पंजाब नेशनल बैंक ने फर्जी दस्तावेज पर दिया 1 करोड 70 लाख का लोन, ईओडब्लू में केस दर्ज

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लाेकल इंदौर। 22 सितंबर । ऑटोपार्टस और टायर के बिजनेस के नाम पर पंजाब नेशनल बैंक से आरोपितों ने 1 करोड 70 लाख रूपए का लोन फर्जी दस्तावेज के आधार पर ले लिया। मामले में पंजाब नेशनल बैंक के मुख्य प्रबंधक और वरिष्ठ प्रबंधक ( ऋण ) सहित 6 लोगों के खिलाफ ईओडब्लू ने केस दर्ज किया है।

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ इकाई , इन्दौर के पुलिस अधीक्षक धनंजय शाह ने बताया की पंजाब नेशनल बैंक शाखा जवाहर मार्ग इन्दौर के बैंक मैनेजर नंदकिशोर पिता श्री प्रेमसिंह द्वारा दी गई लिखित शिकायत पर से प्राथमिक जॉच क्र . 16/19 दर्ज की जाकर जाँच इकाई के उप निरीक्षक के सी पाटीदार से कराई गई । जॉच पर पाया गया की मेसर्स श्री राम इंटरप्राईजेस के प्रोप्राईटर शिलादित्य सिंह चौहान पिता जयप्रकाश सिंह , एरोड्रम रोड इंदौर के द्वारा ऑटो पार्टस एवं टायर के व्यवसाय हेतु नगद शाखा ऋण प्राप्त करने बाबत् आवेदन प्रस्तुत किया था , एवं साथ में बंधक के रूप में अपने प्लॉट जो भैरव लाल पिता महादेव प्रसाद प्रजापती , सावेर रोड इन्दौर से ग्राम कुमेडी तहसील सांवेर जिला इन्दौर में स्थित सर्वे नं 0 25/2/5/1 पैकी रकबा 0.051 आर.ए. ( 5500 वर्गफीट ) की कृषि भूमि को डायवर्टेट भूमी के रूप मे भैरवलाल प्रजापति से 63,25000 / रू 0 में क्रय की जाकर लोन प्राप्त करने के उद्देश्य से ही डायवर्टेट भूमि की 2,00,00000 / रू 0 की रजिस्ट्री दिनांक 22.11.2017 को कराई गई है । फर्जी दस्तावेज होने के बावजूद बैक के प्रोसेसिंग अधिकारी बृजेश पुलैया , वरिष्ठ प्रबंधक ( ऋण ) के द्वारा की जाकर 1.70 करोड़ रूपये के ऋण देने की सिफारिश की गई । सम्पत्ति का मूल्यांकन व्ही.एस. मेहता , आर्किटेक्ट , इंदौर के द्वारा गाईडलाईन के हिसाब से कीमत 29,64,682 / -रू 0 हाने के बावजूद 2,30,58,200 / -रू . की मूल्यांकन रिपोर्ट प्रस्तुत की गई है । मनोहर वाधवानी , मुख्य प्रबंधक के द्वारा स्वीकृत किया गया तथा दिनांक 24.11.17 को खाता क0-1936008700001898 में राशि रू . 1.70 करोड का अंतरण ऋणी के खाते में किया गया । बंधक सम्पत्ति का पुनः मुल्यांकन कराया गया तब बंधक सम्पत्ति की कीमत 11259000 / रू 0 होना पाया गया । बंधक रखी गई सम्पत्ति के दस्तावेज कृषि भूमि के एस.डी.एम. सांवेर से डायवर्टेट आदेश पत्र क्र . / 2202 / अ -2 / री / 12-13 / सावेर , दिनांक 18.06.2013 का पत्र फर्जी होकर कूटरचित होना पाया गया है । संयुक्त संचालक , ग्राम एवं निवेश , कार्यालय इन्दौर से आदेश पत्र कमांक 4152 / एसपी 407 / 12 / नग्रानि / 2013 , इन्दौर दिनांक 29.04.13 से नक्शा पास होने के संबंध में तस्दीक करते वह भी कूटरचित होना पाया गया । भूअर्जन अधिकारी इन्दौर विकास प्राधिकरण जिला इन्दौर से जारी अनापत्ति प्रमाण पत्र भी फर्जी होकर कूटरचित होना पाया गया । उक्त बंधक सम्पत्ति राजस्व रिकार्ड में वर्तमान खसरा नकल अनुसार आज भी कृषि भूमि होकर भैरवलाल के ही नाम पर दर्ज है । बैंक अधिकारी श्री बृजेश पूलैया व तत्कालीन बैंक मैनेजर श्री मनोहर बाधवानी द्वारा बंधक सम्पति की सार्वजनिक सूचना जारी किये बगैर ही , तथा राजस्व प्राधिकरणे मे प्रस्तावित बंधक व्यक्ति के नाम पर सम्पति अंतरित नहीं होने के बावजूद भी , कृषि भूमी की सम्पति को डायवर्टेट के रूप में बंधक रखकर आरोपीयो ने डायवर्टेट के जाली दस्तावेज तैयार कर स्वयं को सदौष लाभ पहुंचाने एवं बैंक को सदोष हानि पहुंचाने के आशय से षडयंत्र पूर्वक छल कपट बईमानी से कूटरचित दस्तावेजो के आधार पर बैंक से 1,70,00,000 / – रू 0 प्राप्त कर ब्याज सहित 1,83,56,465 वापस जमा न कर धोखाधडी की जाना पाया जाने से आरोपीगण 1. मेसर्स श्रीराम इंटरप्राईजेस प्रोप्रा ० शीलादित्य सिंह चौहान 2. भैरव लाल प्रजापती , 3. मनोहर बाधवानी , तत्कालीन शाखा प्रबन्धक , 4. श्री बृजेश पुलैया . 5. श्री व्ही . एस . मेहता आर्किटेक्ट 6. अन्य के विरूद्ध अपराध धारा 420 , 467 , 468 , 471 , 120 बी भा 0 द 0 वी 0 एवं लोकसेवकों के संबंध में भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7 – सी के तहत प्रकरण दर्ज किया जाकर अनुसंन्धान में लिया गया है ।

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