान्य कैंसर सर्जरी 

जब पीड़ित को किसी भी प्रकार के उपचार से आराम नहीं मिलता है तब कैंसर सर्जरी की जाती है । इसमें ट्यूमर और उसके आस-पास के टिश्यू को सर्जरी द्वारा निकाल दिया जाता है।

 

बायोप्सी  डॉक्टर  की भी मजबूरी है जो उन्हें करनी होती  है क्योंकि बायोप्सी से ही कैंसर है या नहीं है, इसका इसका पता लगाया जाता है . मूंह और गले  में जो गठान या घाव होते है उनका विश्लेष्ण करने के लिए बायोप्सी बहुत ही जरूरी  होती ताकि ये पता लगाया जा सके कि गठन कहां की है और कौनसे-कौनसे ऑर्गन में है .इसके अलावा कोई चारा नहीं है .

बायोप्सी को ले  यह भ्रम रहता है कि  उक्त गठान से छेड़खानी करने से क्या कैंसर पूरे शरीर में फ़ैल जाएगा  ऐसा बिल्कुल नहीं है. बिना बायोप्सी किसी भी  डॉक्टर    पता नहीं चल  सकता की ये कौन से प्रकार का  कैंसर  है  हर प्रकार  के कैंसर का  इलाज अलग होता है .

अत:  बायोप्सी को लेकर भर्मित नही होना चाहिए .  मुंह और गले के मामले में यदि आप को लगता है आप के मूंह में कोई छाला या घाव है जो दो सप्ताह से ज्यादा समय से भी  दवाईया लेने के बाद भी ठीक नही हो रहा है तो अपने डाक्टर को अवश्य दिखाए और उनसे सलाह ले .

 

 

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